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🚀 ऐतिहासिक शुरुआत! चंबा के नचोली में गूंजा आत्मनिर्भर उत्तराखंड का शंखनाद – ‘जन-संवाद (सीरीज़-1)’ संपन्न!

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पलायन के खिलाफ युवाओं और मातृशक्ति की हुंकार, लिए गए 4 बड़े और ऐतिहासिक निर्णय। पूरी रिपोर्ट पढ़ें…

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन को रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों को सृजित करना अब सिर्फ एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि धरातल पर एक जन-आंदोलन बन चुका है। इसी कड़ी में ‘विकसित उत्तराखंड मिशन 2047’ के तहत चंबा ब्लॉक के नचोली ग्राम पंचायत भवन में एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण ‘जन-संवाद (सीरीज़–1)’ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस बैठक में क्षेत्र के ऊर्जावान युवाओं, सजग जनप्रतिनिधियों और मातृशक्ति (महिला स्वयं सहायता समूहों) ने भारी संख्या में भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, रोजगार, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और पहाड़ों से हो रहे पलायन पर पूर्णविराम लगाने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रणनीति तैयार करना था।

🎯 महामंथन के 4 ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय

इस ‘जन-संवाद (सीरीज़–1)’ में केवल चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा देने के लिए कई बड़े और व्यावहारिक फैसले लिए गए, जो आने वाले समय में चंबा ब्लॉक की तस्वीर बदलेंगे:

1. डिजिटल महिला परिषद (Women Council) का गठन

मातृशक्ति को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक विशेष ‘महिला परिषद’ के गठन का निर्णय लिया गया है। इसके तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जो न केवल स्थानीय महिलाओं को व्यापार के नए अवसर देगा, बल्कि देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंड के प्रवासियों (Diaspora) को भी अपनी मिट्टी और जड़ों से जोड़ने का काम करेगा।

2. गजा में बनेगा भव्य संग्रहण केंद्र (Collection Centre)

स्थानीय उत्पादों को सही बाजार और सही दाम दिलाने के लिए गजा में एक बड़ा ‘कलेक्शन सेंटर’ (संग्रहण केंद्र) खोला जाएगा। यह केंद्र स्थानीय किसानों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जहाँ से उनके उत्पादों की सीधे ब्रांडिंग और बिक्री की जा सकेगी।

3. युवाओं के लिए मुफ्त डिजिटल और व्यावहारिक ट्रेनिंग

पहाड़ के युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए जल्द ही एक विशेष मार्गदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत युवाओं को बिल्कुल मुफ्त:

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (Amazon, Flipkart आदि) पर बिजनेस करना सिखाया जाएगा।

  • डिजिटल मार्केटिंग के गुर सिखाए जाएंगे ताकि वे घर बैठे कमाई कर सकें।

  • मशरूम उत्पादन और पोल्ट्री पालन (मुर्गी पालन) जैसे व्यावहारिक व्यवसायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

4. ‘जन-संवाद सीरीज़-2’ का एलान

इस मुहिम को और अधिक व्यापक और असरदार बनाने के लिए इस महामंथन के अगले चरण यानी ‘जन-संवाद (सीरीज़-2)’ का आयोजन जल्द ही गजा में किया जाएगा, जिसमें और अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

🙏 विशेष आभार एवं सराहना: जिन्होंने इस मुहिम को दी मजबूती

इस सफल आयोजन के पीछे कई कर्मठ जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों का योगदान रहा। कार्यक्रम के शानदार संयोजन के लिए ग्राम प्रधान श्री मदन लाल उनियाल जी और मुख्य अतिथि के रूप में पधारे जिला पंचायत सदस्य (टिहरी) श्री ताजवीर खाती जी का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया गया।

एक विशेष और अनुकरणीय सराहना:

बैठक में ब्लॉक मिशन मैनेजर (चंबा) श्री सी. एम. उनियाल जी को भी विशेष रूप से याद किया गया। हालांकि, अपरिहार्य संचार अंतराल (Miscommunication) के कारण वे समय पर कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुँच पाए, लेकिन युवाओं के मार्गदर्शन और इस मुहिम को सफल बनाने के लिए उनके द्वारा किए गए ईमानदार प्रयासों, तत्परता और प्रतिबद्धता की पूरी सभा ने मुक्तकंठ से सराहना की।

⚠️ कुछ ग्राम प्रधानों की बेरुखी और अस्वस्थता का बहाना

जहाँ एक तरफ क्षेत्र की जनता और युवा अपने सुनहरे भविष्य की रूपरेखा तय करने के लिए एकजुट थे, वहीं कुछ ग्राम प्रधान अचानक ‘अस्वस्थ’ हो गए। जन-सरोकारों के प्रति उनकी यह बेरुखी और बैठकों से नदारद रहने की प्रवृत्ति उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाती है।

🚨 युवा कल्याण अधिकारी श्री पंकज तिवारी की घोर लापरवाही! (जनता का कड़ा संदेश)

इस पूरे आयोजन में सबसे अधिक निंदनीय, चौंकाने वाली और आक्रोश पैदा करने वाली बात रही युवा कल्याण अधिकारी (टिहरी), श्री पंकज तिवारी जी की अनुपस्थिति!

युवाओं के रोजगार, कौशल विकास और भविष्य से जुड़े इतने संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा हो रही हो और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही नदारद रहें, यह एक घोर लापरवाही है। यह केवल एक बैठक से अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पहाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

टिहरी की जनता का स्पष्ट अल्टीमेटम:

“सरकारी पदों पर बैठकर जनता के टैक्स के पैसे से वेतन लेने वाले अधिकारियों की यह मनमानी और तानाशाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री पंकज तिवारी जी और उनके जैसे अन्य अधिकारियों को यह सख्त हिदायत है कि वे जन-सरोकार और विकास से जुड़ी बैठकों में अपनी उपस्थिति शत-प्रतिशत सुनिश्चित करें। यदि युवाओं के मुद्दों पर भविष्य में भी ऐसा ही लचर रवैया अपनाया गया, तो क्षेत्र की जागरूक जनता उग्र कदम उठाने और सड़कों पर उतरने को विवश होगी!”

🏔️ आइए, मिलकर बनाएं आत्मनिर्भर उत्तराखंड!

यह मिशन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड का है। जब तक हमारा युवा और हमारी मातृशक्ति आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होंगे, तब तक ‘विकसित उत्तराखंड’ का सपना अधूरा है। आइए, ‘जन-संवाद (सीरीज़–1)’ से शुरू हुई इस मुहिम से जुड़ें और अपने गांव, अपने ब्लॉक और अपने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें।

  • आयोजक: उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर

  • सह-संस्थापक: सुरवीर सिंह पुंडीर

  • संपर्क सूत्र (📞): 7290998562

यदि आप भी उत्तराखंड के विकास और पलायन रोकने की इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें और कमेंट में अपने बहुमूल्य सुझाव जरूर दें! 🚀💪

बिज़नेस वॉरियर्स बैच 1 – नैचोली, गजा, टिहरी गढ़वाल

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सिर्फ सीख नहीं, बल्कि सीधे व्यवसाय शुरू करने की तैयारी

उत्तराखंड के पहाड़ों से एक नई शुरुआत हुई है।
उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर के पहले बैच का गठन हो चुका है—जिसका नाम रखा गया है “बिज़नेस वॉरियर्स बैच 1”।

यह नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और उद्देश्य का प्रतीक है। इस पहले बैच को “वॉरियर्स” इसलिए कहा गया है क्योंकि ये वही युवा हैं जो सबसे कठिन चरण में इस पहल की नींव रख रहे हैं। आने वाले समय में बनने वाले बैचों के लिए रास्ता आसान हो, इसके लिए यह बैच सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य को अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़ रहा है।

ये युवा ऊर्जा, जुनून और संभावनाओं से भरे हुए हैं। यदि अपनी किशोरावस्था से तुलना करूँ, तो यह पीढ़ी अधिक जागरूक, तेज और अवसरों को समझने वाली है। इसलिए इस बैच से उम्मीद केवल सीखने की नहीं, बल्कि नई दिशा बनाने की है।

यह बैच केवल प्रशिक्षण नहीं ले रहा—
यह एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है।
यह ऐसे stepping stones और marketplace pathways बना रहा है, जिन पर चलते हुए आने वाले छात्र अपने सफर को और आसान बना सकेंगे।

आज उत्तराखंड का औद्योगिक और रोजगार परिदृश्य कई चुनौतियों से जूझ रहा है। युवाओं में बढ़ती निराशा, सीमित अवसर, और लगातार हो रहा पलायन समाज के लिए गंभीर संकेत हैं। ऐसे समय में केवल समस्याओं पर चर्चा करना आसान है, लेकिन समाधान के लिए कदम उठाना जरूरी है।

इसी सोच के साथ एक निर्णय लिया गया—
शिकायत नहीं, समाधान।

35 वर्षों के अनुभव, संघर्ष और असफलताओं से मिली सीख को आधार बनाकर, इस पहल की शुरुआत की गई है। उद्देश्य स्पष्ट है—युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार करना।

इस बैच को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आधुनिक डिजिटल और तकनीकी कौशलों से भी सशक्त बनाया जाएगा। प्रशिक्षण के अंतर्गत शामिल होंगे:

  • डिजिटल मार्केटिंग: SEO, SEM, Facebook, YouTube, Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यवसाय को बढ़ाना
  • ई-कॉमर्स प्रशिक्षण: Amazon, Flipkart, Meesho और अन्य मार्केटप्लेस पर उत्पाद बेचने की पूरी प्रक्रिया
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI):
    • AI टूल्स का उपयोग कैसे करें
    • AI आधारित सेवाओं और एप्लिकेशन को कैसे बेचें
    • प्रभावी prompt कैसे बनाएं
    • Agentic AI की समझ और उपयोग

इसका उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल युग में आत्मनिर्भर उद्यमी बनाना है।

यह पहल एक प्रेरणा से भी जुड़ी है।
Jack Ma, जो विश्व प्रसिद्ध ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba के संस्थापक हैं, ने कहा था—
“यदि आप 50 वर्ष के हो चुके हैं, तो आपका सबसे बड़ा कार्य नए बिज़नेस लीडर्स तैयार करना होना चाहिए।”

इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रयास अपने ही क्षेत्र से शुरू किया गया है।

यह सफर आसान नहीं है। सफलता की संभावना भले ही अभी सीमित दिखाई देती हो, लेकिन प्रयास पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी है। आज के डिजिटल युग, ओनर इकोनॉमी और बदलते अवसरों के दौर में, सही दिशा और मार्गदर्शन से पहाड़ का युवा भी आत्मनिर्भर बन सकता है।

“बिज़नेस वॉरियर्स बैच 1” केवल एक प्रशिक्षण समूह नहीं है—
यह एक प्रयोग है,
एक संघर्ष है,
और एक नई उम्मीद की शुरुआत है।

यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह केवल एक बैच की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के भविष्य की जीत होगी।

— उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर

विकास के सारथी: उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर की 12 वर्षीय यात्रा के मुख्य सूत्रधार

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प्रशासनिक मार्गदर्शन से लेकर वैज्ञानिक विशेषज्ञता तक—इन व्यक्तित्वों ने बदला ग्रामीण उद्यमिता का चेहरा

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास और स्वरोजगार की अलख जगाने वाला ‘उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर’ आज जिस मुकाम पर पहुँचा है, वह कई दूरदर्शी अधिकारियों और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन, सहयोग और प्रेरणा का परिणाम है।

आज हम उन प्रमुख व्यक्तित्वों को विशेष रूप से रेखांकित कर रहे हैं, जिन्होंने वर्ष 2012 से लेकर अब तक इस सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

1. श्री मृत्युंजय झा (प्रशासक एवं मार्गदर्शक)

पद: पूर्व महाप्रबंधक (GM), जिला उद्योग केंद्र, नरेंद्र नगर (2012-13)

योगदान:
आपने उत्तराखंड MSME पॉलिसी 2010 को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय जब पहाड़ी क्षेत्रों में औद्योगिक पंजीकरण एक जटिल प्रक्रिया मानी जाती थी, आपने उद्यमियों के लिए ‘सिंगल विंडो’ की भूमिका निभाई।

ग्रोथ सेंटर के लिए महत्व:
आपके द्वारा करवाया गया प्रारंभिक MSME पंजीकरण ही आज इस ग्रोथ सेंटर की वैधानिक नींव बना। आपने यह सिखाया कि सरकारी तंत्र एक नियंत्रक नहीं, बल्कि एक सशक्त ‘फैसिलिटेटर’ भी हो सकता है।

2. डॉ. अनुराधा दत्ता (वैज्ञानिक एवं खाद्य विशेषज्ञ)

पद: पूर्व वैज्ञानिक, केवीके रानीचौरी; वर्तमान प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (खाद्य विज्ञान), पंतनगर विश्वविद्यालय

विशेषज्ञता: वैल्यू एडिशन एवं पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट

योगदान:
डॉ. दत्ता ने वर्षों तक टिहरी के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को यह सिखाया कि मंडुआ, झंगोरा और गहत जैसे पारंपरिक अनाजों को केवल भोजन तक सीमित न रखकर एक ‘न्यूट्रिशनल ब्रांड’ के रूप में विकसित किया जा सकता है।

ग्रोथ सेंटर के लिए महत्व:
आपके शोध पत्र और प्रशिक्षण मॉड्यूल हमारे ग्रोथ सेंटर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध हुए हैं, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार (District-to-Dollar) के मानकों के अनुरूप विकसित करने में सहायक हैं।

3. डॉ. रमेश सिंह पाल (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विचारक)

संस्थान: ICAR-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा

विशेषज्ञता: कृषि जैव रसायन एवं वैचारिक प्रेरणा

योगदान:
आपने पहाड़ी फसलों की पोषण विशेषताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया। आपकी पुस्तक “अपना स्वरूप” और आपके व्याख्यान कृषि को केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

ग्रोथ सेंटर के लिए महत्व:
आपकी सोच और मार्गदर्शन ने युवाओं में यह विश्वास जगाया कि खेती और तकनीक का संयोजन ही उत्तराखंड में पलायन को रोकने का सबसे प्रभावी समाधान है।

4. श्री अभिषेक रोहिला (IAS, युवा नेतृत्व)

पद: पूर्व मुख्य विकास अधिकारी (CDO), टिहरी गढ़वाल (2020-21)

योगदान:
कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में आपने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभाला, बल्कि MNREGA और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं को भी निरंतर गति प्रदान की।

ग्रोथ सेंटर के लिए महत्व:
आपकी कार्यशैली यह दर्शाती है कि आधुनिक डिजिटल टूल्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है।

5. औद्योगिक नेतृत्व एवं वैचारिक स्पष्टता: श्री एच.सी. हटवाल एवं श्री जोशी

श्री एच.सी. हटवाल (पूर्व GM, DIC नरेंद्र नगर):
आपके साथ हुई संक्षिप्त मुलाकात ने औद्योगिक इकोसिस्टम की जटिलताओं को बेहद स्पष्टता से समझने का अवसर दिया। आपके मार्गदर्शन ने यह दृष्टिकोण दिया कि किस प्रकार एक छोटा क्लस्टर भी बड़े बाजार का हिस्सा बन सकता है।

श्री जोशी (DIC पौड़ी):
आपका सहयोग इस पूरी यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। आपने प्रोजेक्ट को परिष्कृत (Refine) करने और औद्योगिक प्रक्रियाओं की बारीकियों को समझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ग्रोथ सेंटर के लिए महत्व:
इन दोनों अधिकारियों के साथ संवाद ने यह स्पष्ट किया कि स्थानीय उद्यमिता को प्रशासनिक संरचना के साथ जोड़कर कैसे सफल बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष:

यह 12 वर्षों की यात्रा उन अमूल्य पलों की ऋणी है, जब इन अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने सीमित समय में भी स्पष्ट दिशा और सशक्त मार्गदर्शन प्रदान किया।

इन सभी व्यक्तित्वों के साथ हमारी मुलाकातें भले ही संक्षिप्त रहीं, लेकिन उनका प्रभाव अत्यंत गहरा और दीर्घकालिक रहा।

हमें आशा है कि वर्तमान महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र टिहरी, श्रीमती शेली डबराल एवं उनकी टीम भी जनपद में औद्योगिक विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का पूरा प्रयास करेगी। साथ ही, टिहरी प्रशासन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी इस पहल में सहयोग प्रदान करेंगे।

यदि यह समन्वय और सहयोग इसी प्रकार बना रहा, तो निकट भविष्य में टिहरी गढ़वाल के व्यवसायिक वातावरण में एक सकारात्मक और व्यापक परिवर्तन अवश्य देखने को मिलेगा।

 

उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर: प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और व्यवसाय का नया इकोसिस्टम

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Uttarakhand Growth Center: A New Ecosystem for Employment, Skill Development, and Entrepreneurship for the Youth of the State

उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर: प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और व्यवसाय का नया इकोसिस्टम

प्रकाशन तिथि: 14 अप्रैल (बैसाखी विशेष) स्थान: ग्राम सभा नचोली, तहसील गजा, चंबा, टिहरी गढ़वाल

कॉलेज के दिनों में देखे गए एक स्वप्न और 12 वर्षों के गहन जमीनी शोध के बाद, इस 14 अप्रैल, बैसाखी के पावन अवसर पर ‘उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर’ (Uttarakhand Growth Center) का विधिवत शुभारंभ किया जा रहा है।

हमारा प्राथमिक लक्ष्य पहाड़ के युवाओं को उनके ही गांवों में रहकर विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। यह मात्र एक संस्था नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के विकास को गति देने वाला एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Complete Ecosystem) है।

हम उत्तराखंड के लिए कैसे उपयोगी हैं? (हमारे 5 प्रमुख कार्यक्रम)

उत्तराखंड के युवाओं और व्यापारियों को सीधे तौर पर सशक्त बनाने के लिए, हम 5 डिजिटल पोर्टल्स का एक नेटवर्क स्थापित कर रहे हैं। वर्तमान में इनमें से कुछ ट्रायल चरण में हैं, कुछ लॉन्च हो रहे हैं और मार्च 2027 तक यह पूरा इकोसिस्टम लाइव हो जाएगा:

  1. ई-कॉमर्स कोच (Ecommerce Coach): कौशल विकास की नई दिशा इस पोर्टल के माध्यम से हम उत्तराखंड के युवाओं को डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स (Amazon, Flipkart, Meesho आदि पर व्यापार) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का आधुनिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। संपूर्ण पाठ्यक्रम का पारदर्शी विवरण यहाँ उपलब्ध होगा। 
  2. ई-कॉमर्स एसपीएन (Ecommercespn.co.in): रोजगार और आत्मनिर्भरता प्रशिक्षण के बाद सबसे बड़ी चुनौती काम मिलने की होती है। यह पोर्टल हमारे प्रशिक्षित युवाओं को सीधे ऑनलाइन प्रोजेक्ट्स और जॉब्स (Remote Work) से जोड़ेगा। इसका लक्ष्य है कि युवा अपने गांव, अपनी पंचायत को छोड़े बिना आर्थिक रूप से पूर्णतः स्वतंत्र बन सकें।  
  3. छानी (Chhani): ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का मूल आधार पर्यटन है। ‘छानी’ विशेष रूप से ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे (Homestay) को प्रमोट करने के लिए समर्पित प्लेटफॉर्म है, जो पलायन रोककर स्थानीय ग्रामीणों की आय सुनिश्चित करेगा।  
  4. बी2बी मार्केट फाइंडर (B2BMarketFinder.com): स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार यह उत्तराखंड के निर्माताओं (Manufacturers) और शिल्पकारों के लिए एक B2B मार्केटप्लेस है। इसके माध्यम से राज्य के उत्पादक अपने उत्पादों को न केवल पूरे भारत में, बल्कि वैश्विक बाजार (Global Market) में भी आसानी से बेच सकेंगे।
  5. उत्तरांचल टाइम्स डॉट कॉम (UttaranchalTimes.com): जागरूकता और नीति विश्लेषण यह पोर्टल कौशल और व्यवसाय विकास पर केंद्रित प्रत्येक सरकारी नीति की गहराई से जानकारी देगा। साथ ही, उत्तराखंड के प्रबुद्ध जनों के माध्यम से उन नीतियों का तथ्यात्मक विश्लेषण जनता तक पहुंचाएगा।  

स्थानीय स्तर पर इस पहल की आवश्यकता क्यों पड़ी? (एक विश्लेषण)

‘विकसित भारत 2030’ और ‘विकसित उत्तराखंड 2030’ का स्वप्न तब तक साकार नहीं हो सकता, जब तक स्थानीय स्तर पर जवाबदेह प्रयास न किए जाएं। यदि हम शीर्ष स्तर की योजनाओं का आकलन करें, तो जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है:

  • कौशल विकास योजनाओं की स्थिति: वर्ष 2015 से 2026 तक चले PMKVY (1.0 से 4.0) जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का धरातल पर वह प्रभाव नहीं दिखा, जिसकी अपेक्षा थी।
  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का क्रियान्वयन: 2020 से लागू इस नीति के तहत दून विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के 100 से अधिक डिग्री कॉलेजों को भारी फंड आवंटित किया गया, लेकिन शिक्षा प्रणाली में कोई दृष्टिगोचर या क्रांतिकारी बदलाव अब तक नहीं देखा गया है।
  • राज्य स्तरीय नीतियां: ‘मुख्यमंत्री उद्यमिता योजना’ जैसी योजनाएं जिन्हें 5 वर्षों के लिए स्वीकृत किया गया था, उनका वास्तविक लाभ आम जनमानस तक किस रूप में पहुंचा, यह अभी भी अस्पष्ट है।

ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि नीतियां तब तक विफल हैं, जब तक उन्हें पंचायत और गांव के स्तर पर सही ढंग से लागू करने वाला तंत्र न हो। ‘उत्तराखंड ग्रोथ सेंटर’ इसी खाई को पाटने का एक समाधान है।

निष्कर्ष: मातृभूमि के प्रति एक संकल्प

हम जानते हैं कि व्यवस्थागत चुनौतियां बड़ी हैं और यह हमारा एक छोटा सा प्रयास है। लेकिन हमारा दृढ़ विश्वास है कि यदि हमारे ये सम्मिलित प्रयास इस राज्य की प्रगति और युवाओं के भविष्य निर्माण में मात्र 0.1% का भी सकारात्मक योगदान दे सके, तो हम स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानेंगे। यह प्रयास हमारी मातृभूमि, हमारी देवभूमि उत्तराखंड की सेवा के प्रति हमारी अटल प्रतिबद्धता है।

 

 

AI-First SEO: The New Playbook for Winning Visibility Beyond Your Website

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From Ranking to Referencing: How to Master SEO in the Age of AI
From Ranking to Referencing: How to Master SEO in the Age of AI

The game has changed. If your entire SEO strategy is still focused on climbing to the top of a traditional search results page, you’re already falling behind. The rise of AI answer engines like ChatGPT, Perplexity, and Google’s AI Overviews has fundamentally altered how users find information. Clicks are becoming rare; direct answers are the new standard.

In this new landscape, visibility isn’t about ranking—it’s about being referenced. Your brand’s success now depends on appearing in the trusted, authoritative sources that Large Language Models (LLMs) use to generate their answers. This requires a radical shift in thinking: SEO is no longer a siloed technical task. It must become a collaborative, company-wide strategy.

This guide will walk you through why this shift is critical and how to adapt your business to win in the age of AI-driven discovery.

From Ranking to Referencing: The Core Shift in Modern SEO

Traditionally, the goal was simple: rank in Position 1. Now, when a user asks an AI for a recommendation, the answer is instant and synthesized from dozens of sources across the web. Your website might not even be mentioned by name, even if your brand is part of the answer.

The new key performance indicator (KPI) is brand presence within the AI’s response.

This reality demands a complete strategic rethink. The job of an SEO professional is no longer just about optimizing owned web pages. It’s about shaping how your brand is discussed across the entire digital ecosystem. This is not a job for one person or one team; it’s a shared responsibility that requires deep collaboration with content, PR, product marketing, and engineering.

The AI Ecosystem: Where Answer Engines Find Their Information

To influence AI-generated answers, you first need to understand where they look for information. While the exact algorithms are a “black box,” consistent patterns have emerged, showing that LLMs prioritize a diverse set of authoritative, community-driven, and expert-led platforms.

Here are the key battlegrounds where your brand needs to be visible:

1. Community Hubs: Reddit and Quora

User-generated content is a goldmine for AI. Platforms like Reddit and Quora offer authentic conversations and expert insights that AI models favor.

  • Strategy: Engage authentically in relevant subreddits and forums. Answer questions, participate in discussions, and build a presence under a verified profile. This is about contribution, not just promotion.

2. The Authority Pillar: Wikipedia

With its rigorous editorial standards, Wikipedia is one of the most trusted sources for LLMs.

  • Strategy: Ensure any mentions of your brand or industry are accurate, neutral, and meticulously cited. If you qualify for a dedicated page, follow all guidelines to the letter.

3. The Video Giant: YouTube

YouTube is a massive search engine in its own right, and its content is increasingly being pulled directly into AI answers.

  • Strategy: Optimize your videos with clear titles, descriptive metadata, and full transcripts. This makes your content easy for AI to parse, understand, and reference.

4. The Professional Network: LinkedIn

For business-related queries, thought leadership, and expert opinions, LinkedIn has become a go-to source for AI.

  • Strategy: Integrate LinkedIn into your content strategy. Encourage company leaders and brand ambassadors to post original, insightful content using clear, direct language.

5. The Buyer’s Guide: Review Platforms and Marketplaces

For commercial queries (“best tool for X”), AI relies heavily on sites like G2, Capterra, and Trustpilot.

  • Strategy: Claim and meticulously optimize your profiles on all relevant review sites and marketplaces. Encourage satisfied customers to leave detailed reviews.

6. Trusted Publications: External Media and Listicles

Being mentioned in “best of” roundups, industry reports, and articles from authoritative publications is a powerful trust signal for AI.

  • Strategy: Make digital PR a core component of your SEO efforts. Proactively seek coverage and mentions on websites that are already trusted authorities in your niche.

A Shared Responsibility: How SEO Must Partner Across the Business

Winning AI visibility is a team sport. The SEO team must evolve from executors into strategic consultants who empower other departments to create discoverable assets.

Here’s what that partnership looks like in practice:

With the Content Team

  • SEO’s Role: Identify topics, questions, and formats (e.g., FAQs, listicles, expert roundups) that are frequently cited by AI. Provide feedback on structure and metadata to make content AI-friendly.

  • Ideal Outcome: Content that not only ranks in traditional search but also gets directly referenced in AI answers.

With Product Marketing

  • SEO’s Role: Provide search data and AI insights to inform product naming, messaging, and positioning. Identify high-intent keywords for inclusion in marketplace profiles and category descriptions.

  • Ideal Outcome: Products and services that consistently appear in AI-powered recommendations.

With PR and Communications

  • SEO’s Role: Suggest story angles that align with high-volume search queries. Identify and target high-authority publications that LLMs already trust.

  • Ideal Outcome: PR wins that generate brand awareness and build a foundation of AI-discoverable coverage. Learn why PR is crucial for AI visibility.

With Research and Data Teams

  • SEO’s Role: Advise on how to package research findings—with quotable stats, clear headlines, and concise summaries—for maximum pickup by journalists, bloggers, and AI.

  • Ideal Outcome: Original data and research that become go-to citations across the industry.

With Customer and Support Teams

  • SEO’s Role: Help identify high-impact customer testimonials and guide efforts to amplify them on third-party review platforms that AI prioritizes. Monitor community discussions on sites like Reddit.

  • Ideal Outcome: Authentic social proof that AI can pull into relevant, high-trust answers.

The Cost of Inaction: The Quiet Threat of Invisibility

Falling behind in the AI era doesn’t look like a sudden failure; it looks like slowly diminishing potential. You might still rank well on Google, but your competitor is the one being cited in AI summaries. You might launch an incredible product, but if its name doesn’t align with search behavior, it will remain invisible in AI recommendations.

The biggest risk today is not being part of the answer when the answer is generated instantly.

How to Evolve: Start Small, Shift Smart

Transforming your entire strategy overnight isn’t necessary. The key is to start evolving now.

  1. Start Small: Choose two or three platforms from the list above where your audience is most active. Test simple, focused actions, like improving your YouTube transcripts or participating in one relevant Reddit thread per week.

  2. Shift Smart: Begin integrating your SEO team into conversations earlier. Invite them to campaign planning meetings, product launches, and content brainstorming sessions. Empower them to act as consultants who influence visibility wherever it can be won.

Traditional on-page SEO still has its place, but it’s now just one piece of a much larger puzzle. The future of discoverability is about being a trusted voice across the entire digital ecosystem. Start building that presence today.

Sourse: Maria Georgieva

धामी सरकार का ‘डबल स्ट्राइक’: उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर अब उम्रकैद और 10 लाख जुर्माना।

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देवभूमि में 'धर्म परिवर्तन' का खेल खत्म! धामी कैबिनेट ने देश के सबसे सख्त कानून पर लगाई मुहर।
देवभूमि में 'धर्म परिवर्तन' का खेल खत्म! धामी कैबिनेट ने देश के सबसे सख्त कानून पर लगाई मुहर।

इस ऐतिहासिक कानून में न केवल आजीवन कारावास और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है, बल्कि संपत्ति जब्त करने, विदेशी फंडिंग पर रोक लगाने और पहचान छिपाकर धोखा देने वालों पर भी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम” में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई, जिससे अब जबरन धर्मांतरण कराने वालों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का रास्ता साफ हो गया है। इस नए कानून के तहत दोषियों को आजीवन कारावास की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिसमें धर्मांतरण कानून को सख्त बनाना सबसे प्रमुख था। इस विधेयक को गैरसैंण में होने वाले आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।

नए कानून के मुख्य और कठोर प्रावधान:

  • बढ़ाई गई सजा और जुर्माना: सामान्य मामलों में अब सजा 3 से 10 साल और जुर्माना दोगुना कर दिया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति-जनजाति के धर्मांतरण पर 5 से 14 साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना होगा।

  • सामूहिक धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार: यदि कोई सामूहिक रूप से धर्मांतरण कराता है तो उसे 7 से 14 साल की कठोर सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा।

  • आजीवन कारावास का प्रावधान: अगर धर्मांतरण के लिए किसी को डराया-धमकाया जाता है, उस पर हमला किया जाता है, शादी का झांसा दिया जाता है या तस्करी और दुष्कर्म जैसे अपराध किए जाते हैं, तो ऐसे गंभीर मामलों में सजा को 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक किया जा सकेगा।

  • विदेशी फंडिंग पर शिकंजा: पहली बार यह प्रावधान जोड़ा गया है कि यदि जबरन धर्मांतरण के लिए किसी विदेशी या गैर-कानूनी संस्था से पैसा लिया जाता है, तो दोषी को 7 से 14 साल की सजा और 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

  • आरोपी की संपत्ति होगी कुर्क: नए कानून में गैंगस्टर एक्ट की तरह ही धर्मांतरण के आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार जिलाधिकारी (DM) को दिया गया है।

  • ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर: यदि धर्मांतरण के लिए इंटरनेट या सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल किया जाता है तो आरोपी पर आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

  • कोई भी दर्ज करा सकेगा शिकायत: पहले सिर्फ पीड़ित या उसके खून के रिश्तेदार ही शिकायत दर्ज करा सकते थे, लेकिन अब कोई भी नागरिक ऐसे मामलों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा सकेगा।

  • धोखे और छद्म वेश पर कार्रवाई: “ऑपरेशन कालनेमि” से प्रेरित होकर कानून में यह भी जोड़ा गया है कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक वेशभूषा, पद या जाति का छद्म रूप धारण कर जनता को गुमराह करता है तो उस पर भी इस अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।

अब उत्तराखंड में स्टार्टअप शुरू करना हुआ आसान, नई पॉलिसी में 1000 उद्यमों को मिलेगा 200 करोड़ का सहारा

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उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति, 2023: मुख्य बिन्दु

यह नीति 17 मार्च, 2023 को अधिसूचित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उद्यमियों और नवाचारों को वित्तीय और परिचालन सहायता प्रदान करके उत्तराखण्ड को एक अग्रणी स्टार्टअप गंतव्य बनाना है।

मुख्य उद्देश्य और दृष्टिकोण

प्राथमिक लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में उत्तराखण्ड में 1000 स्टार्टअप के विकास को प्रोत्साहित करना।

दृष्टिकोण: उत्तराखण्ड को इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करना, विशेष रूप से आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, पर्यटन, कृषि, वेलनेस और फार्मा जैसे क्षेत्रों में।

नीति की वैधता: यह नीति अपनी अधिसूचना की तारीख (17 मार्च, 2023) से 5 वर्षों के लिए वैध है।

पात्रता: कौन लाभ उठा सकता है?

इस नीति के तहत “स्टार्टअप” के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए, एक इकाई को निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना होगा:

उसका पंजीकृत कार्यालय (Registered Office) उत्तराखण्ड में हो।

वह 10 वर्ष से अधिक पुरानी न हो।

किसी भी वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर ₹100 करोड़ से अधिक न हुआ हो।

उत्तराखण्ड के बाहर पंजीकृत संस्थाओं के लिए: वे भी पात्र हो सकती हैं यदि उनका राज्य में एक महत्वपूर्ण परिचालन कार्यालय हो और, सबसे महत्वपूर्ण बात, वे अपने कुल कार्यबल (workforce) का कम से कम 70% उत्तराखण्ड के अधिवास (domicile) वाले लोगों को रोजगार दें।

स्टार्टअप के लिए प्रमुख वित्तीय प्रोत्साहन

यह नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सीधी वित्तीय सहायता प्रदान करता है:

1. मासिक भत्ता (Sustenance Allowance):

एक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के लिए ₹15,000 प्रति माह तक।

महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांगों के नेतृत्व वाले स्टार्टअप या ग्रामीण प्रभाव/विघटनकारी प्रौद्योगिकियों (disruptive technologies) पर काम कर रहे स्टार्टअप के लिए ₹20,000 प्रति माह तक।

यह एकमुश्त सहायता है जो आइडिया स्टेज पर अधिकतम 12 महीनों के लिए प्रदान की जाती है।

2. सीड फंड (Seed Fund – एकमुश्त अनुदान):

एक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को आइडिया, प्रोटोटाइप या MVP (न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद) चरण में ₹10 लाख तक की सहायता।

महिलाओं, SC/ST, दिव्यांगों के नेतृत्व वाले या ग्रामीण प्रभाव वाले स्टार्टअप के मामले में ₹12.5 लाख तक की सीड फंडिंग।

विघटनकारी प्रौद्योगिकियों पर काम करने वाले स्टार्टअप को ₹2.5 लाख की अतिरिक्त सीड फंडिंग प्रदान की जाएगी।

3. बौद्धिक संपदा (IPR) अधिकार सहायता:

पेटेंट फाइलिंग: भारतीय पेटेंट के लिए ₹1 लाख तक और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट के लिए ₹5 लाख तक की प्रतिपूर्ति (reimbursement)।

ट्रेडमार्क और डिजाइन फाइलिंग: प्रत्येक के लिए ₹10,000 तक की प्रतिपूर्ति।

4. इन्क्यूबेशन सहायता:

मान्यता प्राप्त स्टार्टअप किसी भी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर में 12 महीने के लिए मुफ्त इन्क्यूबेशन सहायता के पात्र होंगे, जिसकी लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी।

प्रमुख परिचालन और गैर-वित्तीय लाभ

ये लाभ परिचालन बाधाओं को कम करते हैं और बाजार के अवसर खोलते हैं:

सरकारी खरीद: सरकारी विभागों को मान्यता प्राप्त स्टार्टअप से ₹10 लाख तक (जीएसटी को छोड़कर) की सीधी खरीद करने की अनुमति है।

व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business): स्टार्टअप को 5 वर्षों के लिए स्व-प्रमाणन (self-certification) के आधार पर विभिन्न श्रम और अन्य अधिनियमों के तहत निरीक्षण से छूट दी जाएगी।

भूमि का प्रावधान: औद्योगिक क्षेत्रों, आईटी पार्कों और SEZ में बेस प्राइस पर भूमि/स्थान के आवंटन का प्रावधान।

इकोसिस्टम के लिए सहायता (इन्क्यूबेटर और कॉलेज)

नीति एक मजबूत समर्थन संरचना बनाने पर केंद्रित है:

इन्क्यूबेटर के लिए पूंजीगत अनुदान (Capital Grant): एक नया इन्क्यूबेटर स्थापित करने के लिए लागत का 50% (₹1 करोड़ तक) और मौजूदा का विस्तार करने के लिए ₹50 लाख तक।

इन्क्यूबेटर के लिए परिचालन अनुदान (Operational Grant): इन्क्यूबेशन सहायता प्रदान करने की लागत को कवर करने के लिए प्रति स्टार्टअप ₹1 लाख तक की प्रतिपूर्ति।

कॉलेजों में उद्यमिता प्रकोष्ठ (E-Cells): छात्रों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ई-सेल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों (जैसे बूट कैंप, बिजनेस प्लान प्रतियोगिता) के लिए प्रति कार्यक्रम ₹1 लाख तक की वित्तीय सहायता।

नीति के प्रमुख तंत्र और प्रतिबद्धताएँ

फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds): ₹200 करोड़ का एक विशाल कोष आवंटित किया जाएगा, जो वेंचर फंड में निवेश करेगा, और वे वेंचर फंड उत्तराखण्ड स्थित स्टार्टअप में निवेश करेंगे।

महिला उद्यमियों पर विशेष ध्यान: सरकार समर्थित इन्क्यूबेटरों में कम से कम 15% सीटें महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए आवंटित की जाएंगी।

जिला नवाचार समिति: प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थापित की जाएगी ताकि जमीनी स्तर पर नीति को लागू किया जा सके और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।

Team uttaranchaltimes.com

कागज पर छात्र, खाते में करोड़ों: टिहरी PMKK में “सेवा” के नाम पर “मेवा” खाने वाले सेवा इंटरनेशनल के फ्रॉड का खुलासा।

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  1. पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK) योजना

 

प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK) भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (Skill India Mission) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के हर जिले में अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र स्थापित करना है।इन केंद्रों को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

मुख्य उद्देश्य:

युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।

प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।

स्थानीय स्तर पर कौशल की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटना।

 

  1. टिहरी PMKK सेवा इंटरनेशनल को फंडिंग (वित्तपोषण)

 

किसी भी PMKK केंद्र को फंडिंग NSDC द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार दी जाती है। यह फंडिंग आमतौर पर एक परियोजना-आधारित मॉडल पर होती है, जिसमें शामिल हैं:

कैपेक्स (पूंजीगत व्यय): केंद्र स्थापित करने, मशीनरी, उपकरण और बुनियादी ढाँचे के लिए NSDC द्वारा सुरक्षित ऋण (secured loan) के रूप में लगभग ₹70 लाख तक की सहायता दी जाती है।

 

ऑपेक्स (परिचालन व्यय): प्रशिक्षण की लागत NSDC द्वारा कॉमन नॉर्म्स (Common Norms) के तहत प्रति छात्र, प्रति घंटे के आधार पर दी जाती है। यह धनराशि सीधे प्रशिक्षण भागीदार (Training Partner), इस मामले में सेवा इंटरनेशनल, को हस्तांतरित की जाती है।

फंडिंग का disbursement किश्तों में होता है और यह प्रशिक्षण के परिणामों से जुड़ा होता है:

 

पहली किश्त: प्रशिक्षण बैच शुरू होने पर।

दूसरी किश्त: प्रशिक्षण के बीच में या मूल्यांकन के बाद।

अंतिम किश्त: छात्रों के सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने और निर्धारित समय (आमतौर पर 90 दिनों) के भीतर नौकरी पाने (Placement) के बाद।

 

कथित भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत अक्सर फर्जी नामांकन और प्लेसमेंट दिखाकर अंतिम किश्त का दावा करना होता है।

घोटाले की नींव: 70 लाख का अनुदान और एक अदृश्य कौशल केंद्र

 

हमारी जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सेवा इंटरनेशनल को टिहरी गढ़वाल में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK) स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से 70 लाख रुपये का अनुदान मिला था। यह अनुदान एक आधुनिक, सुसज्जित केंद्र बनाने के लिए था, जहाँ स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा सके। लेकिन इस अनुदान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

आंकड़ों की परतें: कैसे हर चरण में हुआ खेल?

PMKVY के हर चरण में सेवा इंटरनेशनल के आंकड़े एक ही कहानी कहते हैं—धोखाधड़ी और हेरफेर की।

1. PMKVY 2.0 (2016-2020): बड़े आंकड़ों का मायाजाल

इस चरण का लक्ष्य बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण देना था, और सेवा इंटरनेशनल ने इसी का फायदा उठाया।

  • लागत: ₹28 – ₹45 प्रति घंटा/प्रति छात्र
  • टिहरी में खेल: पोर्टल पर 4,041 छात्रों को प्रशिक्षित दिखाया गया। इतने बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण के लिए न कोई प्रचार हुआ, न ही स्थानीय स्तर पर कोई जानकारी दी गई।

 

2. PMKVY 3.0 (2020-2021): भौगोलिक धोखाधड़ी का खुला खेल

इस चरण में स्थानीय जरूरतों पर जोर दिया गया, लेकिन सेवा इंटरनेशनल ने इस नियम को ताक पर रख दिया।

  • लागत: ₹30 – ₹50 प्रति घंटा/प्रति छात्र
  • टिहरी में खेल: 329 छात्रों को प्रशिक्षित दिखाया गया,

  • 3. PMKVY 4.0 (2022-2026): “भूतिया छात्रों” के नाम पर करोड़ों का भुगतान

इस आधुनिक और पारदर्शी कहे जाने वाले चरण में भी घोटाला जारी रहा।

  • लागत: ₹35 – ₹60+ प्रति घंटा/प्रति छात्र
  • टिहरी में खेल: 830 छात्रों को प्रशिक्षित दिखाया गया और इसके लिए भुगतान भी कर दिया गया। ये छात्र कौन हैं और कहाँ से आए, इसका कोई जवाब नहीं है।

घोटाले का कुल हिसाब: 5600 से ज्यादा छात्र और 3-5 करोड़ से अधिक की चपत

यदि तीनों चरणों के आंकड़ों को एक साथ देखा जाए, तो तस्वीर और भी भयावह हो जाती है।

चरण कुल नामांकित छात्र प्रशिक्षित छात्र कुल बैच (अनुमानित/प्रमाणित)
PMKVY 2.0 4,301 4,041 ~135 (अनुमानित)
PMKVY 3.0 341 329 ~11 (अनुमानित)
PMKVY 4.0 1,010 830 37 (प्रमाणित)
कुल योग 5,652 5,200 ~183 (कुल)

यह मामला केवल पारदर्शिता की कमी का नहीं, बल्कि एक बहु-करोड़ रुपये के संगठित घोटाले का है, जिसमें शामिल हैं:

  1. PMKK केंद्र के लिए ₹70 लाख का अनुदान।
  2. PMKVY 4.0 के तहत सीधा भुगतान।
  3. PMKVY 2.0 और 3.0 के तहत 4,370 छात्रों के प्रशिक्षण के नाम पर अनुमानित करोड़ रुपये से अधिक की राशि।

कुल मिलाकर, यह 3-5 करोड़ रुपये से भी अधिक का घोटाला प्रतीत होता है, जो उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य के साथ एक क्रूर धोखा है।

सेवा इंटरनेशनल द्वारा  5,200  छात्रों को प्रशिक्षण देने का दावा किया गया, लेकिन पब्लिक डोमेन (जैसे वेबसाइट, सोशल मीडिया, मीडिया कवरेज आदि) में इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता। न तो लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक है, न ही प्रशिक्षण से जुड़ी कोई पारदर्शी जानकारी उपलब्ध है।

यह सब स्पष्ट करता है कि यह एक फर्जी NGO है, जिसने दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। ऐसी संस्था के खिलाफ राज्य सरकार को तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।

28 जून 2023 को शाम 7:07 बजे सेवा इंटरनेशनल को PMKK और PMKVY योजनाओं पर स्पष्टीकरण हेतु मेल भेजी गई। 

संस्था ने जवाब देने के बजाय जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद 18 जून 2024 को वही मेल डीएम को भेजी गई, लेकिन वहाँ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

सेवा इंटरनेशनल और जिलाधिकारी टिहरी को पत्र भेजे जाने के बावजूद न तो संस्था ने जवाब दिया और न ही प्रशासन ने कोई संज्ञान लिया। इसके विपरीत, सेवा इंटरनेशनल ने PMKVY 4.0 योजना में भ्रष्टाचार जारी रखा। यह जवाबदेही की पूरी तरह अनदेखी, प्रशासनिक निष्क्रियता और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

यदि सेवा इंटरनेशनल ने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है, तो निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट, तथ्यों सहित जवाब देना चाहिए:

यदि सेवा इंटरनेशनल ने योजनाएं ईमानदारी से चलाई हैं, तो उसकी जानकारी वेबसाइट, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर क्यों नहीं है? संस्था इन प्लेटफॉर्म्स के लिंक, स्क्रीनशॉट और पोस्टिंग की तारीखों सहित प्रचार सामग्री प्रस्तुत करे।

सेवा इंटरनेशनल सभी लाभार्थियों की सूची, प्रशिक्षण केंद्र, जॉब रोल, बैच ID, अवधि और प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में प्रस्तुत करे, ताकि प्रशिक्षण की पुष्टि हो सके।

प्रचार और जागरूकता: घर-घर प्रचार या जागरूकता अभियान के क्या प्रमाण हैं? पंपलेट, फोटो, वीडियो, मीडिया कवरेज दें।

स्थानीय भागीदारी: किन महिला समूहों, स्थानीय NGOs या पंचायतों के साथ मिलकर काम किया गया? उनके नाम व संपर्क दें।

स्टाफ विवरण: ट्रेनर, काउंसलर, और अन्य स्टाफ की सूची और तैनाती अवधि दें।

सेवा इंटरनेशनल द्वारा PMKVY 2.0, 3.0 और 4.0 के तहत चलाए गए हर कोर्स का सिलेबस स्पष्ट रूप से साझा किया जाए, जिसमें कोर्स का नाम (जैसे GDA, Data Entry Operator), 

NSQF लेवल, कुल प्रशिक्षण घंटे, प्रमुख मॉड्यूल (जैसे कम्युनिकेशन स्किल्स, डिजिटल लिटरेसी, टेक्निकल स्किल्स, सेफ्टी आदि), प्रशिक्षण सामग्री का स्रोत (NCVT/NSDC) और थ्योरी-प्रैक्टिकल का अनुपात शामिल हो।

माननीय मुख्यमंत्री जी से अपील: टिहरी PMKK घोटाले में प्रशासन की चुप्पी तुड़वाएं और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।

टिहरी प्रशासन को निम्नलिखित तत्काल और कठोर कदम उठाने चाहिए:

  1. FIR दर्ज करना: इन दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी, सरकारी धन के गबन और जालसाजी के लिए सेवा इंटरनेशनल और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जानी चाहिए।
  2. रिकॉर्ड्स की जब्ती: केंद्र के सभी भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स (नामांकन फॉर्म, उपस्थिति रजिस्टर, बैंक स्टेटमेंट, व्यय वाउचर) को तुरंत जब्त किया जाना चाहिए ताकि सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके।
  3. छात्रों का भौतिक सत्यापन: रिपोर्ट में दिखाए गए  5,200 छात्रों की सूची प्राप्त कर, रैंडम आधार पर छात्रों से संपर्क करके यह सत्यापित किया जाए कि उन्होंने वास्तव में प्रशिक्षण लिया है या नहीं।
  4. वित्तीय ऑडिट: एक स्वतंत्र एजेंसी से फंड का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए ताकि यह पता चल सके कि पैसा कहाँ और कैसे खर्च किया गया।

ब्लैकलिस्टिंग: यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवा इंटरनेशनल को भविष्य में किसी भी सरकारी परियोजना के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए और उनसे पूरी राशि ब्याज सहित वसूल की जानी चाहिए।

 

Reference :

1- 28 Jun, 2023 -सेवा इंटरनेशनल को ईमेल और उनकी निराशाजनक प्रतिक्रिया

mail to seva international

2-Jun 18, 2024-डीएम टिहरी और रोजगार अधिकारी को भी ईमेल, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं।

Mail to DM Tehri-Mayur Dikshit

3- PMKK Guide Lines

PMKK-Guidelines-December-2017

सचिव श्रीमती राधिका झा और उत्तराखंड ज्ञान विकास समिति के मुख्य परियोजना निदेशक द्वारा House of Himalayas पर चर्चा तो ठीक है… लेकिन Hillans का क्या हुआ?

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13 मई 2025 को मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में House of Himalayas के निदेशक मंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि House of Himalayas को एक बड़े ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा और इसके उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानक निर्धारित किए जाएंगे।

सचिव श्रीमती राधिका झा ने इस बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए उच्च प्रीमियम देना है, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को लाभप्रद बनाया जा सके। निश्चित ही यह एक सराहनीय पहल है।

लेकिन एक सवाल अब भी अनुत्तरित है –
क्या कोई पूछेगा कि Hillans का क्या हुआ?
वह ब्रांड जिसे कुछ वर्ष पहले Uttarakhand Gyan Vikas Samiti (UGVS) के नेतृत्व में बड़े उत्साह और विश्वास के साथ शुरू किया गया था।

Hillans भी तो महिला स्व-सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों, और स्थायी आजीविका के समर्थन का प्रतीक था।
इसके अंतर्गत पारंपरिक हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और प्राकृतिक संसाधनों को ब्रांड बनाकर बाज़ार में पहुंचाने का संकल्प लिया गया था।

18 अक्टूबर 2022 को स्वास्थ्य, शिक्षा व सहकारिता मंत्री श्री धन सिंह रावत, ग्रामीण विकास सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरूषोत्तम (IAS) व मुख्यमंत्री सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम (IAS) ने विरासत मेले, देहरादून में Hilans स्टॉल का दौरा किया। उन्होंने उत्पादों की सराहना की और कार्य की प्रशंसा की।

22 अप्रैल 2023 को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने REAP परियोजना निदेशक रितिका खंडेलवाल के साथ स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने Hilans के माध्यम से पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की।

 

june 2,2023,पद्मश्री सोनू निगम (@sonunigamofficial) – Hilans मुहिम को सहयोग दिया। Hilans, उत्तराखंड सरकार व IFAD की पहल है, जो किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ती है और हिमालयी किसानों की भावना का प्रतीक है।

4 अगस्त 2023 को देहरादून में UGVS-REAP द्वारा Hilans के वैल्यू चेन स्ट्रेटेजी पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान श्री रोनाल्ड JMD (#WOMENONWINGS) और शिल्पा मित्तल ने इंटरैक्टिव सत्र लिया।
@REAPUttarakhand @hilansofficial @nitikakh22 @cdo_pauri

 

17 सितंबर 2023 को Hilans को उत्तराखंड सरकार द्वारा “सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप पहल” के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज (@satpalmaharajofficial) द्वारा प्रदान किया गया।

Hilans on Amazon

 

 

हम माननीय सचिव श्रीमती राधिका झा और उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति के मुख्य परियोजना निदेशक से जानना चाहते हैं—
“ऐसी कौन-सी मुख्य वजहें थीं कि सरकार, मीडिया और जनसामान्य से मिले व्यापक समर्थन के बावजूद Hilans को बंद करना पड़ा?”

Hilans: एक सफल ब्रांड की चुपचाप समाप्ति — सवाल अब भी अनुत्तरित हैं

उत्तराखंड सरकार एवं IFAD (ILSP एवं REAP परियोजनाओं) की एक महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में Hilans ब्रांड की शुरुआत हुई थी, जिसका उद्देश्य पर्वतीय किसानों द्वारा उत्पादित शुद्ध और प्राकृतिक वस्तुओं को बाज़ार तक पहुँचाना था। यह ब्रांड न केवल अपनी गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और विश्वस्तरीय ब्रांडिंग के लिए जाना गया, बल्कि इसे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई मंचों पर सराहना भी मिली।

17 सितंबर 2023 को राज्य सरकार द्वारा इसे “सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप पहल” के सम्मान से नवाजा गया।
इससे पहले,

18 अक्टूबर 2022 को देहरादून के विरासत मेले में मंत्रीगणों ने Hilans स्टॉल का दौरा कर इसके कार्य की प्रशंसा की,

2 जून 2023 को प्रसिद्ध गायक पद्मश्री सोनू निगम ने इस पहल को सार्वजनिक समर्थन दिया,

और 4 अगस्त 2023 को देहरादून में Hilans की वैल्यू चेन स्ट्रैटेजी पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।

इन सब उपलब्धियों के बावजूद, फरवरी 2024 में Hilans को अचानक बंद कर दिया गया, और अब इसकी वेबसाइट (www.hilans.org) भी निष्क्रिय हो चुकी है। यह सब न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि इससे कई अहम सवाल भी खड़े होते हैं।

हम माननीय सचिव श्रीमती राधिका झा और उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति के मुख्य परियोजना निदेशक से जानना चाहते हैं—
“ऐसी कौन-सी मुख्य वजहें थीं कि सरकार, मीडिया और जनसामान्य से मिले व्यापक समर्थन के बावजूद Hilans को बंद करना पड़ा?”

इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित बिंदुओं पर भी पारदर्शी जानकारी आवश्यक है:

Hilans ब्रांड की स्थापना कब हुई थी?

इसे बंद करने का निर्णय किसके सुझाव पर और किन कारणों से लिया गया?

क्या Hilans को वैधानिक रूप से ट्रेडमार्क (TM) के रूप में पंजीकृत किया गया था?

कुल कितने स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) इससे जुड़े हुए थे?

IFAD–ILSP परियोजना के अंतर्गत Hilans के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत की गई थी?

IFAD–REAP परियोजना से Hilans के लिए कितनी धनराशि व्यय की गई?

कुल मिलाकर Hilans ब्रांड पर अब तक कितना व्यय हुआ?

पिछले तीन वर्षों में इस ब्रांड से कितना लाभ अर्जित हुआ?

इस परियोजना में कितने कर्मचारी कार्यरत थे?

Hilans के कितने कार्यालय/आउटलेट्स कार्यरत थे?

UGVS की भूमिका क्या थी – क्या वह केवल फंडिंग एजेंसी थी, या निर्माण एवं विपणन में भी प्रत्यक्ष रूप से संलग्न थी?

हम आशा करते हैं कि इस विषय पर यथाशीघ्र स्पष्टता दी जाएगी, ताकि जनता और हितधारकों में बनी हुई उत्सुकता व संशय का समाधान हो सके और भविष्य की योजनाओं के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन प्राप्त हो।

 

 

चार घोषणाएं, कोई कार्रवाई नहीं? ज़मीन पर मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना है कहाँ?

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उत्तराखंड सरकार ने 16 मई 2025 को मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को धामी कैबिनेट में मंजूरी दे दी। यह घोषणा कई प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई, जिससे राज्य की हजारों बेसहारा महिलाओं के बीच एक उम्मीद जगी। योजना के अनुसार अविवाहित, तलाकशुदा, परित्यक्ता, निराश्रित और विकलांग एकल महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिसमें 75% राशि सब्सिडी के रूप में होगी।

योजना के ऐलान का इतिहास
इस योजना की घोषणा पहली बार नहीं हुई है। यह चौथी बार है जब मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना की बात उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई है:

7 मार्च 2023: इस योजना की घोषणा कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य द्वारा की गई थी। इसकी जानकारी दृष्टि IAS अकादमी की वेबसाइट पर भी प्रकाशित है (प्रमाण स्क्रीनशॉट संलग्न)।

2 जुलाई 2024: योजना की घोषणा प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा की गई थी (प्रमाण स्क्रीनशॉट संलग्न)।

3 मार्च 2025: एक बार फिर रेखा आर्य द्वारा इसी योजना की घोषणा की गई (प्रमाण स्क्रीनशॉट संलग्न)।

16 मई 2025: धामी कैबिनेट द्वारा फिर से योजना को स्वीकृति दी गई (प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित, स्क्रीनशॉट संलग्न)।

पर सवाल यह उठता है कि…
चार बार इस योजना की घोषणा हो चुकी है, लेकिन आज तक जनता को यह पता नहीं है कि यह योजना क्या है और इसका लाभ कैसे मिलेगा। न तो कोई आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध है, न कोई गाइडलाइन, न पात्रता की स्पष्टता, न ही यह बताया गया है कि राज्य, ज़िला या ब्लॉक स्तर पर इस योजना के नोडल अधिकारी कौन हैं।

जनता के सवाल
योजना की यथार्थ स्थिति क्या है?

पात्र महिलाओं को इसका लाभ कैसे मिलेगा?

आवेदन कहां किया जाए?

नोडल अधिकारी कौन हैं? (राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर)

क्या किसी महिला को अब तक इस योजना का लाभ मिला है? अगर हां, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

यह कोई पहला मामला नहीं
यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड सरकार द्वारा किसी योजना की घोषणा की गई हो और वह सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई हो। अधिकांश सरकारी योजनाओं का यही हाल है — घोषणा ज़ोर-शोर से होती है लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो लाभार्थियों को जानकारी मिलती है और न ही मदद।

जनता की ओर से निवेदन
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य जी से निवेदन है कि कृपया इस योजना की पारदर्शिता बनाए रखें और जनता को सच बताएं:

इस योजना की वास्तविक स्थिति क्या है?

अब तक किन महिलाओं को इसका लाभ मिला?

योजना की गाइडलाइन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, नोडल अधिकारी और संपर्क सूत्रों की सार्वजनिक जानकारी कब और कैसे उपलब्ध कराई जाएगी?

निष्कर्ष
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना राज्य की हजारों एकल, बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं के लिए वरदान बन सकती है — अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए और पारदर्शिता के साथ आम जनता को जानकारी दी जाए। लेकिन बार-बार घोषणा करने और ज़मीनी कार्रवाई न होने से सिर्फ भ्रम फैलता है और सरकारी व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े होते हैं।

सरकार से आग्रह है कि इस विषय पर जल्द से जल्द स्पष्टीकरण दें और योजना की संपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करें। यह न केवल लोकतांत्रिक पारदर्शिता का हिस्सा है, बल्कि राज्य की महिलाओं का अधिकार भी।

स्वरोजगार योजनाएं बनीं, पारदर्शिता नहीं — जवाब दें सचिव विनय शंकर पांडेय जी

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विनय शंकर पांडेय, सचिव उद्योग,उत्तराखंड

 

उत्तराखंड में बेरोजगारी और पलायन वर्षों से एक गंभीर समस्या रही है। पहाड़ों से मैदानों की ओर हो रहा पलायन सिर्फ रोज़गार की कमी नहीं, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता की भारी कमी को भी उजागर करता है।

हाल ही में उद्योग विभाग के सचिव विनय शंकर पांडेय द्वारा मीडिया में दावे किए गए कि:

 

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“मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और नैनो योजना को मिलाकर एक नई नीति लाई जा रही है, जिससे अगले 5 वर्षों में 50,000 लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा।

“मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और नैनो योजना को मिलाकर एक नई नीति लाई जा रही है, जिससे अगले 5 वर्षों में 50,000 लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा।”

लेकिन सवाल यह उठता है: क्या अब तक की योजनाएं वाकई कामयाब रहीं?

क्या है मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY)?
शुरुआत: कोविड-19 महामारी के दौरान
लक्ष्य: युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना

इस योजना के तहत विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में 10 से 25 लाख रुपये तक ऋण दिया जाता है। इस ऋण पर सरकार द्वारा 15% से 25% तक सब्सिडी भी दी जाती है।

दावा: जनवरी 2025 तक, 31,715 लोगों को लाभ मिला और 95,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला।

क्या है मुख्यमंत्री स्वरोजगार अति सूक्ष्म योजना (नैनो योजना)?

लक्ष्य: छोटे व्यवसाय जैसे किराना, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, चाय की दुकान आदि

योजना के तहत ₹50,000 तक का ऋण और 25% से 35% तक सब्सिडी का प्रावधान था।

अब इस ऋण सीमा को ₹2 लाख तक बढ़ाया जा रहा है।

दावा: 4,658 लाभार्थियों को रोजगार मिला।

महत्वपूर्ण सवाल जिनका जवाब मिलना ज़रूरी है

जनसांख्यिक और भौगोलिक विवरण कहां है?

किस जिले के कितने लोग लाभार्थी बने? कौन-कौन से उद्योग स्थापित हुए? इस संबंध में कोई विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में क्यों नहीं है?

योजनाओं का प्रचार-प्रसार कैसे हुआ?अधिकांश युवाओं को इन योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं। क्या ये योजनाएं केवल कागजों पर रह गईं?

योजनाएं अलग-अलग सफल थीं तो फिर इन्हें मिलाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
यदि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और नैनो योजना सफल रहीं, तो फिर इन्हें समायोजित कर एक नई नीति लाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

नई स्वरोजगार नीति की विस्तृत जानकारी कब उपलब्ध होगी?
सिर्फ यह कहना कि “कैबिनेट में प्रस्ताव जाएगा” पर्याप्त नहीं है। प्रस्ताव की प्रतिलिपि, बजट, लक्षित सेक्टर, आवेदन की प्रक्रिया, निगरानी प्रणाली—इन सबकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

जनता की अपेक्षाएं – पारदर्शिता और जवाबदेही

उत्तराखंड सरकार और उद्योग विभाग से निम्नलिखित की मांग की जानी चाहिए:

नैनो योजना और MSY की वर्षवार, जिला-वार रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

लाभार्थियों की सूचियां (बिना निजी जानकारी के) जारी हों।

नई प्रस्तावित योजना का ड्राफ्ट दस्तावेज़ वेबसाइट पर साझा किया जाए।

योजना का ऑनलाइन आवेदन पोर्टल, निगरानी तंत्र और समय-सीमा स्पष्ट की जाए।

पलायन रोकना है, तो योजनाएं नहीं, क्रियान्वयन चाहिए

उत्तराखंड में रोज़गार के नाम पर योजनाएं बनती रही हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात नहीं बदले। नैनो योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के आंकड़ों पर जनता को भरोसा तभी होगा जब:

डेटा स्वतंत्र ऑडिट से गुजरे,

लाभार्थी स्वतंत्र प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा कर सकें,

और योजनाओं की लोक-निगरानी (public monitoring) की व्यवस्था हो।

निष्कर्ष
योजनाओं की घोषणा करना एक बात है, उन्हें ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू करना दूसरी। जब तक सरकार जनता को जानकारी देने से बचेगी, तब तक अविश्वास बना रहेगा।
शब्द नहीं, परिणाम चाहिए।

PM Vishwakarma Yojana

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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है, जिसे 17 सितंबर 2023 को पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

DM Tehri garhwal,Shri Mayur Dixit(IAS),

योजना का उद्देश्य:
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगरी से जुड़े कारीगरों को पहचान, कौशल उन्नयन, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और विपणन समर्थन प्रदान करना है, ताकि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ सकें।

पात्रता:
उम्र: न्यूनतम 18 वर्ष

व्यवसाय: पारंपरिक हस्तशिल्प या कारीगरी में संलग्न स्व-रोजगार व्यक्ति

ऋण इतिहास: पिछले 5 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की समान ऋण आधारित योजनाओं के तहत ऋण नहीं लिया हो (पूर्ण रूप से चुकाए गए MUDRA या SVANidhi ऋण को छोड़कर)

परिवार: एक परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे) से केवल एक सदस्य पात्र

सरकारी कर्मचारी: सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं हैं

लाभ:
पहचान: PM विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र

कौशल उन्नयन: 5-7 दिनों का मूल प्रशिक्षण और 15 दिनों या अधिक का उन्नत प्रशिक्षण, ₹500 प्रतिदिन की वजीफा के साथ

उपकरण प्रोत्साहन: ₹15,000 तक के ई-वाउचर के रूप में

ऋण सहायता: बिना जमानत के ₹3 लाख तक का ऋण दो किश्तों में (₹1 लाख और ₹2 लाख), 5% ब्याज दर पर

डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन: प्रति डिजिटल लेनदेन ₹1, अधिकतम 100 लेनदेन प्रति माह

विपणन समर्थन: गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्धता, और विपणन गतिविधियाँ

पंजीकरण प्रक्रिया:
पंजीकरण के लिए इच्छुक व्यक्ति pmvishwakarma.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण आवश्यक है, और यह प्रक्रिया कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से की जाती है।

अधिक जानकारी और आवेदन के लिए pmvishwakarma.gov.in पर जाएँ।

 

 

Shift from Volume to Value: The New Path to Sustainable Growth

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Traditional marketing has long focused on maximizing sales volume to drive revenue. But today, that approach is losing steam. With rising competition, cautious consumer behavior, and increasing acquisition costs, the smartest businesses are shifting their focus: from more customers to the right customers.

This is where Customer Lifetime Value (CLV) becomes a game-changer.

Though CLV has been around for decades, only a small percentage of marketers use it as a central metric. That’s changing fast—thanks to modern AI and data tools that make it easier to identify high-value customers and act on those insights.

Why CLV Matters More Than Ever

CLV looks beyond a customer’s first purchase and considers the value they bring over the long term. If the 80/20 rule applies to your business, it means just 20% of your customers may be driving 80% of your revenue. The question is: are you doing enough to find and retain them?

Instead of casting a wide net, businesses are now focusing on attracting and nurturing customers who are most likely to be profitable over time.


Build on First-Party Data

A CLV-driven strategy begins with understanding your existing high-value customers using your first-party data.

Rather than trying to turn every new buyer into a top spender, focus on identifying those who already show potential for high long-term value. Then, guide them with thoughtful engagement: encourage repeat purchases, prevent churn, and foster loyalty.


Three Steps to a CLV Strategy:

  1. Identify your most valuable customers
    Use data to find common patterns in your top-performing customer group—demographics, behaviors, purchase patterns. This creates the foundation for smarter acquisition strategies.

  2. Create a high-value audience list
    Segment and organize your best customers into a “VIP list” that can guide both new customer acquisition and retention strategies.

  3. Leverage AI and automation to scale
    Use value-based bidding and predictive tools to prioritize customers who resemble your most profitable ones. This ensures your budget is spent attracting and retaining the right people—not just anyone.


Retention Is the Real Growth Driver

Once you’ve attracted high-value customers, the next step is cultivating their loyalty. That doesn’t mean blanket upselling or aggressive cross-promotion. In fact, pushing irrelevant offers can reduce profitability.

Instead, use your data to understand what truly drives profitable behavior. Whether it’s app engagement, multi-channel interaction, or specific purchase patterns, focus on encouraging those habits—and avoid investing in customers who return products frequently or only buy during deep discounts.

Just a 2% increase in retention can deliver the same impact as cutting costs by 10%.


Prevent Churn and Win Back Value

Retaining loyal customers is key—but so is re-engaging those who’ve gone quiet. Use tailored win-back campaigns to reach lapsed customers who once showed strong potential. When designed strategically, these efforts can significantly boost your bottom line.

source- Google

Make something happen

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If I had to pick one piece of marketing advice to give you, that would be it.

Now.

Make something happen today, before you go home, before the end of the week.
Launch that idea, post that post, run that ad, call that customer. Go the edge,
that edge you’ve been holding back from… and do it today. Without waiting for the committee or your boss or the market. Just go.

Source

Seth Godin

 

Hobby mindset

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You might be fortunate enough to have a hobby.

Something you are focused on and passionate about. You might read the journals,
develop your skills, collect, connect with others in the field, and commit to getting better at it…

Time spent on a hobby feels like time well spent. Obstacles and setbacks aren’t a tragedy, they’re simply part of journey, the things that make it interesting.

It’s possible to bring that mindset to work. Not all the time, certainly, but often. And when we do, it turns out that work gets more productive and even more fun.

Source

Seth Godin

Secret to success is failure

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Secret to success is failure: Alibaba founder Jack Ma tells Vietnamese students

Secret to success is failure: Alibaba founder Jack Ma tells Vietnamese students

We have to learn why people fail. If you learn from mistakes, you’ll be stronger, more realistic.’

Chairman of Chinese e-commerce giant Alibaba Jack Ma spoke to 3,000 students in Hanoi on Monday afternoon with the aim of inspiring entrepreneurship among young people.

Having landed in Vietnam at the weekend, Ma said while walking on the street in the evening, he was “inspired because there are so many young people in this country.”

“They smile, they are energetic, they play all kinds of games,” he told the audience at the Vietnam National Convention Center. “I wonder why people in Vietnam are so happy. One reason, you’re young,” he said, responding to the questions posed to him in English.

Sharing his recipe for success, Ma said: “Lots of people today learn from success. To succeed, there’re lots of reasons. To fail, there’re just a few. We have to learn why people fail. We study failures and try to avoid them. You learn from mistakes, not because you can avoid them, but because you learn what you will be when you experience mistakes.”

“I heard there’re some books about me in Vietnam that are very popular. I don’t read them because in the future I want to write a book about myself, something like Alibaba’s 1001 Mistakes,” he said. “If you learn from mistakes, you’ll be stronger, more realistic. You see all the mistakes, the failures, and you still want to fight for the future.”

“It is not the success but the moment I failed that shaped me. This makes us even stronger.”

‘Never give up’

Asked about his record of being rejected, Ma said it might have been his destiny to build the Alibaba empire.

“When I was rejected, I felt sad. I couldn’t tell my parents. Then I thought God didn’t want me to join a company; he wanted me to build a company myself,” he said in response to a question from the moderator.

“There’s no option, no chance, that’s why today I spend a lot of time with young people and students and tell them that how I got through. Go back home, sleep, tomorrow, try again.

“There’s no choice. Let me tell you, 80 percent of people in this world have the same thing. If Jack Ma today wasn’t CEO of Alibaba, like nobody, nobody would read my story. Because we founded Alibaba, people see you’re good. [But] we’re the same.

“The only thing I do is never give up; most people give up. If you give up, no chance. If you don’t give up, you still have a chance.”

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A student poses a question to Jack Ma.

Spirit of camaraderie

To Ma, teamwork is something he prizes above all else.

“When my company was small, I asked my colleagues. When my company got bigger, I asked my colleagues. Today when my company is much bigger, I ask my colleagues. This is teamwork,” he said in response to another question from the audience.

“When I have problems, I ask my team. I never hide anything. Everything I know, I share with my team. And I hope if my team have problem, they will ask me. We discuss openly and frankly.

“Today is different. Our size last year was almost as big as the number 31 [largest] country in the world. When it’s so big, there’s no place I can learn so I read books, travel around the world, meet leaders, businessmen, artists, talk to them, listen to them and share with my team.

“Nobody is superman. It’s not you who makes the team succeed, it’s the team that makes you succeed. When I have problem, I think, share it with my team. If I can’t figure it out, I go to sleep, wake up the next morning and ask my team again

“Over the past 18 years, I’ve never thought of committing suicide [when faced with failures]. There’s always a way out, always a solution for the future and tomorrow. You may not have it, but you have to find it out with the team.”

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Jack Ma gestures while answering a question from the audience.

Earlier on Monday, the world’s most inspirational billionaire, according to Fortune’s 2017 “World’s Greatest Leaders” index, spoke at the Vietnam E-Payment Forum of his experiences in e-ecommerce and mobile payment, and how lessons from China can be applied in Vietnam.

“Like it or not, the world is moving to a non cash payment era,” Ma said. “When society is a cashless society, everything is digitalized, everything is transparent. No one can run away.”

On starting your own business, Ma said: “The first thing is not the money. It’s the idea, the thing that others can’t do. You have a good idea, money will come, good results will come.”

“When you want to become an entreprenuer think about what you will sacrifice,” he added

Source- Jack Ma Alibaba Foundation

AI is already revolutionizing retail

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Consumers are 98% more likely to trust recommendations from YouTube creators than from influencers on other platforms

How Marketers Can Keep Pace in the Evolving Retail Landscape

Sean Scott, VP and GM of Consumer Shopping at Google, shares insights at Shoptalk 2025 on how AI is revolutionizing
retail and how marketers can adapt to shifting consumer behaviors. Key takeaways include:

Shoppers Are Always Browsing
Consumers are in a state of “ambient shopping,” moving seamlessly between platforms like YouTube Shorts,
Google Search, and Shopping, with 8 in 10 purchase journeys involving multiple touchpoints.

Consumer Behavior is Unpredictable
Shopping is no longer linear, with interactions happening across digital and physical spaces.
Every interaction is an opportunity for retailers to connect with high-intent shoppers.

AI is Transforming Retail
AI is enabling personalized recommendations, predictive insights, and seamless shopping experiences.
Tools like virtual try-ons, in-stock notifications, and visual search are bridging online and offline retail.

Trust Drives Purchases
Platforms like YouTube are pivotal for product reviews, with creator-driven content being a
key driver for conversions. Credible recommendations shorten the buyer’s journey and build trust.

Marketers Need High-Quality Data
Accurate product data, powered by tools like Merchant Center, enhances AI performance.
Marketers leveraging tools like Performance Max and Demand Gen can capitalize on AI-driven innovations to optimize campaigns.

Future-Proofing Retail Strategies
By refining product data, embracing AI, and meeting shoppers where they are, marketers
can stay competitive and define the next era of retail success.

Retailers who prioritize AI-driven personalization and use tools to streamline the shopper’s
journey will achieve sustained growth and build stronger consumer connections.

Source Google

 

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0) में जिला कौशल समिति (DSC) की भूमिका

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PMKVY 4.0 में जिला कौशल समिति (DSC) का महत्वपूर्ण योगदान है। DSC का मुख्य उद्देश्य जिले में कौशल विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना, निगरानी करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार व प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाना है। नीचे DSC की प्रमुख भूमिकाओं का विवरण दिया गया है:

1. कौशल विकास में समन्वय और संसाधनों का उपयोग
DSC जिले में विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करेगी।

संसाधनों और बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए क्रॉस-यूटिलाइजेशन (संसाधनों का साझा उपयोग) को बढ़ावा देगी।

2. कौशल अंतर का आकलन
DSC जिले में उद्योगों की मांग का आकलन करेगी।

कौशल अंतर को भरने के लिए योजनाएं बनाएगी और इन्हें लागू करेगी।

3. जिला कौशल विकास योजना (DSDP) तैयार करना
DSC जिला कौशल विकास योजना (District Skill Development Plan – DSDP) तैयार करेगी।

इस योजना के अंतर्गत जिले की स्किलिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतियां बनाई जाएंगी।

4. PMKK और PMKVY प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना में सहयोग
जिले में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK) और PMKVY प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान करना।

5. जागरूकता अभियान
स्थानीय मीडिया नेटवर्क के माध्यम से योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

अधिक से अधिक उम्मीदवारों को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना।

6. रोजगार मेलों और ओजेटी (OJT) का आयोजन
स्थानीय उद्योगों और प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय स्थापित करके रोजगार मेलों (रोजगार मेले) का आयोजन।

उद्योगों के लिए ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) की सुविधा प्रदान करना।

7. उद्योग और कौशल विकास के बीच संबंध मजबूत करना
उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाना और उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना।

उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण केंद्रों को मार्गदर्शन देना।

8. प्रशिक्षण की नियमित निगरानी
जिले के प्रशिक्षण केंद्रों की नियमित निगरानी करना।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष:
जिला कौशल समिति (DSC) PMKVY 4.0 के तहत जिले में कौशल विकास गतिविधियों का केंद्र बिंदु है। यह न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्योग की मांग के अनुसार कौशल विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के लिए दिशा-निर्देश

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पीएमकेवीवाई 4.0 का परिचय पृष्ठभूमि कौशल विकास का महत्व:

कौशल विकास से व्यक्तिगत उत्पादकता बढ़ती है, जिससे रोजगार और आय में वृद्धि होती है।

उत्पादकता और रोजगार में वृद्धि से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे प्रतिस्पर्धा में सुधार होता है।

बदलते रोजगार बाजार के कारण कौशल की प्रासंगिकता कम समय तक रहती है, जिससे निरंतर कौशल विकास (skilling), पुनः-कौशल विकास (reskilling), और उन्नत कौशल विकास (upskilling) आवश्यक हो जाता है।

शोध से पता चला है कि उन्नत कौशल विकास भारत के जीडीपी में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकता है।

भारत की जनसांख्यिकी:

भारत में युवा आबादी की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जो इसे “दुनिया की कौशल राजधानी” बनने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।

कौशल विकास भारत के “अमृत काल” के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य समावेशी कल्याण, प्रौद्योगिकी-सक्षम विकास, और बहु-ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर होना है।

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE):

2014 में स्थापित, इस मंत्रालय का उद्देश्य भारत में कौशल विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY):

2015 में MSDE ने PMKVY योजना शुरू की, जो युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए प्रोत्साहित करती है।इस योजना का उद्देश्य मुफ्त अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना और युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना है।

PMKVY का अब तक का प्रदर्शन:2015 से 2022 तक योजना के तीन संस्करण लागू किए गए।इन संस्करणों के तहत 1.37 करोड़ से अधिक युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है।

निष्कर्ष:
PMKVY 4.0 भारत के कौशल विकास को सुदृढ़ करने और युवाओं को रोजगारपरक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह योजना भारत को वैश्विक कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

पीएमकेवीवाई 4.0 का सारांश
2. पीएमकेवीवाई 4.0 नई चुनौतियों पर ध्यान:

पिछले चरणों में मिली चुनौतियों और अनुभवों के आधार पर, पीएमकेवीवाई 4.0 (2022-2026) ‘स्किल इंडिया प्रोग्राम’ के तहत लागू किया जा रहा है।यह कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक लचीला, तेज़, और वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप बनाने पर केंद्रित है।

3. पीएमकेवीवाई 4.0 के उद्देश्य
युवाओं को उनकी क्षमताओं और इच्छाओं के अनुसार करियर चुनने के लिए प्रोत्साहित करना।

बाजार-उन्मुख और मांग-आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।

प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण का उपयोग करके कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को सरल बनाना।

दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में कौशल विकास का बुनियादी ढांचा स्थापित करना।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, और वंचित समुदायों को शामिल कर समावेशिता बढ़ाना।

जीवनभर कौशल विकास के लिए पुनः-कौशल और उन्नत कौशल के अवसर प्रदान करना।

उद्योग से संबंधित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षकों के माध्यम से गुणवत्ता प्रशिक्षण।

रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए रोजगार सृजन और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देना।

4. पीएमकेवीवाई 4.0 की डिज़ाइन प्रिंसिपल्स लचीलापन और समावेशिता:

उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।पुनः-कौशल और उन्नत कौशल:

RPL के माध्यम से कौशल का मूल्यांकन और निगरानी में सुधार।

डिजिटलीकरण:

ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से प्रशिक्षण प्रक्रिया को डिजिटाइज करना।

प्लेसमेंट और कौशल का पृथक्करण:

प्रशिक्षित उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से करियर पथ चुनने में सक्षम बनाना।

विशेष क्षेत्र:

नई-पीढ़ी के कौशल (AI, ML, वेब 3.0, हरित अर्थव्यवस्था आदि) पर ध्यान।

5. कार्यान्वयन रणनीति नीतिगत ढांचा:

एमएसडीई नीति निर्धारण के लिए जिम्मेदार होगा।

नियामक ढांचा:NCVET कौशल पाठ्यक्रमों के लिए एकीकृत नियामक ढांचा प्रदान करेगा।

प्रशिक्षण प्रदाता:

पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्र, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), और अन्य साझेदार संगठन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

6. प्रशासनिक संरचना स्टीयरिंग कमेटी:

सचिव, एमएसडीई की अध्यक्षता में नीति दिशा और निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी।

कार्यकारी समिति:योजना के संचालन और निगरानी के लिए अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में कार्य करेगी।

जिला कौशल समिति:

जिला स्तर पर कौशल विकास योजना और निगरानी का कार्य करेगी।

7. स्किल इंडिया डिजिटल (SID) एकीकृत मंच:

यह प्लेटफ़ॉर्म शिक्षा से कौशल और भविष्य के अवसरों तक सहज संक्रमण को सक्षम करेगा।

डिजिटल लाइफसाइकल:प्रशिक्षण के पंजीकरण से प्रमाणन तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटलीकरण करेगा।

निष्कर्ष:
पीएमकेवीवाई 4.0 भारत को विश्व कौशल केंद्र बनाने और युवाओं को रोजगार के अनुकूल बनाने के लिए एक सशक्त प्रयास है।

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CHAPTER II: TRAININGTYPES AND TARGET GROUP
पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत प्रशिक्षण के प्रकार और पात्रता
प्रशिक्षण के प्रकार:

शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग (STT):

एनएसक्यूएफ (NSQF) मानकों के अनुरूप 300-600 घंटे के कोर्स।

अधिक अवधि के कोर्स उद्योग की मांग के अनुसार।

ऑन-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य हिस्सा होगी, जिसकी अवधि जॉब रोल पर निर्भर करेगी।

प्रशिक्षण मान्यता प्राप्त और संबद्ध प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से।

प्राथमिक कौशल मान्यता (RPL):

पहले से मौजूद कौशल/अनुभव वाले उम्मीदवारों का प्रमाणन।

कौशल उन्नयन और उच्च स्तर की प्रमाणन प्रक्रिया पर जोर।

इच्छुक उम्मीदवारों को मूल्यांकन आधारित पाठ्यक्रम पूरा करना होगा।

विशेष परियोजनाएँ (Special Projects):

वंचित वर्गों, कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और नई पीढ़ी के जॉब रोल्स के लिए प्रोजेक्ट-आधारित प्रशिक्षण।

विशेष परियोजनाओं में कुछ छूटें दी जा सकती हैं, और ये आवासीय या गैर-आवासीय हो सकती हैं।

लक्ष्य समूह, पात्रता और भौगोलिक कवरेज:

लक्ष्य समूह:

STT: नए कौशल प्राप्त करने वाले, पुनः कौशल उन्नयन, स्कूल/कॉलेज ड्रॉपआउट, बेरोजगार युवा।

RPL: पहले से कौशल रखने वाले और प्रमाणन के इच्छुक।

विशेष परियोजनाएँ: वंचित वर्ग और भविष्य के कौशल पर केंद्रित।

पात्रता:

भारतीय नागरिक जिनके पास वैध आधार कार्ड हो।

RPL के लिए, संबंधित जॉब रोल में अनुभव आवश्यक।

आयु सीमा:

STT और विशेष परियोजनाएँ: 15-45 वर्ष।

RPL: 18-59 वर्ष।

भौगोलिक कवरेज:

आकांक्षी, पिछड़े, सीमा, जनजातीय और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों को प्राथमिकता।

निष्कर्ष:
पीएमकेवीवाई 4.0 के प्रशिक्षण प्रकार युवाओं को उद्योग से जुड़े कौशल प्रदान करने और वंचित समुदायों को अवसर प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
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अध्याय III: प्रशिक्षण प्रदाता और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां (PMKVY 4.0)
1. शॉर्ट-टर्म प्रशिक्षण केंद्र:
1.1 कौन हो सकते हैं?
कानूनी रूप से स्थापित संस्थाएं जैसे सोसायटी, ट्रस्ट, कंपनी, LLP, सरकारी संस्थान आदि।

1.2 MSDE संबंधित संस्थान:
प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK)/स्किल इंडिया केंद्र।

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI)।

जन शिक्षण संस्थान (JSS)।

राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI)।

उद्यमिता और लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD)।

भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE) आदि।

1.3 स्किल हब्स:
सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित होंगे जैसे स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय आदि।

1.4 अन्य सरकारी संस्थान:
जैसे NIELIT, CIPET, RSETI, NSIC, SDI आदि।

1.5 उद्योग/निजी संस्थान:
उद्योग परिसर आधारित प्रशिक्षण केंद्र और अन्य निजी संस्थान।

2. प्राथमिक कौशल मान्यता (RPL-PIA):
RPL-PIA वे संस्थाएं हैं जो RPL परियोजना का कार्यान्वयन और प्रबंधन करेंगी।

पात्रता:

न्यूनतम 3 वर्षों से स्थापित और 1 वर्ष का अनुभव।

कुल परियोजना लागत का 25% औसत वार्षिक टर्नओवर।

पिछले दो वित्तीय वर्षों में सकारात्मक नेट वर्थ।

सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं को कुछ छूट।

3. विशेष परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (SPIA):
विशेषज्ञ संगठन जैसे NGO, अनुसंधान संगठन, दिव्यांगजन संस्थाएं, और जनजातीय/वंचित समूहों के लिए काम करने वाले संस्थान।

उद्योग निकाय, प्रतिष्ठित संघ और SSC, जो 90% प्लेसमेंट की गारंटी देते हैं।

पात्रता:

3 वर्षों की स्थापना और 1 वर्ष का अनुभव।

कुल परियोजना लागत का 25% औसत टर्नओवर।

NGO के लिए नीति आयोग के Darpan पोर्टल पर पंजीकरण।

4. प्रशिक्षण केंद्रों का मान्यता और संबद्धता:
सभी प्रशिक्षण केंद्रों को “स्किल इंडिया डिजिटल” प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करना होगा।

केंद्रीय और राज्य सरकार के संस्थानों को मान्यता की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य है।

निष्कर्ष:
PMKVY 4.0 का उद्देश्य संस्थागत ढांचे के तहत गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास करना है। इसमें सरकारी, निजी और उद्योग आधारित संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
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अध्याय IV: कौशल अंतर और लक्ष्य आवंटन की हिंदी में संक्षिप्त जानकारी
कौशल अंतर की पहचान
क्षेत्रीय कौशल अंतर अध्ययन:

सेक्टर स्किल काउंसिल विभिन्न क्षेत्रों में उभरती प्रवृत्तियों के आधार पर कौशल अंतर का अध्ययन करेगी।

उद्योग समूहों, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं (जैसे पीएम गतिशक्ति, सागरमाला) से संबंधित कौशल आवश्यकताओं का विश्लेषण किया जाएगा।

जिला/राज्य कौशल विकास योजना:

जिला कौशल समितियां जिला कौशल विकास योजना (DSDP) तैयार करेंगी।

इसमें मांग और आपूर्ति का विश्लेषण, औपचारिक क्षेत्र में रोजगार क्षमता, कार्य योजना आदि शामिल होंगे।

राज्य/संघ शासित प्रदेश इन DSDP को जोड़कर राज्य कौशल विकास योजना (SSDP) बनाएंगे।

राष्ट्रीय कौशल विकास योजना:

NSDC DSDP/SSDP और कौशल अंतर अध्ययन के आधार पर राष्ट्रीय कौशल विकास योजना (NSDP) तैयार करेगा।

इसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।

 

लक्ष्य और जॉब रोल आवंटन
लक्ष्य आवंटन प्रक्रिया:

कौशल अंतर अध्ययन के आधार पर प्रशिक्षण केंद्रों को दीर्घकालिक लक्ष्य आवंटित होंगे।

प्रदर्शन समीक्षा के आधार पर लक्ष्य तिमाही आधार पर जारी किए जाएंगे।

विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों, संस्कृति, भाषा और आबादी की विविधता को ध्यान में रखा जाएगा।

राज्यवार लक्ष्य निर्धारण:

राज्य के प्रशिक्षण लक्ष्यों का निर्धारण जनसंख्या (जनगणना डेटा) के आधार पर होगा।

सेक्टर की पहचान जिला कौशल समिति, राज्य सरकार और उद्योगों की मांग के आधार पर की जाएगी।

प्रशिक्षण प्रदाताओं का चयन:

प्राथमिकता के आधार पर रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय (RTD) मॉडल वाले प्रदाताओं को लक्ष्य दिए जाएंगे।

पीएमकेके (PMKK) को उनकी क्षमता और भौगोलिक स्थिति के आधार पर लक्ष्य आवंटित किए जाएंगे।

 

विशेष भौगोलिक और समुदाय आधारित ध्यान
महत्वपूर्ण क्षेत्र:

आकांक्षी जिले, आदिवासी-बहुल जिले, सीमा क्षेत्र, नक्सल प्रभावित क्षेत्र, और पिछड़े क्षेत्र।

कृषि, हस्तशिल्प, पारंपरिक कार्य और उच्च तकनीकी कोर्स वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समावेशन पर जोर:

हाशिए के समुदायों (आदिवासी, पिछड़े और नक्सल प्रभावित क्षेत्र) को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

पाठ्यक्रम और जॉब रोल
NSQF के अनुरूप जॉब रोल:

सभी जॉब रोल राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (NSQC) से मान्यता प्राप्त होने चाहिए।

विशेष परियोजनाओं के लिए आवश्यकता में छूट दी जा सकती है।

स्थानीय और उभरते अवसरों के लिए जॉब रोल:

स्थानीय, उद्योग आधारित, भविष्य आधारित (जैसे ड्रोन, AI, रोबोटिक्स), और वैश्विक मांग के अनुसार जॉब रोल चुने जाएंगे।

उच्च स्तरीय प्रशिक्षण:

PMKVY 4.0 के तहत उच्च स्तर (NSQF लेवल 5 और उससे ऊपर) के प्रशिक्षण और लंबे समयावधि के पाठ्यक्रम पेश किए जाएंगे।

निष्कर्ष:
PMKVY 4.0 के तहत कौशल विकास योजनाएं जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कौशल अंतर को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएंगी। विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की आवश्यकताओं के अनुसार लक्ष्य और पाठ्यक्रम का आवंटन किया जाएगा।

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अध्याय V: प्रशिक्षण जीवन-चक्र प्रबंधन – संक्षेप
पंजीकरण और परामर्श:

उम्मीदवारों को जागरूकता अभियान के माध्यम से योजना की जानकारी दी जाएगी।

“स्किल इंडिया डिजिटल” पोर्टल या ऐप पर पंजीकरण आवश्यक होगा।

उम्मीदवारों को ऑनलाइन परामर्श से उपयुक्त कोर्स और ट्रेनिंग सेंटर चुनने में मदद मिलेगी।

सुविधाएं और अधिकार:

पंजीकरण के बाद उम्मीदवारों को कोर्स डिटेल्स, ट्रेनर और सुविधाओं की जानकारी मिलेगी।

योजना के ब्रांडिंग के साथ इंडक्शन किट (बैग, टी-शर्ट/जैकेट) दी जाएगी।

प्रशिक्षण प्रक्रिया:

शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग और RPL (Recognition of Prior Learning) के माध्यम से कौशल मान्यता।

डिजिटल कंटेंट का उपयोग कक्षा प्रशिक्षण के पूरक के रूप में होगा।

प्रशिक्षण मोड:

मुख्य रूप से भौतिक प्रशिक्षण, कुछ मामलों में ऑनलाइन और मिश्रित मोड भी।

उपस्थिति प्रबंधन:

AEBAS के माध्यम से उम्मीदवार और प्रशिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित होगी।

ऑन-जॉब ट्रेनिंग (OJT):

उम्मीदवारों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा।

OJT की निगरानी ट्रेनिंग पार्टनर द्वारा की जाएगी।

मूल्यांकन और प्रमाणन:

मूल्यांकन NCVET-स्वीकृत संस्थानों द्वारा होगा।

सफल उम्मीदवारों को डिजिटल सर्टिफिकेट और ग्रेड दिए जाएंगे।

स्नातक समारोह:

प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा।

समारोह का प्रचार किया जाएगा, और बैच-वार फोटो/वीडियो अपलोड किए जाएंगे।

प्रमाणन के बाद सहायता:

उम्मीदवारों का 1 वर्ष तक आईटी-आधारित ट्रैकिंग।

“स्किल इंडिया डिजिटल” पोर्टल से नौकरी और अन्य सुविधाओं तक पहुंच।

रोजगार और अप्रेंटिसशिप मेलों में भागीदारी।

पुनः नामांकन:

एक क्षेत्र में अधिकतम दो बार नामांकन, दूसरी बार केवल उच्च स्तर की भूमिका के लिए।

न्यूनतम छह महीने का अंतर पहले और दूसरे कोर्स के बीच आवश्यक।

कम स्तर के कोर्स के लिए नामांकन को हतोत्साहित किया जाएगा।

यह प्रशिक्षण जीवन-चक्र, उम्मीदवारों की सुविधा, कुशल प्रबंधन और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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अध्याय VI: कौशल हब्स में कार्यान्वयन

सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों (कौशल विश्वविद्यालय समेत) और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में Skill Hubs स्थापित किए जाएंगे।

इन संस्थानों में PMKVY 4.0 के तहत शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का संचालन होगा।

प्रशिक्षण से पहले की आवश्यकताएँ:

इन्फ्रास्ट्रक्चर:

पर्याप्त कक्षा और प्रयोगशाला की उपलब्धता।

आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) का उपयोग।

प्रशिक्षक:

संस्थान के अनुभवी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की अनुमति।

Skill India Digital पोर्टल से प्रमाणित प्रशिक्षकों की नियुक्ति भी की जा सकती है।

उम्मीदवार चयन:

15-45 वर्ष के स्कूल/कॉलेज छोड़ चुके, शिक्षा से बाहर और बेरोजगार युवाओं को लक्षित किया जाएगा।

उम्मीदवारों का चयन नौकरी भूमिका के पाठ्यक्रम में निर्धारित योग्यता मानदंड के आधार पर होगा।

प्रवर्तन और प्रबंधन:

NSDC इस योजना का कार्यान्वयन करेगा और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।

प्रशिक्षण जीवनचक्र (नामांकन से प्रमाणन और ट्रैकिंग) को Skill India Digital प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा।

Skill Hubs प्रशिक्षण के समय (कार्य घंटों के दौरान या बाद में) का निर्धारण स्वयं कर सकते हैं।

ऑन-जॉब ट्रेनिंग (OJT) का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए संस्थानों को निकटस्थ उद्योगों में व्यवस्था करनी होगी।

मूल्यांकन और प्रमाणन सेक्टर स्किल काउंसिल्स (SSCs) या NCVET द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से होगा।

वित्तीय प्रावधान:

प्रशिक्षण लागत में प्रशिक्षक वेतन, शिक्षण सामग्री, इंफ्रास्ट्रक्चर, मूल्यांकन और बीमा शामिल होंगे।

भुगतान PMKVY 4.0 मानदंडों के अनुसार NSDC द्वारा तीन किश्तों में किया जाएगा।

यदि कोई Skill Hub लक्ष्य के अनुसार प्रशिक्षण में विफल होता है, तो जारी धनराशि की वसूली की जाएगी।

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अध्याय VII: प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं का प्रशिक्षण

परिचय:

राष्ट्रीय प्रशिक्षक और मूल्यांकनकर्ता पूल का निर्माण:

विभिन्न नौकरी भूमिकाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय पूल बनाया जाएगा।

उद्देश्य:

प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं की गुणवत्ता और संख्या में सुधार।

प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं के भौगोलिक प्रसार को बढ़ाना।

कार्यान्वयन प्रक्रिया:

प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए एक प्रभावी और सहायक तंत्र विकसित किया जाएगा।

प्रशिक्षण का संचालन विभिन्न संस्थानों द्वारा किया जाएगा जैसे:

MSDE संबंधित संस्थान: राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTIs), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs), कौशल उत्कृष्टता केंद्र (CoEs), आदि।

अन्य मंत्रालयों/विभागों के संस्थान: कौशल विश्वविद्यालय, NIELIT, CIPET, आदि।

उद्योग द्वारा संचालित प्रशिक्षण केंद्र और कौशल हब।

इच्छुक संस्थानों को ToT/ToA (ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स/असेसर्स) के लिए विस्तृत प्रस्ताव जमा करना होगा, जिसे NSDC द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।

प्रशिक्षण जीवनचक्र को Skill India Digital पोर्टल पर प्रलेखित किया जाएगा।

मौजूदा प्रशिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं को योजना में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

Recognition of Prior Learning (RPL) के माध्यम से प्रमाणन की प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रमाणन के प्रकार:

मूलभूत प्रमाणन:

प्रशिक्षक/मूल्यांकनकर्ता को 10 दिन का प्रशिक्षण (5 दिन ऑनलाइन) दिया जाएगा।

प्रमाणन 2 वर्षों के लिए मान्य होगा।

उन्नत प्रमाणन:

15 सप्ताह तक ऑन-जॉब प्रशिक्षण के बाद आजीवन प्रमाणन।

स्वतंत्र रोजगार कौशल प्रमाणन:

रोजगार कौशल प्रशिक्षण/मूल्यांकन के लिए अलग प्रमाणन।

मूल्यांकन और प्रमाणन:

मूल्यांकन और प्रमाणन Awarding Body (AB) द्वारा किया जाएगा।

प्रमाणन आवश्यक योग्यताओं के आधार पर होगा।

वित्तीय प्रावधान:

ToT/ToA का खर्चा MSDE वहन करेगा।

Residential Training के लिए प्रति उम्मीदवार प्रति दिन ₹375 का भुगतान किया जाएगा।

संस्थान उम्मीदवारों से नाममात्र रिफंडेबल शुल्क ले सकते हैं।

भुगतान तीन चरणों में किया जाएगा:

30% परियोजना की स्वीकृति और प्रशिक्षण आरंभ।

50% नामांकित उम्मीदवारों का 50% और 25% प्रमाणन।

20% परियोजना पूर्णता और अंतिम रिपोर्ट जमा।

निगरानी और फीडबैक:

AEBAS उपस्थिति अनिवार्य होगी (न्यूनतम 80% उपस्थिति)।

SSC/AB/NSDC द्वारा नियमित निगरानी।

प्रशिक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग और रिकॉर्ड रखा जाएगा।

प्रशिक्षण के लिए भुगतान दर:

न्यूनतम 10 दिनों के प्रशिक्षण के लिए नए प्रशिक्षकों को ₹11,200 (कैटेगरी 1) और मौजूदा प्रशिक्षकों को ₹2,200 (3 दिन) भुगतान किया जाएगा।

उन्नत प्रमाणन के लिए 15 सप्ताह तक प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

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अध्याय VIII: वित्तीय प्रबंधन का सारांश

सामान्य वित्तीय प्रबंधन:

PMKVY 4.0 की क्रियान्वयन के लिए आवश्यक धनराशि बजट ग्रांट से ली जाएगी।

जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) का पालन किया जाएगा, और फंड का लेन-देन पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से होगा।

नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) को केंद्रीय नोडल एजेंसी (CNA) नियुक्त किया गया है।

योजना के तहत खरीददारी अधिकतम GeM प्लेटफॉर्म से की जाएगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए लागत मानदंड:

विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण के लिए औसत यूनिट लागत निर्धारित की गई है। उदाहरण:

300 घंटे के पाठ्यक्रम: ₹9,540 प्रति अभ्यर्थी

450 घंटे के पाठ्यक्रम: ₹13,724 प्रति अभ्यर्थी

RPL (60 घंटे, केंद्र पर): ₹3,962.88 प्रति अभ्यर्थी

फंड रिलीज प्रक्रिया:

फंड 3 किश्तों में जारी किया जाएगा:

30% प्रशिक्षण शुरू होने पर।

30% बैच की 70% उपस्थिति होने और 50% प्रशिक्षण पूरा होने पर।

40% प्रमाणन (सिर्फ पास उम्मीदवारों) पर।

RPL के लिए 80% भुगतान मूल्यांकन परिणाम अपलोड होने पर, और 20% प्रमाणपत्र वितरण की पुष्टि पर दिया जाएगा।

अतिरिक्त समर्थन:

विशेष समूहों (महिलाएं, दिव्यांगजन) के लिए प्रशिक्षण के दौरान बोर्डिंग और ट्रांसपोर्ट सुविधाएं।

प्रत्येक प्रमाणित अभ्यर्थी को 1 वर्ष की दुर्घटना बीमा।

प्रशिक्षण केंद्रों को इंडक्शन किट प्रदान की जाएगी।

प्रमाणन के बाद अभ्यर्थियों का 1 वर्ष तक ट्रैकिंग।

प्रशासनिक व्यय:

कुल बजट का 5% प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किया गया है।

PMKVY ब्रांडिंग और संचार दिशानिर्देशों का सारांश (हिंदी में):
ब्रांडिंग दिशानिर्देश जारी करना:

योजना के ब्रांडिंग और संचार दिशानिर्देश NSDC द्वारा अलग से जारी किए जाएंगे।

ये दिशानिर्देश फ्लायर्स, होर्डिंग्स, स्टैंडीज आदि जैसे सभी ब्रांडिंग सामग्री के टेम्पलेट प्रदान करेंगे।

संगतता बनाए रखना:

सभी प्रशिक्षण केंद्र और कार्यान्वयन एजेंसियां इन दिशानिर्देशों का पालन करेंगी।

यह योजना की पहचान और रणनीति में निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

इसमें लोगो स्पेसिफिकेशन, केंद्र की बाहरी ब्रांडिंग, रिसेप्शन, क्लासरूम, और लैब की ब्रांडिंग शामिल है।

ब्रांडिंग सामग्री की व्यवस्था:

प्रशिक्षण केंद्र ब्रांडिंग और संचार सामग्री की व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होंगे।

प्रचार माध्यम:

प्रिंट मीडिया: स्थानीय समाचार पत्रों और प्रेस विज्ञप्तियों में विज्ञापन।

आउटडोर विज्ञापन: दीवार पेंटिंग, होर्डिंग्स, पोस्टर्स।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया: टीवी विज्ञापन, रेडियो जिंगल्स, एसएमएस और व्हाट्सएप कैंपेन।

सोशल मीडिया: Koo, X (Twitter), इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि पर उपस्थिति।

प्रचार अभियानों का उद्देश्य:

नए कोर्स का लॉन्च।

नए कौशल केंद्र का उद्घाटन।

मौजूदा कौशल विकास पाठ्यक्रमों की प्रगति।

कौशल मेले, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, RPL कार्यक्रम आदि।

लाभार्थियों के अनुभव और उनकी कहानियां।

लोगो और फोटो के उपयोग के दिशा-निर्देश:

मंत्रालय के लोगो या प्रधानमंत्री और मंत्रियों की फोटो का उपयोग संवेदनशील है।

सामग्री को MSDE या NSDC से पूर्व अनुमोदित कराना अनिवार्य है।

बजट उपयोग:

योजना के तहत उपलब्ध बजट का उपयोग NSDC द्वारा तैयार मीडिया एक्शन प्लान के आधार पर किया जाएगा, जिसे स्टीयरिंग कमेटी द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।

The Evolution of Thought Leadership: How Can We Adapt?

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In the Age of AI, Thought Leadership Belongs to Those Who Connect, Not Control
In the Age of AI, Thought Leadership Belongs to Those Who Connect, Not Control

Thought Leadership in the AI Age Belongs to Those Who Connect, Not Control

When we meet regularly with a group of seasoned professionals to explore big ideas, emerging trends,
and how we might anticipate what’s coming next in the business world. The insights and learning from
these meetings are invaluable. But the real magic isn’t in the ideas themselves; it’s in the shared stories,
the deep relationships, and the friendships that have developed over the years.

it is better to say, “It’s not networking; it’s community-ing.” And, honestly, that’s what makes these
discussions different. They’re not just about tossing around theories — they’re about challenging each other,
sharpening perspectives, and realizing that the future might be much weirder than we thought.

AI has democratized access to information in ways that were previously unimaginable. As a result, the future of
thought leadership can no longer rely solely on unique insights. Instead, it must center on offering unique
perspectives that foster trust and build deeper relationships.

To remain relevant in this evolving landscape, thought leaders must consider shifting their focus in three crucial ways:

1. Shift from Delivering Facts to Shaping Meaning
AI can generate an endless stream of data, but leadership will no longer be about generating more information. It will be about guiding interpretation. The true value of thought leadership lies in helping diverse groups contextualize and synthesize insights in ways that create shared understanding and deeper meaning. It’s not just about presenting data; it’s about framing that data in a manner that fosters trust, alignment, and action.

2. Trust in the Storyteller is the Foundation of Belief in the Story
John Maxwell famously wrote, “People buy into the leader before they buy into the vision … leaders cannot take their people to places they haven’t yet traveled to themselves!” This highlights a critical point: while the story may create value, the storyteller’s credibility is what ultimately drives belief. If the audience doesn’t trust the messenger, the message will lose its impact.

In this context, elevating trusted voices within your brand and supporting them in becoming the thought leaders of tomorrow is paramount. Thought leadership is no longer just about delivering great content—it’s about the integrity, authenticity, and credibility of the individuals behind it.

3. Foster Interactive, Community-Driven Content
The new goal of thought leadership is no longer simply about gaining attention—it’s about creating meaningful engagement. The focus should be on interactivity over traffic, loyalty over transactions, and depth over virality. Thought leaders must go beyond broadcasting insights. They must foster conversations, cultivate communities, and create spaces where ideas not only spread but evolve. This collaborative approach ensures that insights are not only shared but co-created, adding layers of value and relevance.

The Asymmetry of Relationships: The New Leadership Advantage
As AI reduces friction in execution, it also diminishes the moments where leaders traditionally prove their worth—through debate, persuasion, and the art of overcoming resistance. Without these natural checks, leadership will no longer rest on a monopoly of information. Information is now universally accessible.

Instead, leadership will increasingly depend on the ability to create asymmetry in relationships. In this new paradigm, leaders will not just broadcast insights—they will imbue those insights with deeper meaning, context, and trust. Leadership will be about co-creating with specific communities, shaping understanding in ways that resonate, build credibility, and foster genuine connections.

A New Era of Leadership
Leadership in this era won’t be defined by commanding authority. Instead, it will require leaders to earn authority one community at a time. The leaders who thrive will be those who excel at connecting with people, not controlling them. It’s not about knowing the path—it’s about making the journey matter.

It’s your story. Tell it well.

Source- Content marketing Institute

The 4S Behaviors: A Fresh Perspective on Consumer Decision-Making

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think-with-google-marketing-tips-on-uttaranchal-tines-uttarakhand-start-up-entrepreneurship
उपभोक्ता निर्णय-निर्माण प्रक्रिया पर एक नया दृष्टिकोण

1. Streaming: Always-On Content Consumption
Streaming is no longer just for movies or music—it’s a continuous, personalized content experience. Platforms like YouTube, connected TV, and podcasts enable consumers to engage with content across various channels. Unlike traditional advertising, streaming is interactive, enabling seamless transitions from discovery to decision-making.

To stand out, focus on content sequencing, AI-powered personalization, and interactive storytelling that transforms passive viewing into active engagement.

2. Scrolling: Discovery in Motion
Scrolling is today’s digital version of window shopping. Whether browsing social feeds or searching for inspiration, people often consume content without the intent to buy. However, the right creative or influencer recommendation can spark interest and drive action in an instant.

To capture attention in this fast-moving environment, use optimized creatives: engaging visuals, compelling stories, and AI-powered personalization.

3. Searching: Intent-Driven Exploration
Search behavior has evolved beyond simple queries. Today’s consumers use AI-powered tools like Gemini for conversational searches, Google Lens for instant product identification, AI-generated overviews, and multimodal search that combines text, image, and voice. Many also turn to YouTube to explore product reviews and real-life demonstrations.

To keep up, optimize for diverse search ecosystems and incorporate AI-based advertising solutions. Tools like Smart Bidding, broad match, and auto-generated assets can save time and deliver results.

4. Shopping: Seamless, Nonlinear Transactions
Today’s consumers demand frictionless shopping experiences—whether through a social commerce post, a shoppable YouTube ad, or an in-app checkout. The traditional purchase funnel has blurred, with impulse buys and multi-touchpoint decisions becoming the norm.

To meet these expectations, integrate shopping into every relevant marketing touchpoint. AI-powered recommendations, personalized offers, and strategic calls to action will help drive conversions at any stage of the customer journey.

Embracing the 4S Behaviors
The rise of the 4S behaviors brings both challenges and opportunities. Consumer journeys are more fragmented, making influence harder to predict. But, this also opens doors to engage, influence, and convert in more meaningful ways.

To succeed in this dynamic landscape, marketers need a flexible approach that moves beyond the traditional linear marketing funnel, embracing the power of influence and AI. By doing so, strategies can better align with the complexities of today’s consumer journey.

Source- Google

उत्तराखंड समग्र शिक्षा: कुलदीप गैरोला का बयान व PM SHRI की पृष्ठभूमि

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PM SHRI schools shall set examples for the best in class in the country
PM SHRI schools shall set examples for the best in class in the country

 

उत्तराखंड समग्र शिक्षा: अपर राज्य परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोला का बयान और PM SHRI योजना की पृष्ठभूमि
उत्तराखंड समग्र शिक्षा: अपर राज्य परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोला का बयान और PM SHRI योजना की पृष्ठभूमि

 

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Uttarakhand Samagra Shiksha: Statement of Additional State Project Director Kuldeep Gairola and Background of PM SHRI Scheme

Uttarakhand Samagra Shiksha: Statement of Additional State Project Director Kuldeep Gairola and Background of PM SHRI Scheme

PM SHRI के बारे में

PM SHRI स्कूल भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक केंद्रीय योजना है। इस पहल का उद्देश्य 14,500 से अधिक PM SHRI स्कूलों को विकसित करना है, जो केंद्र सरकार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार, स्थानीय निकायों,
केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) द्वारा संचालित होंगे।

इन विद्यालयों में प्रत्येक छात्र को सुरक्षित, समावेशी और प्रेरणादायक वातावरण मिलेगा, जहाँ सीखने की विविध गतिविधियाँ, आधुनिक भौतिक संरचना, और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
यह स्कूल छात्रों को इस तरह से विकसित करेंगे कि वे सक्रिय, उत्पादक और समाज में योगदान देने वाले नागरिक बन सकें, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत एक समान, समावेशी और बहुलवादी समाज के निर्माण में सहायक हों।

PM SHRI School is a centrally sponsored scheme by the Government of India
PM SHRI School is a centrally sponsored scheme by the Government of India

PM SHRI स्कूलों की विशेषताएँ

PM SHRI स्कूलों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि वे अपने क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के आदर्श केंद्र बनें। इन स्कूलों में:
सभी छात्रों के लिए स्वागतपूर्ण और देखभाल भरा वातावरण होगा।
सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षिक माहौल होगा।
विविध भाषाओं और पृष्ठभूमियों के छात्रों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाएगा।
छात्रों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।

चुनौती पद्धति द्वारा चयन प्रक्रिया (तीन चरणों में)

1-राज्य/केंद्र शासित प्रदेश केंद्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें इन स्कूलों के लिए गुणवत्ता मानकों को पूरा करने की प्रतिबद्धता होगी।
2-UDISE+ डेटा के आधार पर उन विद्यालयों की एक सूची बनाई जाएगी, जो PM SHRI स्कूलों के रूप में चयन के लिए पात्र होंगे।
3-इन विद्यालयों को चुनौती पद्धति के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी, और शर्तों की पूर्ति की पुष्टि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, KVS और NVS द्वारा भौतिक निरीक्षण के माध्यम से की जाएगी।

PM SHRI स्कूलों की दृष्टि (Vision Statement)

PM SHRI स्कूलों का उद्देश्य देश में शिक्षा के उच्चतम मानक स्थापित करना है।
इन स्कूलों की शिक्षा इस प्रकार होगी कि छात्र:
आजीवन सीखने वाले बनें।
नई चीज़ें सीखने, पुरानी चीज़ें छोड़ने और पुनः सीखने की क्षमता विकसित करें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार एक समान, समावेशी और बहुलवादी समाज के निर्माण में योगदान दें।

PM SHRI स्कूलों का मिशन (Mission Statement)

PM SHRI स्कूलों का लक्ष्य 14,500 से अधिक उदाहरणीय विद्यालय तैयार करना है, जिनमें:
छात्रों को सुरक्षित और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण मिले।
विविध शिक्षण अनुभव प्रदान किए जाएँ।
आधुनिक बुनियादी ढाँचा और उचित संसाधन उपलब्ध हों।

PM SHRI की मुख्य विशेषताएँ

छात्रों को राष्ट्र-निर्माता बनाने के लिए सशक्त करना।
निगरानी तंत्र:
मंत्रालय, राज्य, जिला, BRC, और CRC स्तर पर निगरानी।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा निगरानी।
भविष्य के लिए तैयार नागरिकों को विकसित करना।
हर बच्चे का अद्वितीय आईडी के साथ पंजीकरण।
प्रत्येक छात्र की नामांकन और सीखने की प्रगति का ट्रैक रखा जाएगा।

मधुग्राम योजना उत्तराखंड

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उत्तराखंड सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु मौन पालन योजना
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु मौन पालन योजना

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु मौन पालन योजना (Maun Palan Yojana) शुरू की है। इस योजना के तहत पूरे राज्य में शहद उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जाएगी।

यह योजना उत्तराखंड राज्य बागवानी मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही है। मौन पालन उत्तराखंड योजना के तहत, जो युवा मधुमक्खी पालन के माध्यम से शहद का उत्पादन करेंगे, उन्हें सरकार 80% तक की सब्सिडी प्रदान करेगी।

इस योजना के अंतर्गत विभिन्न जिलों में पंचायत स्तर पर ‘हनी विलेज’ (मधुग्राम) बनाए जाएंगे। यह योजना मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, इसलिए इसे मधुग्राम योजना या मधु विकास योजना भी कहा जाता है।

मौन पालन योजना के माध्यम से उत्तराखंड के 13 जिलों में ग्राम पंचायतों का चयन कर मधुग्राम स्थापित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करके शहरों की ओर पलायन को कम करना और राज्य को शहद उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

वर्तमान स्थिति
वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 7,000 मौन पालक किसान हैं, जो 2200 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन कर रहे हैं। अब इस नई योजना से अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं को मौन पालन से जोड़ा जाएगा और शहद उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार मौन पालकों को 80% तक की सब्सिडी दे रही है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।

योजना के लाभ
प्रत्येक मौन बॉक्स के लिए ₹350 की सहायता।
मौन बॉक्स मौन कॉलोनियों के वितरण पर 50% तक सहायता राशि।
मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण के लिए 100% वित्तीय सहायता।
मधुग्राम योजना के तहत 80% तक सब्सिडी।
प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 4 मौन बॉक्स प्रदान किए जाएंगे।
10 मौन गृह वंशज प्रति व्यक्ति ₹800 की दर से प्रदान किए जाएंगे।
उत्तराखंड में मौन पालन के लिए 7 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के तहत 100% वित्तीय सहायता मिलेगी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु पर एक सप्ताह के लिए ₹1050 का खर्च आएगा।
प्रशिक्षु को ₹350 प्रति सप्ताह मिलेगा और शेष ₹700 सीधे उसके बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।
पात्रता
आवेदन करने के लिए आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति आवेदन कर सकता है।
जो उम्मीदवार पहले से ही खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), NABARD, KVK या अन्य मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्रों से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, वे पात्र होंगे।
ऐसे सभी किसान जो मधुमक्खी पालन कर रहे हैं और उनके पास स्वयं की भूमि है या पंजीकृत लीज पर भूमि है, वे इस योजना के तहत सब्सिडी के लिए पात्र हैं।
आवेदन प्रक्रिया (ऑफलाइन)
आवेदन पत्र डाउनलोड करें।
आवश्यक विवरण भरें।
आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें।
इसे जिला बागवानी कार्यालय में जमा करें।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदन पत्र
आवेदक का निवास प्रमाण (राशन कार्ड / पासपोर्ट / टेलीफोन बिल / बैंक पासबुक / आधार कार्ड)
आवेदक का पहचान प्रमाण (मतदाता पहचान पत्र / पासपोर्ट / आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस)
भूमि स्वामित्व का दस्तावेज (पंजीकृत विक्रय अनुबंध, पट्टा, चिट्टा)
लीज पर ली गई भूमि का पंजीकृत अनुबंध
परियोजना रिपोर्ट (अगले तीन तिमाहियों की अनुमानित आय और व्यय के साथ)
बैंक पासबुक की प्रति
पैन कार्ड
लघु एवं सीमांत किसान प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र
स्वयं घोषणा पत्र
आधार कार्ड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: उत्तराखंड में मौन पालन / मधुग्राम योजना को क्यों बढ़ावा दिया जा रहा है?
उत्तर: उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, जहाँ सालभर फूल खिलते हैं, जिससे यहाँ उच्च गुणवत्ता वाला शहद उत्पादन संभव है।

प्रश्न 2: क्या उत्तराखंड के शहद की अन्य राज्यों में मांग है?
उत्तर: हाँ, उत्तराखंड के शहद की देश के अन्य राज्यों में बहुत अधिक मांग है क्योंकि यहाँ का शहद बहुत उच्च गुणवत्ता का होता है।

प्रश्न 3: एक मौन बॉक्स से कितना शहद प्राप्त होता है?
उत्तर: एक मौन बॉक्स से लगभग 22 किलोग्राम शहद प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 4: योजना के तहत क्या लाभ मिलते हैं?
उत्तर: इस योजना के तहत वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

प्रश्न 5: इस योजना के लिए आयु सीमा क्या है?
उत्तर: 18 से 55 वर्ष के बीच के आवेदक इस योजना के लिए पात्र हैं।

प्रश्न 6: क्या एक परिवार से एक से अधिक व्यक्ति इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
उत्तर: नहीं, एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है।

Source-
https://www.myscheme.gov.in/schemes/mpmsy
https://x.com/ukcmo/status/1901939693740327226

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उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद: वास्तविकता का परीक्षण – डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल

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उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद: वास्तविकता का परीक्षण - डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल

उत्तराखंड सरकार द्वारा फिल्म पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (Uttarakhand Film Development Council)
की स्थापना की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से इस पहल को शुरू किया गया। लेकिन क्या यह परिषद वास्तव में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है, या यह सिर्फ एक औपचारिक घोषणा बनकर रह गई है? इस लेख में हम इन सवालों का विश्लेषण करेंगे।

डॉ. नितिन उपाध्याय कौन हैं?

डॉ. नितिन उपाध्याय उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्हें परिषद की योजनाओं और गतिविधियों के बारे में जानकारी देने के लिए नियुक्त किया गया है।

3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) का क्या हुआ?

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म नीति में 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) को प्राथमिकता दे रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि
क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है? क्या सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों में वास्तविक कार्य किया है? क्या स्थानीय युवाओं को फिल्म उद्योग में अवसर देने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ है?

1. उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (Uttarakhand Film Council) धरातल पर कहां है?

सरकार ने उत्तराखंड को ‘फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन’ बनाने का वादा किया है, लेकिन:

परिषद का कोई भौतिक कार्यालय कहां स्थित है?

क्या इसका कोई निश्चित पता है?

यदि कोई फिल्म निर्माता या निवेशक परिषद से संपर्क करना चाहे, तो वह कहां जाए?

अगर यह परिषद वास्तव में काम कर रही है, तो इसका स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पता होना चाहिए।

2. कोई आधिकारिक वेबसाइट क्यों नहीं है?

आज के डिजिटल युग में हर सरकारी संस्था की अपनी वेबसाइट होती है, जहां से लोग संपर्क कर सकते हैं और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की कोई आधिकारिक वेबसाइट क्यों नहीं है?

यदि वेबसाइट है, तो वह जनता की पहुंच में क्यों नहीं है?

फिल्म निर्माताओं के लिए ऑनलाइन आवेदन या गाइडलाइंस कहां उपलब्ध हैं?

बिना वेबसाइट के, फिल्म निर्माताओं को जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई होगी और यह पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है।

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यदि कोई फिल्म निर्माता या निवेशक परिषद से संपर्क करना चाहे, तो वह कहां जाए?

3. कोई आधिकारिक संपर्क नंबर या व्यक्ति क्यों उपलब्ध नहीं है?

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से संपर्क करने के लिए कोई आधिकारिक फोन नंबर या ईमेल उपलब्ध नहीं है।

फेसबुक पेज पर उपलब्ध नंबर +91 70550 07009 कॉल करने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रहा।

क्या सरकार फिल्म निर्माताओं को सहयोग देने के लिए गंभीर है, या यह केवल घोषणाओं तक सीमित है?

परिषद में मुख्य संपर्क अधिकारी कौन हैं? यदि कोई फिल्म निर्माता किसी समस्या का सामना करता है, तो वह किससे संपर्क करे?

 

4. क्या केवल घोषणाएं और बैठकें ही हो रही हैं?

सरकार और प्रशासन के अधिकारी बैठकें कर रहे हैं और बयान दे रहे हैं, लेकिन असल में क्या हो रहा है?

पुलिस विभाग को फिल्म निर्माताओं की मदद करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन क्या इस पर अमल हो रहा है?

क्या कोई फिल्म निर्माता यह पुष्टि कर सकता है कि उत्तराखंड में शूटिंग की अनुमति आसानी से मिल रही है?

क्या नोडल अधिकारियों की सूची सार्वजनिक की गई है?

बिना सही इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शिता के, सिर्फ घोषणाएं करने से उत्तराखंड फिल्म हब नहीं बन सकता।

5. नई फिल्म नीति 2024 के वादे कितने व्यावहारिक हैं?

सरकार ने नई फिल्म नीति 2024 के तहत अनुदान और अन्य सुविधाओं का वादा किया है:
✅ सिंगल विंडो सिस्टम: दावा किया जा रहा है कि शूटिंग अनुमति आसान कर दी गई है।✅ 30% सब्सिडी: राज्य में होने वाली फिल्मों को कुल बजट का 30% (अधिकतम ₹3 करोड़) अनुदान दिया जाएगा।✅
₹50 करोड़ से ऊपर की फिल्मों को लाभ: विदेशी फिल्मों या बड़े बजट (₹50 करोड़ से अधिक) की फिल्मों को 30% सब्सिडी मिलेगी।

लेकिन असल सवाल यह है:

क्या यह सब्सिडी वाकई में दी जा रही है?

अब तक कितनी फिल्मों ने इसका लाभ उठाया है?

क्या इस बारे में कोई आधिकारिक रिपोर्ट या डेटा सार्वजनिक किया गया है?

6. क्या उत्तराखंड में फिल्म इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है?

फिल्म निर्माण के लिए केवल प्राकृतिक लोकेशन्स ही काफी नहीं होतीं, इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी चाहिए।

क्या उत्तराखंड में कोई फिल्म सिटी विकसित हो रही है?

क्या कोई सरकारी स्टूडियो बनाया जा रहा है?

क्या स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को ट्रेनिंग देने की कोई योजना है?

यदि सरकार उत्तराखंड को वाकई फिल्म हब बनाना चाहती है, तो उसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान देना होगा।

7. क्या सरकार केवल बड़े फिल्म निर्माताओं को ही सुविधा दे रही है?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक प्रकाश झा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहयोग देने की बात कही गई। लेकिन सवाल यह उठता है:

क्या यह सहयोग सिर्फ बड़े फिल्म निर्माताओं तक सीमित रहेगा?

क्या छोटे और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को भी समान सुविधाएं दी जाएंगी?

क्या कोई स्थानीय फिल्मकार इस नई नीति से लाभ उठा सका है?

8. भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उत्तराखंड की भागीदारी

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के 55वें संस्करण में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने गोवा के फिल्म बाजार में भाग लिया।

नॉलेज सीरीज के तहत उत्तराखंड की नई फिल्म नीति 2024 पर चर्चा हुई।

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अभिनेता अनंत महादेवन नारायण ने उत्तराखंड की शूटिंग प्रक्रिया की सराहना की।

अभिनेता अमित सियाल ने नैनीताल में शूटिंग के अपने अनुभव साझा किए और कहा कि वह दोबारा यहां शूटिंग करना चाहेंगे।

अभिनेत्री श्रुति पवार ने उत्तराखंड को “No less than Switzerland” कहा।

ऑस्ट्रेलिया के फिल्म निर्माता अनुपम शर्मा ने घोषणा की कि उनकी आगामी बायोपिक फिल्म का आधा हिस्सा उत्तराखंड में शूट होगा।

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल: 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) सिर्फ बयानबाजी या हकीकत?

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म नीति में 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) को प्राथमिकता दे रही है।
लेकिन सवाल यह उठता है:

क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है?

क्या सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों में वास्तविक कार्य किया है?

क्या स्थानीय युवाओं को फिल्म उद्योग में अवसर देने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ है?

निष्कर्ष: क्या केवल सोशल मीडिया पोस्ट और घोषणाओं से विकास संभव है?

सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब धरातल की हकीकत देखी जाती है, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिलता।

बिना वेबसाइट और संपर्क नंबर के पारदर्शिता का दावा अधूरा है।

बिना ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर के फिल्म हब बनने की बात केवल प्रचार लगती है।

फेसबुक पोस्ट डालने और बैठकों से विकास नहीं होगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस काम करना पड़ेगा।

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क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है? बिना वेबसाइट और संपर्क नंबर के पारदर्शिता का दावा अधूरा है।

यदि उत्तराखंड सरकार वास्तव में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना चाहती है, तो उसे इन मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा और जनता को पारदर्शी तरीके से सभी जानकारियाँ उपलब्ध करानी होंगी।

आपका क्या विचार है? क्या उत्तराखंड सरकार को इन मुद्दों पर और अधिक पारदर्शिता रखनी चाहिए?

उत्तराखंड में सौर ऊर्जा नीति 2023

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Solar Energy Uttarakhand policy 2023 – Key Highlights

उत्तराखंड में सौर ऊर्जा नीति

1. उद्देश्य

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए यह नीति बनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करना और सतत विकास सुनिश्चित करना है।

2. पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया

  • निवेशक और कंपनियां investuttarakhand.uk.gov.in के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम पर आवेदन कर सकते हैं।
  • उरेडा (UREDA) और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा परियोजनाओं की समीक्षा और अनुमोदन किया जाएगा।

3. परियोजना की क्षमता एवं लागत

क्षमता (KW) अनुमानित लागत (रुपए में) वार्षिक विद्युत उत्पादन (KWh)
20 KW 10,00,000 30,400
25 KW 12,50,000 38,000
50 KW 25,00,000 76,000
100 KW 50,00,000 1,52,000
200 KW 1,00,00,000 3,04,000

4. वित्तीय सहायता एवं ऋण प्रावधान

  • परियोजना लागत का 70% ऋण के रूप में उपलब्ध होगा।
  • 30% पूंजीगत सब्सिडी एमएसएमई (MSME) नीति के तहत दी जाएगी।
  • ऋण भुगतान अवधि: 15 वर्ष।
  • वार्षिक ब्याज दर: 8%।

5. राजस्व एवं लाभ

  • सौर ऊर्जा की बिक्री के लिए टैरिफ ₹4.49 प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।
  • वार्षिक राजस्व: ₹1,36,496 (20 KW) से ₹13,64,960 (200 KW) तक।
  • मासिक शुद्ध आय (ऋण भुगतान के बाद): ₹9,700 (20 KW) से ₹1,01,247 (200 KW) तक।

6. आवेदन प्रक्रिया का फ्लोचार्ट

  1. डेवलपर द्वारा आवेदन
  2. UREDA द्वारा समीक्षा एवं UPCL को अग्रेषण (7 दिनों के भीतर)
  3. UPCL द्वारा तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट (TFR) तैयार कर UREDA को भेजना (15 दिनों के भीतर)
  4. यदि TFR सही है, तो कमेटी द्वारा अनुदान (LoA) जारी करना (15 दिनों के भीतर)
  5. UPCL और आवेदक के बीच PPA हस्ताक्षर (10 दिनों के भीतर)
  6. आवेदक द्वारा PPA की प्रति GM, DIC को भेजना (10 दिनों के भीतर)
  7. DCB द्वारा ऋण स्वीकृति (10 दिनों के भीतर)
  8. सौर ऊर्जा संयंत्र का चालू होना (LoA के 12 महीनों के भीतर)
  9. COD के 2 महीनों के भीतर पूंजीगत सब्सिडी का वितरण

7. प्रमुख शर्तें

  • परियोजना स्थल को 100 से 200 मीटर की दूरी पर ट्रांसफार्मर या HT लाइन से जोड़ा जाना चाहिए।
  • भूमि पट्टा या स्वामित्व प्रमाण पत्र आवश्यक।
  • डेवलपर को तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट (TFR) जमा करनी होगी।

8. सब्सिडी एवं अन्य लाभ

  • एमएसएमई इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन।
  • श्रेणी ‘C’ क्षेत्रों में परियोजनाओं को प्राथमिकता।
  • आसान अनुमोदन प्रक्रिया।

यह नीति राज्य में अक्षय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है और पर्यावरणीय स्थिरता को सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

Source

uttarakhand solar power policy 2023

List of projects developed under this scheme

क्या देहरादून में शुरू हुई महिला सारथी स्कीम एक योजना है या सिर्फ एक स्टंट

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से महिला सारथी योजना शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत, महिलाएँ परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

मंत्री रेखा आर्य ने घोषणा करते हुए कहा कि वह स्वयं महिला सारथी योजना की पहली उपयोगकर्ता बनेंगी। योजना के प्रचार-प्रसार के लिए पहले सप्ताह तक महिला चालक मुफ्त सवारी उपलब्ध कराएंगी ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना के बारे में जागरूक हो सकें।

उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं, विधवाओं और परित्यक्त महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि वे अपनी आजीविका अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकें।

इस योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अब तक सीमित थी, लेकिन इस योजना से महिलाएँ इस क्षेत्र में भी अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगी।

इस अवसर पर माननीय विधायक श्री खजान दास, बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, सचिव श्री चंद्रेश यादव, निदेशक श्री प्रशांत आर्य एवं संस्था के निदेशक श्री सौरभ मित्रा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

योजना पर सवाल और संदेह
हालांकि इस योजना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिससे इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।

1. आधिकारिक वेबसाइट अपडेट क्यों नहीं की गई?
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर महिला सारथी योजना से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वेबसाइट का मुख्य पृष्ठ (Home Page) पुराना है और इसमें योजना का कोई उल्लेख नहीं है।

business-news-uttarakhand-uttaranchal-times
“About Us” पृष्ठ पूरी तरह खाली है, जिससे विभाग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

“Contact Us” पृष्ठ पर दिया गया फ़ोन नो काम नहीं कर रहा — 0135-2775814

 


वेबसाइट के कई लिंक काम नहीं कर रहे हैं, जैसे कि:
सहयोग – CSR पोर्टल
CM हेल्पलाइन
उत्कर्ष – मुख्यमंत्री निगरानी डैशबोर्ड
फीडबैक और शिकायतें (PMMVY और समाधान पोर्टल)

2. महत्वपूर्ण प्रश्न जो अनुत्तरित हैं:

योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता क्या होगी?
इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
योजना के लिए बजट कितना निर्धारित किया गया है?
क्या इस योजना का वित्तपोषण किसी कंपनी के CSR फंड से किया जा रहा है? यदि हाँ, तो वह कंपनी कौन सी है?
योजना की सटीक गाइडलाइंस क्या हैं?
सौरव मिश्रा कौन हैं और वे किस संगठन से संबंधित हैं?

यदि इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर नहीं दिए गए, तो यह योजना एक घोटाले की तरह प्रतीत होती है, न कि एक कल्याणकारी योजना।

अधिकारियों से अपील
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य जी तथा संबंधित अधिकारियों से निवेदन है कि इस योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

विशेष रूप से निदेशक श्री प्रशांत आर्य से अनुरोध है कि:

विभागीय वेबसाइट को अपडेट किया जाए।
योजना की सभी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
यदि इन मुद्दों को जल्द सुलझाया नहीं गया, तो यह योजना महिलाओं के लिए लाभकारी साबित होने के बजाय मात्र एक राजनीतिक दिखावा बनकर रह जाएगी।

उत्तराखंड विकास की राह पर : सच या आर. मीनाक्षी सुंदरम मीडिया पॉलिसी ?

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Is Uttarakhand Truly on the Path of Development, or Is It a Media Strategy by Secretary Planning R. Meenakshi Sundaram?
Is Uttarakhand Truly on the Path of Development, or Is It a Media Strategy by Secretary Planning R. Meenakshi Sundaram?

क्या सच में विकास की राह पर है उत्तराखंड? या यह सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम की मीडिया प्रबंधन रणनीति है?

हाल ही में, उत्तराखंड के प्रमुख सचिव नियोजन, आर. मीनाक्षी सुंदरम ने राज्य की आर्थिक प्रगति के
संबंध में कई महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय
और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बेरोजगारी दर में आई कमी
महिलाओं के रोजगार क्षेत्र में प्रतिनिधित्व में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की प्रगति बढ़ोतरी देखी गई है लेकिन क्या ये आंकड़े वास्तव में राज्य के विकास को दर्शाते हैं, या यह मात्र एक मीडिया प्रबंधन प्रयास है?

प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि

प्रमुख सचिव के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय 2,46,178 रुपये थी,
जो 2024-25 में बढ़कर 2,74,064 रुपये होने का अनुमान है, यानी 11.33% की वृद्धि।
यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति को दर्शाती है।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि

राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 2023-24 में 3,32,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर
3,78,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, यानी 46,000 करोड़ रुपये की वृद्धि। यह वृद्धि राज्य की आर्थिक मजबूती को इंगित करती है।

रोजगार के अवसरों में वृद्धि

पिछले दो वर्षों में, राज्य में लगभग 9.31 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें से 6.29 लाख लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं। यह आंकड़ा राज्य में रोजगार के अवसरों में वृद्धि को दर्शाता है।

 

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क्या सच में विकास की राह पर है उत्तराखंड? या यह सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम की मीडिया प्रबंधन रणनीति है?

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की प्रगति

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना, जो 2018 में शुरू की गई थी, उसे 2022 में गति मिली। इस योजना के तहत 2022
में गाइडलाइन्स में बदलाव कर 200 किलोवाट तक की परियोजनाएं लगाने की अनुमति दी गई, जिसके
परिणामस्वरूप 174 मेगावाट की परियोजनाएं धरातल पर उतरने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि,
इस योजना की सफलता को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

सर्वेक्षण की विश्वसनीयता पर संदेह

इस सर्वेक्षण के आधार पर जो आंकड़े पेश किए गए हैं, वह भी संदेह के घेरे में हैं।
यदि यह सर्वेक्षण राज्य योजना आयोग के बदले में अब ‘State Institute for Empowering and Transforming Uttarakhand'(SETU) द्वारा किया गया है, तो इसकी रिपोर्ट उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए थी।लेकिन वेबसाइट पर इस संबंध में कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं मिली है।

 

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डेटा की पारदर्शिता पर सवाल

उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा सचिव द्वारा यह आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं,
लेकिन मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की प्रगति और लाभार्थियों की विस्तृत जानकारी उत्तराखंड
अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) की वेबसाइट पर नहीं मिल रही है। यदि यह योजना वास्तव में सफल है,
तो लाभार्थियों की जानकारी और चल रही परियोजनाओं की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध होनी चाहिए।

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निष्कर्ष

उत्तराखंड विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन सरकारी दावों की सत्यता पर सवाल उठने लगे हैं।
यदि सरकार द्वारा किए गए दावे सही हैं, तो इन्हें तथ्यों के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पारदर्शिता और डेटा की उपलब्धता ही किसी योजना की वास्तविक सफलता को प्रमाणित कर सकती है।
सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम को इन प्रश्नों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए ताकि जनता को सही जानकारी प्राप्त हो सके।

टेहरी में आयोजित कार्यशाला ग्रामीण उद्यम: प्रगति की ओर या मात्र दिखावा?

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टेहरी में आयोजित कार्यशाला ग्रामीण उद्यम: प्रगति की ओर या मात्र दिखावा?

 

दिनांक 07 मार्च 2025 को ग्रामोत्थान रीप परियोजना के अंतर्गत बहुहितधारक मंच/कार्यशाला का आयोजन होटल भरत मंगलम, बौराड़ी, नई टिहरी, जनपद टिहरी गढ़वाल में किया गया।

इस कार्यशाला में एनआरएलएम एवं ग्रामोत्थान रीप परियोजना से जुड़ी 250 ग्रामीण महिलाएं उपस्थित थीं। कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने हेतु विक्रेताओं के साथ राउंड टेबल बैठक आयोजित करना था।

प्रदर्शनी एवं उत्पाद:
इस दौरान ग्रामीण महिलाओं द्वारा निम्नलिखित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया—
✔ चीड पिरूल से बने उत्पाद
✔ प्राकृतिक दालें
✔ धूप, साबुन, शैम्पू
✔ जूट से बने बैग
✔ चीड पिरूल की टोकरियाँ

प्रशासन की भूमिका और सुझाव:
जिलाधिकारी महोदय ने उपस्थित उद्यमियों, विक्रेताओं एवं अधिकारियों को प्रोत्साहित किया और बताया कि—

किसी भी इकाई को स्थापित करना एक लंबी प्रक्रिया होती है, लेकिन सही जानकारी से कम मेहनत में अधिक लाभ संभव है।
चारधाम यात्रा के दौरान ग्रामीण उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए उचित योजना बनाई जानी चाहिए।
स्थानीय उत्पादों के लिए आउटलेट सुनिश्चित करने हेतु मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को प्रस्ताव भेजे जाने चाहिए।
मुख्य अधिकारी एवं प्रतिभागी:
इस कार्यशाला में सीडीओ अभिषेक त्रिपाठी, परियोजना निदेशक डीआरडीए पुष्पेन्द्र सिंह चौहान, जिला विकास अधिकारी मो. असलम, मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डी.के. शर्मा, सरिता जोशी (जिला परियोजना प्रबंधक, ग्रामोत्थान रीप परियोजना) सहित अन्य अधिकारी एवं विक्रेता उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण प्रश्न जो अब भी अनुत्तरित हैं:

  • यदि कोई व्यक्ति चीड पिरूल से बने उत्पाद, प्राकृतिक दालें, धूप, साबुन, शैम्पू, जूट बैग, टोकरियाँ आदि बनाना चाहता है, तो उसे किससे संपर्क करना चाहिए?
  • CDO टिहरी अभिषेक त्रिपाठी से संपर्क करना कठिन है, क्योंकि उन्होंने मेरा मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया है। मेरा “दोष” सिर्फ इतना था कि मैंने उनसे स्किल डेवलपमेंट के बारे में जानकारी चाही थी।
  • BDO कार्यालय से सही व्यक्ति की जानकारी प्राप्त करना, DM ऑफिस से भी ज्यादा मुश्किल है। मैंने चंबा BDO कार्यालय से ग्राम पंचायत नौल्टा (नचोली) के VDO का संपर्क नंबर माँगा था, लेकिन वह भी नहीं मिला।
  • एनआरएलएम अधिकारियों का संपर्क विवरण टिहरी गढ़वाल में कहाँ मिलेगा?
  • जिला परियोजना प्रबंधक एवं ग्रामोत्थान रीप परियोजना जिला टीम की जानकारी कहाँ उपलब्ध है?
  • कलस्टर स्तरीय फेडरेशन का संचालन कौन करता है, और इसका कार्यालय कहाँ स्थित है?
  • अगला कौशल विकास कार्यक्रम या कार्यशाला कब और कहाँ आयोजित होगी?
  • ब्लॉक स्तर पर इन कार्यशालाओं के आयोजन के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
  • जिले में कौशल विकास और व्यवसायिक विकास कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसकी है?
  • राउंड टेबल बैठक का प्रस्ताव किसने रखा, और इसके लिए फंडिंग कहाँ से आई?
  • टिहरी प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट tehri.nic.in पर इन योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी क्यों उपलब्ध नहीं है?

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निष्कर्ष
अगर जिला प्रशासन वास्तव में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और पलायन रोकने के प्रति गंभीर है, तो उन्हें इन प्रश्नों का उत्तर देना होगा
और एक पारदर्शी तंत्र विकसित करना होगा, जिससे लोग आसानी से सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ उठा सकें।
अन्यथा, इस प्रकार की कार्यशालाएँ केवल एक प्रचारात्मक कार्यक्रम बनकर रह जाएँगी और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग साबित होंगी।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर की हवाई यात्रा सुविधा: वास्तविक लाभ या हालिया नीदरलैंड यात्रा की तरह महज़ औपचारिकता?

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वित्त सचिव दिलीप जावलकर की हवाई यात्रा सुविधा: वास्तविक लाभ या हालिया नीदरलैंड यात्रा की तरह महज़ औपचारिकता?

उत्तराखंड सरकार के वित्त और सहकारितने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, समूह क और ख के सरकारी कर्मचारियों को सरकारी कार्यों के लिए हवाई मार्ग से यात्रा की सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा एक वर्ष के लिए लागू रहेगी और इसके प्रभावों का आंकलन करने के बाद समूह ग के कर्मचारियों को भी इसका लाभ देने पर विचार किया जाएगा।

कौन होंगे इस योजना से लाभान्वित?

सरकारी अधिकारी और कर्मचारी – समूह क और ख के कर्मचारी सरकारी खर्चे पर हवाई यात्रा कर सकेंगे।

आवश्यक कार्यों में तेजी – हवाई यात्रा से सरकारी कार्यों में गति आएगी और निर्णय प्रक्रिया में सुधार होगा।

जनता के लाभ की अनिश्चितता – हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उत्तराखंड की आम जनता को इस योजना से सीधे क्या लाभ मिलेगा।

क्या यह योजना जनता के लिए फायदेमंद होगी?

सरकारी अधिकारियों के हवाई यात्रा की सुविधा का सीधा लाभ उत्तराखंड की जनता को कैसे मिलेगा, इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

कुछ प्रमुख सवाल:

क्या इस योजना से सरकारी कार्यों की दक्षता में सुधार होगा?

क्या यह सुविधा राज्य की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगी?

क्या भविष्य में अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलेगी?

क्या सरकार इसे पारदर्शी तरीके से लागू करेगी?

विदेश यात्रा और सहकारिता विभाग पर सवाल

हाल ही में वित्त सचिव दिलीप जावलकर और मंत्री धन सिंह रावत ने नीदरलैंड का दौरा किया, जहाँ विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
इन चर्चाओं में कोऑपरेटिव गवर्नेंस, वैल्यू चेन फाइनेंस, ग्रामीण वाणिज्यिक विकास, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, डेयरी विकास, खाद्य एवं कृषि अनुसंधान जैसे मुद्दे शामिल थे।

हालांकि, इस यात्रा की पूरी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

प्रमुख चिंताएँ:

इस यात्रा का खर्च जनता के पैसे से किया गया, फिर भी इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

किन महत्वपूर्ण निष्कर्षों पर सहमति बनी, इस पर कोई स्पष्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।

क्या इन चर्चाओं से उत्तराखंड के किसानों, उद्यमियों, और सहकारी समितियों को सीधा लाभ मिलेगा?

क्या इस यात्रा के परिणामस्वरूप कोई नई योजनाएँ घोषित की जाएंगी?

क्या सरकार इन विषयों को धरातल पर उतारने के लिए कोई विशेष रणनीति अपनाएगी?

अगर इस यात्रा का उद्देश्य राज्य के कृषि, डेयरी और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करना था,
तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि व्यावहारिक रूप से इन चर्चाओं को कैसे लागू किया जाएगा और जनता को इससे क्या लाभ मिलेगा।

सरकार को पारदर्शिता अपनाने की जरूरत

उत्तराखंड के लोग यह जानने के हकदार हैं कि इस यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं की जानकारी उन्हें कैसे मिल सकती है और सरकार इन विचार-विमर्श को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू करने जा रही है।

महत्वपूर्ण सवाल:

सहकारिता विभाग द्वारा तय की गई योजनाओं की जानकारी जनता तक कैसे पहुंचेगी?

क्या सरकार कोई सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करेगी जिसमें इस यात्रा में हुई चर्चाओं का सारांश होगा?

इन विषयों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

क्या इस यात्रा के परिणामस्वरूप कोई नई योजनाएँ घोषित की जाएंगी?

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी अधिकारियों के लिए हवाई यात्रा सुविधा दी गई है, लेकिन इसका सीधा लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही, विदेश यात्रा से जुड़े सवालों पर भी सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

जब तक सरकार जनता को यह नहीं बताएगी कि नीदरलैंड यात्रा में हुई चर्चाओं से राज्य को क्या लाभ मिलेगा, तब तक यह यात्रा भी अज्ञात, संदिग्ध और बेकार मानी जाएगी, ठीक उसी तरह जैसे हवाई यात्रा सुविधा का लाभ आम जनता को मिलना अनिश्चित है।

जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनकी गाढ़ी कमाई का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और इससे राज्य के विकास को क्या फायदा होगा। सरकार को इस विषय में विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण देना चाहिए।

क्या सम्पर्क योजना के बारे में शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन सही जानकारी प्रदान करेंगे?

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क्या सम्पर्क योजना के बारे में शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन सही जानकारी प्रदान करेंगे?

क्या सम्पर्क योजना के बारे में शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन सही जानकारी प्रदान करेंगे?

कल इंस्टाग्राम पर मैंने एक पोस्ट देखी, जिसमें बताया गया था कि उत्तराखंड सरकार ने “सम्पर्क टीवी स्मार्ट स्कूल” कार्यक्रम को 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के लिए 4,337 सरकारी स्कूलों तक विस्तारित किया है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उद्घाटन समारोह में शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन, सम्पर्क फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष श्री विनीत नायर, अध्यक्ष डॉ. के. राजेश्वरा राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सम्पर्क योजना पर प्रमुख प्रश्न

इस योजना को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहे हैं, जिनका उत्तर अभी तक स्पष्ट नहीं है:

योजना का प्रभाव और पारदर्शिता

2.5 लाख बच्चों को सीधे लाभ पहुंचाने का दावा किस आधार पर किया गया है?

उत्तराखंड में इस परियोजना के प्रभारी अधिकारी कौन हैं?

सम्पर्क योजना की टीम में कितने सदस्य कार्यरत हैं?

उत्तराखंड में इसका मुख्यालय और जिला कार्यालय कहां स्थित हैं?

3,237 प्राथमिक विद्यालयों और 1,100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में योजना का कवरेज किस प्रक्रिया के तहत किया गया?

शिक्षा की गुणवत्ता और तकनीक

स्मार्ट क्लास में पढ़ाया जाने वाला विषयवस्तु क्या है?

इस योजना के तहत कौन-सी अत्याधुनिक तकनीक कक्षाओं में लाई जा रही है?

शिक्षकों को इस नई प्रणाली के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए क्या व्यवस्थाएँ की गई हैं?

सूचना की पारदर्शिता

सम्पर्क योजना की कोई अलग वेबसाइट क्यों नहीं है?

छात्रों के लिए शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

आधिकारिक वेबसाइट (https://schooleducation.uk.gov.in/pages/show/128-contact-us) पर अधूरी जानकारी क्यों उपलब्ध है?

शिक्षकों और हितधारकों के लिए सही और पूर्ण जानकारी प्रदान करना क्या आवश्यक नहीं है?

सम्पर्क दीदी हेल्पलाइन – समस्या समाधान या दिखावा?

सम्पर्क फाउंडेशन द्वारा शुरू की गई “सम्पर्क दीदी हेल्पलाइन” पर कॉल करने पर कोई उत्तर क्यों नहीं मिलता?

यदि शिक्षकों को उचित सहायता नहीं मिलेगी, तो इसका छात्रों की शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उचित कार्रवाई की आवश्यकता

सम्पर्क योजना शिक्षा सुधार के लिए एक अच्छी पहल हो सकती है, लेकिन इसके प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है।
शिक्षा सचिव श्री रविनाथ रमन और अन्य संबंधित अधिकारियों को इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर देने चाहिए ताकि शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को योजना की सटीक जानकारी प्राप्त हो सके।
स्मार्ट क्लासेस के साथ-साथ सही जानकारी प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है। हमें उम्मीद है कि इन मुद्दों को जल्द से जल्द हल किया जाएगा।

 

टीबी मरीजों को गोद लेंगे महाविद्यालयों के शिक्षक: डॉ. धन सिंह रावत की एक अव्यवहारिक योजना

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"College Teachers to Adopt TB Patients: An Impractical Plan by Dr. Dhan Singh Rawat

टीबी मरीजों को गोद लेंगे महाविद्यालयों के शिक्षक: डॉ. धन सिंह रावत की एक अव्यवहारिक योजना

हाल ही में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने एक विवादास्पद बयान दिया कि प्रदेशभर में एनीमिया और टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं निःक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेंगे और उनके उपचार में सहयोग करेंगे। यह योजना न केवल अव्यवहारिक बल्कि गैर-जरूरी भी प्रतीत होती है।

क्या यह योजना तर्कसंगत है?

शिक्षकों और छात्रों का प्राथमिक कार्य शिक्षा प्रदान करना और ज्ञान अर्जित करना होता है, न कि टीबी मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठाना। इस कार्य की जिम्मेदारी राज्य के स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पतालों की होनी चाहिए, न कि शिक्षा संस्थानों की। शिक्षा मंत्री द्वारा इस तरह की योजना लागू करना शिक्षा व्यवस्था को मूल उद्देश्य से भटकाने जैसा है।

शिक्षा मंत्री का बयान और वास्तविकता

शिक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि 2025 तक प्रदेश को टीबी और एनीमिया मुक्त बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। लेकिन असल सवाल यह उठता है कि यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होनी चाहिए, न कि स्कूल और कॉलेजों के शिक्षकों की।

शिक्षा का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए?

  • शिक्षकों और छात्रों को स्वास्थ्य देखभाल में शामिल करने की बजाय, उन्हें कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर केंद्रित करना चाहिए।
  • स्कूलों और कॉलेजों में कौशल विकास (Skill Development) और उद्यमिता (Entrepreneurship Development) को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें।

नीदरलैंड यात्रा से सीख क्यों नहीं ली गई?

यह विडंबना ही है कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत हाल ही में नीदरलैंड के दौरे से लौटे हैं, जहां उन्होंने रबोबैंक मॉडल, डेयरी विकास, ग्रामीण वाणिज्यिक विकास, पुष्पकृषि और आधुनिक कृषि तकनीकों का अध्ययन किया।

लेकिन उत्तराखंड में इन क्षेत्रों में कोई विशेष विकास नहीं हुआ है। यदि मंत्री जी वास्तव में कुछ सार्थक करना चाहते हैं, तो उन्हें सहकारिता विभाग को मजबूत करने, डेयरी विकास और कृषि को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

सरकार की प्राथमिकताएँ सही होनी चाहिए

सरकार को शिक्षा विभाग का उपयोग स्वास्थ्य देखभाल में नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में करना चाहिए। इसके बजाय:

  • कृषि और डेयरी विकास को बढ़ावा दिया जाए।
  • रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
  • राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में छात्रों को जागरूक किया जाए।

निष्कर्ष

टीबी मरीजों की देखभाल एक महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन इसके लिए शिक्षा संस्थानों को जिम्मेदार ठहराना गलत है। यह कार्य स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पतालों को दिया जाना चाहिए। मंत्री जी को चाहिए कि नीदरलैंड में सीखी गई अच्छी नीतियों को उत्तराखंड में लागू करें, न कि शिक्षकों पर गैर-जरूरी जिम्मेदारियाँ थोपें।

सरकार को चाहिए कि सहकारिता, डेयरी विकास, कृषि और ग्रामीण व्यापार को प्राथमिकता दें, ताकि उत्तराखंड के युवाओं को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

 

उत्तराखंड सरकार की 200 करोड़ की ट्राउट फार्मिंग योजना: विकास या ध्यान भटकाने की कोशिश?

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उत्तराखंड सरकार की 200 करोड़ की ट्राउट फार्मिंग योजना: विकास या ध्यान भटकाने की कोशिश?

उत्तराखंड सरकार की 200 करोड़ की ट्राउट फार्मिंग योजना: विकास या ध्यान भटकाने की कोशिश?
Uttarakhand Government’s ₹200 Crore Trout Farming Scheme: Development or a Distraction?

उत्तराखंड सरकार ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है, इस बार ट्राउट मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ट्राउट प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड से पलायन रोकना और मत्स्य क्षेत्र में सतत आजीविका के अवसर प्रदान करना है।

उत्तराखंड में ट्राउट फार्मिंग: एक परिचय

उत्तराखंड का 88% क्षेत्र पहाड़ी और 12% मैदानी है, जो शीतजल मत्स्य पालन के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल है। ट्राउट मत्स्य पालन विशेष रूप से 4000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जिससे यह पहाड़ी क्षेत्रों की स्थानीय आबादी के लिए एक आदर्श व्यवसाय बन जाता है। ट्राउट मछली की बढ़ती मांग और उच्च लाभप्रदता को देखते हुए, सरकार ने इस योजना के माध्यम से इसके उत्पादन को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

योजना का विवरण और कार्यान्वयन रणनीति

ट्राउट प्रोत्साहन योजना को ट्राउट मत्स्य पालन के सतत विकास के लिए तैयार किया गया है, जिसमें एकीकृत रेसवे इकाइयों का निर्माण और सक्रिय मत्स्य पालकों को पांच वर्ष का इनपुट समर्थन प्रदान किया जाएगा। इस योजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

ट्राउट मत्स्य बीज की मांग को पूरा करने के लिए ट्राउट हैचरियों की स्थापना।

मत्स्य पालकों को आवश्यक विपणन उपकरण जैसे डीप फ्रीजर, आइस बॉक्स, और प्लेट आइस मशीन की आपूर्ति।

ट्राउट महासंघ के माध्यम से क्लस्टर आधारित ट्राउट फार्मिंग परियोजनाओं का कार्यान्वयन।

सहकारी क्लस्टर के तहत मछली आहार भंडार, तलछट टैंक और रेसवे का विकास।

सहकारी समितियों को मछली बीज और मछली आहार की आपूर्ति।

मुख्य कार्यान्वयन एजेंसियां और उनकी जिम्मेदारियां

सरकार के बयान में इस योजना के कार्यान्वयन की स्पष्टता की कमी है, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि यह नई योजना है या पहले से चल रही किसी योजना का विस्तार। निम्नलिखित एजेंसियां इस योजना के कार्यान्वयन में शामिल हो सकती हैं:

राज्य मत्स्य विभाग – यह विभाग योजना की निगरानी और उसके सुचारू कार्यान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी निभा सकता है।

राज्य एकीकृत सहकारी विकास परियोजना – यह परियोजना पहले से ही मत्स्य क्षेत्र में व्यक्तियों और सहकारी समितियों को व्यावसायिक मत्स्य पालन से जोड़ने का कार्य कर रही है।

ट्राउट महासंघ – यह सहकारी संघ पहले से ही उत्तराखंड में क्लस्टर आधारित ट्राउट मत्स्य पालन में कार्यरत है।

एफआईडीएफ (मत्स्य और जलकृषि अवसंरचना विकास कोष) – केंद्र सरकार की यह योजना इस परियोजना के वित्त पोषण का प्रमुख स्रोत हो सकती है, जिससे यह केंद्र प्रायोजित योजना बनती है न कि केवल राज्य सरकार द्वारा संचालित योजना।

चुनौतियां और जागरूकता की आवश्यकता

200 करोड़ रुपये के आवंटन के बावजूद, जब तक इस योजना को सही तरीके से प्रचारित नहीं किया जाता और लाभार्थियों को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी जाती, तब तक यह योजना प्रभावी नहीं होगी। इस योजना से संबंधित कुछ प्रमुख चिंताएं निम्नलिखित हैं:

जागरूकता की कमी: मत्स्य पालकों और इच्छुक व्यक्तियों को योजना के लाभ और आवेदन प्रक्रिया के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।

कार्यान्वयन की अस्पष्टता: सरकार ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि यह योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित है या केंद्र द्वारा प्रायोजित।

विभिन्न एजेंसियों की भूमिका: राज्य मत्स्य विभाग, सहकारी विकास परियोजना और ट्राउट महासंघ की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए।

बुनियादी ढांचा और वित्त पोषण: एफआईडीएफ निधियों के उपयोग और इस योजना में उनकी भूमिका को सही ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।

जवाबदेही और मूल्यांकन तंत्र की कमी: जब तक इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय नहीं की जाती और इसके लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र नहीं बनाया जाता, तब तक यह योजना निष्फल हो सकती है या एक घोटाले का रूप ले सकती है।

सरकार को चाहिए पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रणाली

अगर सरकार वास्तव में ईमानदार और पारदर्शी है, तो उसे इस योजना के बारे में स्पष्ट करना चाहिए कि कौन, कैसे और कब इसे लागू करेगा। साथ ही, इसके लिए एक ठोस मूल्यांकन प्रणाली स्थापित करनी चाहिए, जिससे योजना के प्रगति की निगरानी की जा सके और उसमें समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जा सकें।

निष्कर्ष

ट्राउट प्रोत्साहन योजना उत्तराखंड में मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, इसके सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना का सही प्रचार किया जाए, पारदर्शिता बनी रहे और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित की जाए
इस योजना की सफलता के लिए वित्त पोषण प्रणाली, जवाबदेही तंत्र और आवेदन प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट संचार आवश्यक होगा।

Source- https://fisheries.uk.gov.in/

सौरभ बहुगुणा जी, क्या उत्तराखंड के युवाओं की भी चिंता है?

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Saurabh Bahuguna Ji, Do You Also Care About the Youth of Uttarakhand?

 

उत्तराखंड में कौशल विकास और रोजगार विभाग का मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
परंतु वास्तविकता यह है कि यह विभाग अपने उद्देश्य को सही तरीके से पूरा करने में असफल प्रतीत हो रहा है।

“उत्तराखंड की असली ताकत उसकी एकता में है” – पर युवाओं का क्या?

मैं सितारगंज का विधायक हूं और वहां की समस्याओं को उठाना मेरी जिम्मेदारी है। गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान बंगाली समाज पर की गई टिप्पणी को लेकर मैंने विधानसभा अध्यक्ष महोदय को पत्र सौंपा था। पर्वतीय समाज पर हुई असभ्य टिप्पणी पर भी मैंने उसी दिन अफसोस जताया था।
आपका यह कथन कि “उत्तराखंड की असली ताकत उसकी एकता में है, न कि किसी भी तरह के विभाजन में” बिल्कुल सही है, और मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं।

लेकिन सर, बंगाली समुदाय की चिंता करना सराहनीय है, पर क्या आप उत्तराखंड के लाखों युवाओं की भी चिंता करते हैं? अगर आप वास्तव में उत्तराखंड के लोगों की परवाह करते हैं, तो क्या आप विनायक श्रीवास्तव जैसे अधिकारियों की अनियमितताओं से अवगत हैं?

आपका विभाग और उसकी निष्क्रियता
बहुगुणा जी, आप उत्तराखंड के कौशल विकास एवं रोजगार निदेशालय विभाग के मंत्री हैं। यह विभाग युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। लेकिन क्या यह वास्तव में अपने कार्यों को सही तरीके से निभा रहा है?

इस विभाग के अंतर्गत कई कार्यालय कार्यरत हैं, जैसे –

डायरेक्टरेट ऑफ एम्प्लॉयमेंट (हल्द्वानी)
डिप्टी डायरेक्टरेट ऑफ एम्प्लॉयमेंट (देहरादून, लैंसडाउन, अल्मोड़ा)
जिला रोजगार कार्यालय (सभी जिलों में)
टाउन रोजगार कार्यालय (पौड़ी, रामनगर, काशीपुर, हल्द्वानी, रानीखेत)
यूनिवर्सिटी रोजगार ब्यूरो (गुरुकुल कांगड़ी, श्रीनगर, नैनीताल)
परंतु, इन कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी केवल सैलरी, बोनस और छुट्टियों का लाभ उठा रहे हैं, जबकि उत्तराखंड का युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है। इन कार्यालयों की पारदर्शिता और जवाबदेही कहां है?

वेबसाइट और सूचना की कमी

यह बेहद शर्मनाक है कि आपके विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पिछली बार 26 जून 2023 को अपडेट की गई थी। डिजिटल युग में जब हर सरकारी विभाग को पारदर्शिता और सूचना उपलब्ध कराने के लिए तत्पर रहना चाहिए, तब आपके विभाग की वेबसाइट लगभग डेढ़ साल से निष्क्रिय पड़ी है।

केंद्र और राज्य सरकारें कई कौशल विकास योजनाएं चला रही हैं, लेकिन युवाओं तक इसकी जानकारी पहुंच ही नहीं रही।

क्या आपने कभी यह सुनिश्चित किया कि युवाओं को इन योजनाओं के बारे में बताया जाए?
क्या आपने अपने विभाग की वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने के लिए कोई कदम उठाया?

 

उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर ध्यान दें

बहुगुणा जी, बंगाली समाज के मुद्दों पर आपकी चिंता समझी जा सकती है, लेकिन उत्तराखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं की भी चिंता करनी होगी। अगर आप सच में उत्तराखंड की परवाह करते हैं, तो कृपया इन मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाएं –
वेबसाइट को नियमित रूप से अपडेट किया जाए।
युवाओं को रोजगार और कौशल विकास योजनाओं की जानकारी दी जाए।
रोजगार कार्यालयों को जवाबदेह बनाया जाए।
विभागीय अधिकारियों की अनियमितताओं की जांच की जाए।

निष्कर्ष
उत्तराखंड की असली ताकत उसकी एकता में है, लेकिन यह ताकत तभी बनी रह सकती है जब राज्य के युवा आत्मनिर्भर और सशक्त होंगे।

सौरभ बहुगुणा जी, आपसे आग्रह है कि कौशल विकास एवं रोजगार विभाग को सक्रिय करें और उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को अंधकारमय होने से बचाएं।

 

छानी होमस्टे नेटवर्क : उत्तराखंड में होमस्टे व्यवसाय का नया चेहरा

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छानी होमस्टे नेटवर्क होमस्टेज़: उत्तराखंड में होमस्टे व्यवसाय का नया चेहरा

परिचय

उत्तराखंड भारत के सबसे सुंदर और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यहाँ आने वाले यात्री न केवल प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और आतिथ्य का भी अनुभव करना चाहते हैं।
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए छानी होमस्टेज़ की स्थापना की गई, जो एक B2B प्लेटफॉर्म है और होमस्टे मालिकों को उनकी संपत्ति को सूचीबद्ध करने और उसे प्रभावी रूप से विपणन करने में मदद करता है।

छानी होमस्टेज़ का उद्देश्य

छानी होमस्टेज़ का उद्देश्य उत्तराखंड में होमस्टे व्यवसाय को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। हम होमस्टे मालिकों को सही संसाधन और रणनीतियाँ प्रदान करते हैं,
जिससे वे अपने होमस्टे को अधिक से अधिक यात्रियों तक पहुँचा सकें और एक सफल आतिथ्य व्यवसाय बना सकें।

हमारी सेवाएँ

हम होमस्टे मालिकों के लिए शुरुआत से लेकर मार्केटिंग तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं। हमारी प्रमुख सेवाएँ निम्नलिखित हैं:

1. होमस्टे सेटअप परामर्श

एक सफल होमस्टे स्थापित करने के लिए कानूनी औपचारिकताओं से लेकर इंटीरियर डिज़ाइन तक कई आवश्यकताएँ होती हैं। हम निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करते हैं:

कानूनी मार्गदर्शन – होमस्टे पंजीकरण, लाइसेंसिंग और परमिट प्राप्त करने में सहायता।

संपत्ति अनुकूलन – जगह का सही उपयोग, मेहमानों के लिए सुविधाएँ बढ़ाना और डिज़ाइन परामर्श।

वित्तीय योजना – बजट प्रबंधन, निवेश पर लाभ (ROI) की गणना और मूल्य निर्धारण रणनीतियाँ।

2. होमस्टे निर्माण और नवीनीकरण

यदि कोई नया होमस्टे बनाना चाहता है या अपने मौजूदा घर को होमस्टे में बदलना चाहता है, तो हम इसकी संपूर्ण योजना बनाते हैं।

नया निर्माण – आर्किटेक्चरल प्लानिंग और पर्यटक अनुकूल डिज़ाइन।

नवीनीकरण एवं अपग्रेड – पारंपरिक और आधुनिक सुविधाओं के साथ होमस्टे को अपग्रेड करना।

इको-फ्रेंडली निर्माण – स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल होमस्टे तैयार करना।

3. होमस्टे लिस्टिंग और मार्केटिंग

हमारा मुख्य फोकस होमस्टे मालिकों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना है, जिससे उनकी पहुँच अधिक यात्रियों तक हो।

ऑनलाइन लिस्टिंग और ऑप्टिमाइज़ेशन – Airbnb, Booking.com, और Chhani Homestays पर होमस्टे सूचीबद्ध करना।

डिजिटल मार्केटिंग – वेबसाइट निर्माण, सोशल मीडिया प्रबंधन और सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन (SEO)।

प्रचार और साझेदारियाँ – स्थानीय व्यापारियों, ट्रैवल एजेंसियों और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के साथ सहयोग।

4. होमस्टे आवश्यक वस्तुएँ और आपूर्ति

एक आरामदायक प्रवास के लिए सही सुविधाएँ और सजावट आवश्यक होती हैं। हम निम्नलिखित वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं:

फर्नीचर और इंटीरियर – बेड, अलमारी, सोफा और पारंपरिक व आधुनिक सजावट।

आवश्यक सुविधाएँ – टॉयलेटरीज़, लिनन, किचनवेयर और स्वच्छता उत्पाद।

ब्रांडिंग और कस्टमाइज़ेशन – कढ़ाई किए हुए तौलिए, लोगो-मुद्रित स्टेशनरी और वेलकम किट।

छानी होमस्टेज़ क्यों चुनें?

B2B विशेषज्ञता – होमस्टे मालिकों के लिए समर्पित लिस्टिंग और मार्केटिंग सेवाएँ।

स्थानीय अनुभव – उत्तराखंड के पर्यटन और आतिथ्य उद्योग की गहरी समझ।

व्यापक समर्थन – सेटअप से लेकर मार्केटिंग तक हर स्तर पर सहायता।

पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण – सतत पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित।

मजबूत नेटवर्क – मेजबानों और यात्रियों को जोड़ने के लिए एक विश्वसनीय मंच।

निष्कर्ष

छानी होमस्टेज़ उत्तराखंड में होमस्टे व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी और विश्वसनीय मंच प्रदान करता है। यदि आप एक होमस्टे मालिक हैं और अपनी बुकिंग बढ़ाना चाहते हैं, या एक यात्री हैं जो एक यादगार प्रवास की तलाश में हैं, तो चाणी होमस्टेज़ आपके हर कदम पर आपका साथी है।

हर्बल मिशन और वन मंत्री सुबोध उनियाल का बयान – वास्तविकता और सवाल

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हर्बल मिशन और वन मंत्री सुबोध उनियाल का बयान – वास्तविकता और सवाल

हर्बल मिशन और वन मंत्री का बयान – वास्तविकता और सवाल
भूमिका
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में घोषणा की कि वन पंचायत अधिनियम और नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया जारी है, जिससे वन पंचायतों में हर्बल मिशन के तहत औषधीय पौधों की खेती की अनुमति दी जाएगी।
यह मिशन नए वित्तीय वर्ष में शुरू किया जाएगा और इसका उद्देश्य आमजन को वनों से आजीविका के अवसरों से जोड़ना और वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस घोषणा के पीछे कई सवाल उठ रहे हैं, जिनका उत्तर दिए बिना इस योजना की वास्तविकता को समझना मुश्किल होगा।

हर्बल मिशन: एक परिचय

वन एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को आजीविका प्रदान करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने 628 करोड़ रुपये की लागत से हर्बल मिशन शुरू करने की योजना बनाई है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वन पंचायतों की भूमि पर औषधीय पौधों और सुगंधित पादपों की खेती को बढ़ावा देना है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

यह मिशन 500 वन पंचायतों में लागू किया जाएगा।
वन पंचायत अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।
स्थानीय लोगों को वनों की सुरक्षा और संरक्षण से जोड़ने के लिए यह योजना बनाई जा रही है।
महत्वपूर्ण सवाल और चिंताएं
सरकार की इस घोषणा से कई सवाल उठते हैं, जिनके उत्तर दिए बिना यह योजना सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी लगती है।

1. हर्बल मिशन की फंडिंग कहां से आ रही है?

क्या 628 करोड़ रुपये की धनराशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई है, या यह विदेशी बैंकों से लिया गया ऋण है?
यदि यह राज्य सरकार की अपनी योजना है, तो बजट में इसका प्रावधान कहां किया गया है?
2. वन पंचायतों में औषधीय पौधों की खेती के लिए कौन से नियम बनाए गए हैं?
हर्बल मिशन की शुरुआत कब हुई और इसके नियम और दिशानिर्देश क्या हैं?
यह योजना किस विभाग के अधीन होगी, और इसकी निगरानी किस स्तर पर की जाएगी?
क्या इसमें स्थानीय वन पंचायतों और ग्रामीणों की सहमति ली गई है?
3. वन पंचायत अधिनियम में संशोधन का आधार क्या है?
उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम में क्या संशोधन किए जाएंगे?
इन सुधारों से यह योजना कितनी प्रभावी होगी?
क्या इससे वन पंचायतों की स्वायत्तता प्रभावित होगी?
4. हर्बल मिशन से स्थानीय ग्रामीणों को क्या लाभ मिलेगा?
स्थानीय लोगों की भूमिका और अधिकार क्या होंगे?
औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं?
वन संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को जोड़ने के लिए सरकार की रणनीति क्या है?

निष्कर्ष
वन मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा दिया गया यह बयान वर्तमान मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश भी हो सकता है। जब तक सरकार स्पष्ट दिशानिर्देश, कानूनी संशोधन, वित्त पोषण स्रोत और ग्रामीणों की भागीदारी पर ठोस जानकारी नहीं देती, तब तक यह योजना सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा ही मानी जाएगी।

सरकार को चाहिए कि वह:
हर्बल मिशन के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करे।
वन पंचायतों और स्थानीय लोगों को जागरूक करे और उनकी राय ले।
फंडिंग के स्रोत और उपयोग की पूरी पारदर्शिता बनाए।
वन संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की रणनीति प्रस्तुत करे।

जब तक इन सवालों के उत्तर नहीं मिलते, तब तक यह योजना सिर्फ एक वादा बनकर रह जाएगी।

उत्तराखंड में वन-आधारित आजीविका हेतु उत्कृष्टता केंद्र: सतत विकास की दिशा में एक कदम

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(UCOST), established the Centre of Excellence (CoE) on Forest-Based Livelihoods


Uttarakhand Centre of Excellence – CoE-परिचय

उत्तराखंड के वन राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जहां लगभग 80% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए इन पर निर्भर करती है। वन चारे, ईंधन की लकड़ी, जंगली खाद्य पदार्थ, निर्माण सामग्री और औषधीय पौधे प्रदान करते हैं। इसके अलावा, वन कई पहाड़ी फसलों की खेती के लिए सूक्ष्म जलवायु का निर्माण करते हैं। इस प्रकार, वन और उनके उत्पाद वन-सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण आजीविका स्रोत हैं।

गैर-काष्ठ वन उत्पादों (NWFPs) जैसे औषधीय पौधों और बांस की बढ़ती मांग को देखते हुए, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सहयोग से वन-आधारित आजीविका हेतु उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence – CoE) की स्थापना की। यह केंद्र, राज्य में अपनी तरह का पहला है, जो वन-आधारित संसाधनों और सतत आजीविका अवसरों पर अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

उत्कृष्टता केंद्र का उद्देश्य

उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों से बढ़ते पलायन के कारण कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। इस समस्या के समाधान हेतु स्थानीय रोजगार और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना आवश्यक है। उत्कृष्टता केंद्र निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्यरत है:

  • वन एवं घासभूमि संसाधनों का डेटा संग्रह और आजीविका के अवसरों का विश्लेषण।
  • सतत पर्वतीय विकास (Sustainable Mountain Development) को नीतिगत योजनाओं में मुख्यधारा में लाना।
  • वन संसाधनों के सतत दोहन और संरक्षण को बढ़ावा देना।

दृष्टि

वन-आधारित आजीविका पर ज्ञान एवं संसाधन केंद्र के रूप में स्थापित होकर उत्तराखंड में सतत आर्थिक अवसरों को सृजित करना।

उद्देश्य

  1. डेटा संकलन: औषधीय पौधों और बांस सहित गैर-काष्ठ वन उत्पादों से संबंधित जानकारी एकत्र करना और उसका डेटाबेस बनाना।
  2. सामुदायिक सहभागिता: लोगों के साथ केंद्रित समूह चर्चा (FGD) आयोजित कर उनकी वन-आधारित निर्भरता का मूल्यांकन करना।
  3. मूल्य एवं आपूर्ति श्रृंखला विश्लेषण: विभिन्न वन उत्पादों की बाजार क्षमता और आर्थिक मूल्य का आकलन करना।
  4. संसाधन निर्देशिका: वन-आधारित आजीविका के क्षेत्र में कार्यरत सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों, निजी संस्थानों और विशेषज्ञों की जानकारी संकलित करना।
  5. सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण: वन-सीमा गांवों की सांस्कृतिक और आर्थिक निर्भरता का अध्ययन करना।

मुख्य कार्यक्षेत्र

उत्तराखंड के ग्रामीण समुदाय खाद्य, ईंधन और चारे के लिए वन संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर हैं। उत्कृष्टता केंद्र वन-आधारित आजीविका पर डेटा सेट विकसित कर इन संसाधनों की निर्भरता को समझने और गुणवत्ता सुधार के लिए रणनीति तैयार करने का प्रयास कर रहा है। मुख्य कार्यक्षेत्र इस प्रकार हैं:

1. औषधीय पौधे

उत्तराखंड लगभग 700 औषधीय पौधों की प्रजातियों का घर है, जो आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपयोग की जाती हैं।

औषधीय पौधों को उनकी कटाई की स्थिति के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • खुली कटाई: नीम, भृंगराज, गोखरू, तुलसी, धतूरा आदि जैसे पौधों को वनों से स्वतंत्र रूप से एकत्र किया जा सकता है।
  • केवल खेती हेतु: हत्ताजरी, अतीस, कुटकी, बछ, गिलोय, सर्पगंधा आदि पौधों को वनों से एकत्र करने पर प्रतिबंध है और इन्हें किसानों द्वारा उगाया जाना चाहिए।
  • सतत कटाई: हरड़, बहेड़ा, बेल, आंवला, अमलतास, तेजपत्ता आदि को नियंत्रित तरीके से काटने की अनुमति है।

ये पौधे न केवल जड़ी-बूटी उद्योग के लिए एक प्रमुख संसाधन हैं बल्कि ग्रामीण समुदायों के लिए आय और स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्रदान करते हैं।

2. बांस

बांस, जिसे “गरीब आदमी की लकड़ी” कहा जाता है, प्राचीन काल से मानव जीवन का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड में आठ प्राकृतिक रूप से उगने वाली बांस प्रजातियाँ पाई जाती हैं:

  • मोटा बांस: Dendrocalamus strictus, D. somdeviii, D. patellaris और Bambusa bambos (300-1500 मीटर की ऊंचाई पर) – कागज निर्माण और घरेलू वस्तुओं में उपयोगी।
  • रिंगाल (पतला बांस): Drepanostachyum falcatum, Thamnocalamus pathiflorus, T. jaunsarensis और Himalayacalamus falconeri (1500-3500 मीटर की ऊंचाई पर) – टोकरी, चटाई और हस्तशिल्प में उपयोगी।

बांस उत्तराखंड के ग्रामीण जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे आजीविका, रोजगार और घरेलू आय प्राप्त होती है।

3. अन्य वन उत्पाद

औषधीय पौधों और बांस के अलावा, अन्य वन उत्पाद भी आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं:

  • जंगली खाद्य पदार्थ: मशरूम, जामुन, मेवे और फूल, जो मनुष्यों के भोजन और पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
  • ईंधन की लकड़ी और रेशे: खाना पकाने, जलाने और रस्सियों एवं चटाई बनाने में सहायक।
  • गोंद, रेजिन और शहद: व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण उत्पाद।
  • कीड़ा जड़ी: 3500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाने वाला यह औषधीय कवक पिथौरागढ़, चमोली और बागेश्वर जिलों में संग्रहकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बना रहा है।
  • लाइकेन (झूला): इत्र और रंग बनाने में प्रयुक्त होने वाला एक महत्वपूर्ण वन उत्पाद।
  • बहुउद्देशीय वृक्ष: भिमल और खड़क जैसी प्रजातियाँ पहाड़ी क्षेत्रों की संस्कृति और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

परियोजना टीम

  • प्रो. (डॉ.) दुर्गेश पंत – महानिदेशक, UCOST
  • डॉ. अशुतोष मिश्रा – वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, UCOST
  • डॉ. रोमिला चंद्रा – वैज्ञानिक अधिकारी, UCOST
  • डॉ. मोनिका नेगी – वरिष्ठ वैज्ञानिक, CoE
  • श्री सिद्धार्थ नपलच्याल – वैज्ञानिक, CoE

निष्कर्ष

वन-आधारित आजीविका हेतु उत्कृष्टता केंद्र उत्तराखंड में सतत आजीविका अवसरों को बढ़ावा देने के लिए एक अग्रणी पहल है। यह केंद्र अनुसंधान, डेटा संग्रह और सतत संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देकर वन संपदा के संरक्षण और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Source- https://ucost.uk.gov.in/

क्या उत्तराखंड के भाजपा नेता मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं?

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Have Uttarakhand BJP leaders become mentally unstable?
क्या उत्तराखंड के भाजपा नेता मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं?

वरना ऐसे बयान सार्वजनिक रूप से कौन दे सकता है?

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कहते हैं कि बहुगुणा मूल रूप से बंगाल के हैं, और उनके सुपुत्र सौरभ बहुगुणा को भी बंगालियों का दर्द तो दिखता है, लेकिन पहाड़ियों की पीड़ा नहीं।

सुबोध उनियाल का कहना है कि “उनियाल” बिहार के हैं, और प्रेमचंद जी का मत है कि पहाड़ का कोई अपना है ही नहीं, सब राजस्थान और मध्य प्रदेश से हैं।

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट जी का कहना है कि नमो शूद्र बंगालियों को जनजाति का दर्जा मिलना चाहिए, लेकिन जब उत्तराखंड के पर्वतीय समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की बात आती है, तो उनकी चुप्पी साध ली जाती है।

महेंद्र भट्ट जी (राज्यसभा सांसद व भाजपा अध्यक्ष) के अनुसार, पर्वतीय समाज के आक्रोश को दबाने के लिए मुकदमों की धमकी दी जा रही है, लेकिन इसके पीछे छिपे असली मकसद को हमें समझना होगा।

रितु खंडूरी जी (कोटद्वार विधायक व विधानसभा अध्यक्ष) का पहाड़ के विधायकों को अनुचित रूप से डपटना, इस बदलती जनसंख्या संरचना (Demographic Change) का संकेत देता है, जिसे हमें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

वोट बैंक के लालच में ये नेता पहाड़ के मूलनिवासियों को ही बाहरी बताने पर तुले हैं, जबकि बाहर से आए लोग खुद को सदियों से यहां का बताने में लगे हैं।

अब समय आ गया है कि हम उत्तराखंड को जनजाति दर्जा (Tribe Status, Schedule 5) दिलाने के लिए एकजुट हों। यदि संपूर्ण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को जनजाति क्षेत्र घोषित किया जाता है, तो मूल निवास 1950 और एक सख्त भू-कानून स्वतः ही लागू हो जाएगा, जिससे हमारी पहचान और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

आइए, एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ें!

उत्तराखंड विधानसभा में पक्षपात और अपशब्दों पर विवाद

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Bias and Use of Abusive Language in Uttarakhand Vidhan Sabha
Bias and Use of Abusive Language in Uttarakhand Vidhan Sabha

 

उत्तराखंड विधानसभा में एक गंभीर विवाद उस समय खड़ा हो गया जब विधायक लखपत सिंह बुटोला जी ने सदन में पहाड़ों और उत्तराखंडवासियों के प्रति अपमानजनक भाषा के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने न केवल इस अन्यायपूर्ण रवैये की आलोचना की, बल्कि सदन से वॉकआउट भी किया।

स्पीकर की चुप्पी और पक्षपात
जब एक व्यक्ति पहाड़ियों को अपशब्द कह रहा था, तब विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी चुप रहीं, लेकिन जब कोई पहाड़ और उत्तराखंड के सम्मान में बोलने उठा, तो उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया। यह दोहरा रवैया बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।

“डबल इंजन सरकार” और उत्तराखंडियों का अपमान
क्या उत्तराखंड की जनता का अपमान करना राजनीति नहीं, लेकिन उनके हक़ की बात करना राजनीति है? स्पीकर महोदया, यदि आपको आक्रामकता दिखानी थी, तो तब दिखानी चाहिए थी जब आपकी पार्टी के ही एक विधायक ने पहाड़ों और यहां की जनता का अपमान किया था। यह बेहद अफ़सोसजनक है कि आप अपने राजनीतिक हितों को उत्तराखंड से ऊपर रख रही हैं और उन विधायकों को धमका रही हैं जो हमारी आवाज़ उठा रहे हैं।

खंडूड़ी जी की पुत्री से यह उम्मीद नहीं थी
रितु खंडूड़ी जी से यह उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। उनके पिता, भुवन चंद्र खंडूड़ी, उत्तराखंड के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक रहे हैं, जो पृथक राज्य आंदोलन के समर्थक थे। लेकिन उनकी पुत्री आज अपनी ही पार्टी और सत्ता के पक्ष में खड़ी दिख रही हैं, बजाय इसके कि वे पहाड़ और उसकी जनता के पक्ष में खड़ी हों।

“शानदार 2027” में जनता जवाब देगी
उत्तराखंड की जनता अब सब समझ चुकी है। 2027 में इन अहंकारी नेताओं को सबक सिखाया जाएगा। राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है प्रदेश को, और जो लोग विधायक लखपत सिंह बुटोला जी के साथ खड़े नहीं हुए, शायद उन्हें उत्तराखंड के सम्मान के लिए लड़ने की आदत नहीं रही।

उत्तराखंड में असल मुद्दों की अनदेखी
जहां उत्तराखंड के रोजगार, भूमि माफिया, बढ़ते अपराध और पलायन जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां उत्तराखंडियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले प्रेमचंद अग्रवाल को सोचने की जरूरत थी कि वे क्या बोल रहे हैं, और फिर रितु खंडूड़ी जी को देखना चाहिए कि वे कहां बैठी हैं और क्या कर रही हैं।

उत्तराखंड की जनता अब चुप नहीं रहेगी। राजनीति से ऊपर प्रदेश का सम्मान है, और जो भी इस सम्मान को ठेस पहुंचाएगा, जनता उन्हें जवाब देना जानती है।

उत्तराखंड के विकास में सामाजिक और आर्थिक संगठनों की भूमिका |

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उत्तराखंड के विकास में सामाजिक और आर्थिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है । ये संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, कृषि और पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे सकते हैं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों सशक्त बन सकती हैं।
उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए सामाजिक और आर्थिक संगठनों का सहयोग अनिवार्य है। ये संगठन न केवल लोगों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ कर सकते हैं। यदि हम और सामाजिक संस्थाएँ मिलकर कार्य करें,
तो उत्तराखंड को एक विकसित, आत्मनिर्भर और खुशहाल राज्य बनाया जा सकता है।

उत्तराखंड बिज़नेस न्यूज़ नेटवर्क

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उत्तराखंड बिज़नेस न्यूज़ नेटवर्क राज्य के व्यापार, निवेश, स्टार्टअप और उद्यमिता से जुड़ी ताज़ा खबरें प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म स्थानीय उद्योगों, सरकारी योजनाओं, पर्यटन, कृषि, और व्यापारिक अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध कराता है। उत्तराखंड में व्यापारिक संभावनाओं और आर्थिक विकास से जुड़े अपडेट पाने के लिए यह एक भरोसेमंद स्रोत है।

उत्तराखंड पलायन आयोग की भूमिका: पलायन रोकने की दिशा में प्रभावी कदम

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उत्तराखंड ग्रामीण विकास एवं पलायन निवारण आयोग
उत्तराखंड पलायन आयोग की भूमिका: पलायन रोकने की दिशा में प्रभावी कदम

उत्तराखंड पलायन आयोग (ग्रामीण विकास एवं पलायन निवारण आयोग) की स्थापना 2017 में राज्य सरकार द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में हो रहे पलायन के कारणों का अध्ययन करना
और उसे रोकने के लिए प्रभावी समाधान प्रस्तुत करना है। आयोग विशेष रूप से पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर ध्यान केंद्रित करता है।

पलायन रोकने में उत्तराखंड पलायन आयोग की प्रमुख भूमिकाएँ
1. पलायन के कारणों का अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करना
उत्तराखंड पलायन आयोग ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों और गांवों में विस्तृत सर्वेक्षण कर पलायन के प्रमुख कारणों का अध्ययन किया है। आयोग ने अपनी रिपोर्टों में बताया कि पलायन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

रोजगार के अवसरों की कमी
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
बुनियादी ढांचे का विकास न होना
कृषि और पशुपालन में गिरावट
आयोग ने इन समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिससे योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

2. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
पलायन को रोकने के लिए आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ। इसके तहत, आयोग ने निम्नलिखित क्षेत्रों में रोजगार सृजन की संभावनाएँ तलाशी हैं:

पर्यटन और होमस्टे व्यवसाय को बढ़ावा देना
हस्तशिल्प, बागवानी और जैविक खेती को प्रोत्साहन
स्थानीय उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराना
स्वरोजगार योजनाओं को लागू करना
इस दिशा में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं को आयोग के सुझावों के आधार पर लागू किया गया है, जिससे लोग अपने गांवों में ही रोजगार प्राप्त कर सकें।

3. ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास
आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पतालों का विकास किया जाए। इसके परिणामस्वरूप सरकार ने दूरस्थ क्षेत्रों में
अटल आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया और सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नई परियोजनाएँ शुरू कीं।

4. रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देना
आयोग ने प्रवासी उत्तराखंडियों को वापस उनके गांवों में लाने के लिए रिवर्स माइग्रेशन की नीति पर भी कार्य किया है। इसके तहत:

नवीन स्टार्टअप्स और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गांवों में पर्यटन आधारित व्यवसायों को विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
कोरोना महामारी के दौरान वापस लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा गया।

5. प्रवासियों से संवाद और नीतिगत सुधार
आयोग उत्तराखंड के प्रवासी नागरिकों से लगातार संवाद स्थापित कर रहा है और उनकी राय के आधार पर नीतिगत सुधार कर रहा है। आयोग नवाचार और तकनीकी निवेश को भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि राज्य में नई संभावनाएँ उत्पन्न हो सकें।

उत्तराखंड आयोग की उपलब्धियाँ ।

1.पलायन के कारणों का विश्लेषण और डेटा संकलन
उत्तराखंड आयोग की ने राज्य के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन के कारणों का गहन अध्ययन किया है। इसके तहत, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे प्रमुख कारणों की पहचान की गई।
आयोग ने विस्तृत सर्वेक्षणों और अनुसंधानों के माध्यम से पलायन से संबंधित आंकड़े संकलित किए, जो नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।

2.नीतिगत सुझाव और योजनाएँ
आयोग ने पलायन रोकने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक, और दीर्घकालिक योजनाओं के प्रस्ताव दिए हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण, तथा बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।
आयोग के सुझावों के आधार पर राज्य सरकार ने कई योजनाएँ लागू की हैं, जो ग्रामीण विकास में सहायक रही हैं।

3.प्रवासी नागरिकों के साथ समन्वय
आयोग ने राज्य के प्रवासी नागरिकों के साथ संवाद स्थापित किया है, ताकि उनके सुझावों और अनुभवों का लाभ उठाया जा सके। इस पहल से न केवल प्रवासियों की राज्य के विकास में भागीदारी बढ़ी है, बल्कि उनके निवेश और विशेषज्ञता का भी उपयोग हो रहा है।

4.नाम परिवर्तन और कार्यक्षेत्र का विस्तार
2022 में, आयोग का नाम “उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग” से बदलकर “पलायन निवारण आयोग” किया गया। इस परिवर्तन से आयोग के कार्यक्षेत्र में विस्तार हुआ है, जिससे यह पलायन रोकथाम के लिए और अधिक केंद्रित प्रयास कर रहा है।

5.सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग
आयोग ने राज्य सरकार के साथ मिलकर विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, रोजगार के अवसरों की सृजन, और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY) उत्तराखंड

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Mukhyamantri Saur Swarojgar Yojna (MSSY) Uttarakhand
develop sources of income by setting up solar power plants

उद्देश्य

राज्य का अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण वहाँ के निवासियों और किसानों के लिए रोजगार/प्रबंधन के उचित साधनों की कमी है। इसी वजह से किसान अपनी भूमि का सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कृषि भूमि बंजर होती जा रही है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तथा राज्य के बेरोजगार निवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है। यह उन्हें सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके अपनी बंजर भूमि का उपयोग करने और उत्पादित बिजली को यूपीसीएल को बेचकर आय के स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा।

योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  1. स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
  2. कोविड-19 के कारण उत्तराखंड लौटे प्रवासियों, युवा उद्यमियों और छोटे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
  3. पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को रोकना।
  4. बंजर हो रही कृषि भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके आय के साधन विकसित करना।
  5. राज्य में हरित ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना और RPO (Renewable Purchase Obligation) को पूरा करना।
  6. इस योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्रों के साथ-साथ गौ-पालन, फल, सब्जियों और जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहित करना।

योजना का विवरण

  1. इस योजना का नाम “मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना” होगा।
  2. यह योजना पूरे उत्तराखंड राज्य में लागू होगी।
  3. इस योजना के तहत केवल 20/25/50/100/200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की अनुमति होगी।
  4. पात्र व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर या पट्टे पर ली गई भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं।
  5. इस योजना को उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (UREDA) और यूपीसीएल, उद्योग/MSME, तथा उत्तराखंड राज्य/जिला सहकारी बैंक के सहयोग से लागू किया जाएगा।
  6. यह योजना “मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना” के अंतर्गत चलाई जाएगी और इसमें MSME विभाग द्वारा दिए गए अनुदान और अन्य लाभ प्राप्त किए जा सकेंगे।
  7. इस योजना के लिए इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

योजना के लिए पात्रता

  1. यह योजना केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों के लिए मान्य होगी।
  2. 18 वर्ष से अधिक आयु के युवा उद्यमी, ग्रामीण बेरोजगार और किसान इसमें भाग ले सकते हैं।
  3. इस योजना के लिए किसी शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होगी।
  4. प्रत्येक परिवार से केवल एक व्यक्ति को योजना का लाभ मिलेगा।
  5. यदि किसी परिवार के एक से अधिक व्यक्ति आवेदन करते हैं और यह तथ्य बाद में उजागर होता है, तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और जमा की गई सुरक्षा राशि (CPG) जब्त कर ली जाएगी।
  6. पूर्व में संचालित योजनाओं के लाभार्थी भी नए नियमों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

परियोजना के लिए तकनीकी मानक

  1. योजना के तहत 20/25/50/100/200 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
  2. 50 किलोवाट संयंत्र के लिए 750-1000 वर्ग मीटर, 100 किलोवाट के लिए 1500-2000 वर्ग मीटर, और 200 किलोवाट के लिए 3000-4000 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होगी।
  3. 50 किलोवाट संयंत्र की अनुमानित लागत 25 लाख रुपये, 100 किलोवाट की 50 लाख रुपये और 200 किलोवाट की 100 लाख रुपये होगी।
  4. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध सूर्य की रोशनी के अनुसार, 50/100/200 किलोवाट संयंत्रों से प्रति वर्ष 76,000/1,52,000/3,04,000 यूनिट बिजली उत्पन्न की जा सकती है।
  5. उत्पादित बिजली को यूपीसीएल द्वारा 25 वर्षों तक उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा।
  6. मार्च 2026 तक यह दर 4.64 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है।

योजना के अंतर्गत ऋण और अनुमेय लाभ

  1. उत्तराखंड राज्य/जिला सहकारी बैंक द्वारा 8% ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाएगा।
  2. यदि कोई लाभार्थी स्वयं अपने खर्च पर या किसी अन्य बैंक से ऋण लेकर संयंत्र स्थापित करता है, तो उसे MSME नीति/योजना के तहत अनुमेय अनुदान और सब्सिडी प्राप्त होगी।
  3. MSME नीति के अनुसार स्टांप शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी।
  4. संयंत्र स्थल पर मधुमक्खी पालन और स्थानीय सब्जियों व जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  5. परियोजना स्थापना के लिए UREDA पात्र फर्मों का चयन करेगी।

आवेदन और चयन प्रक्रिया

  1. आवेदन उद्योग विभाग द्वारा संचालित MSY-MSME ऑनलाइन पोर्टल (https://msy.uk.gov.in) पर आमंत्रित किए जाएंगे।
  2. आवेदन के साथ 50/100 किलोवाट के लिए 2000 रुपये और 200 किलोवाट के लिए 5000 रुपये आवेदन शुल्क (GST सहित) जमा करना होगा।
  3. प्रत्येक जिले में परियोजना की तकनीकी जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी।
  4. परियोजना आवंटन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति निर्णय लेगी।
  5. यूपीसीएल द्वारा तकनीकी रूप से उपयुक्त पाए गए आवेदनों का चयन किया जाएगा।
  6. आवंटित परियोजना के लिए लाभार्थी को सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के माध्यम से आवश्यक स्वीकृतियाँ प्राप्त करनी होंगी।

अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

  1. ग्रिड कनेक्शन, बिजली उत्पादन, और संयंत्र स्थापना की तकनीकी आवश्यकताएँ MNRE, भारत सरकार एवं उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगी।
  2. परियोजना की अवधि 25 वर्ष होगी, और इस अवधि के दौरान संयंत्र का स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
  3. MSME नीति के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए केवल एकल स्वामित्व (Proprietorship) स्वीकार्य होगी।
  4. अनुबंध निष्पादन गारंटी (CPG) के रूप में 50 किलोवाट के लिए 25,000 रुपये, 100 किलोवाट के लिए 50,000 रुपये और 200 किलोवाट के लिए 1,00,000 रुपये UREDA कार्यालय में जमा करने होंगे।
  5. परियोजना को 12 महीने के भीतर स्थापित करना अनिवार्य होगा।
  6. परियोजना स्थापित करने के पश्चात MSME-2023 के तहत प्रोत्साहन एवं लाभ प्राप्त करने के लिए https://investuttarakhand.uk.gov.in पर पूर्व स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होगा।

Source:
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY) उत्तराखंड
https://msy.uk.gov.in/

 

उत्तराखंड की राजनीति में नई उम्मीद: बॉबी पंवार

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A New Hope in Uttarakhand Politics: Bobby Panwar
A New Hope in Uttarakhand Politics: Bobby Panwar

उत्तराखंड की राजनीति में नई उम्मीद: बॉबी पंवार

बॉबी पंवार उत्तराखंड की राजनीति में एक उभरते हुए युवा नेता के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। अपनी दमदार सक्रियता और युवाओं की बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण वे सुर्खियों में आए हैं।

शुरुआती जीवन और शिक्षा
बॉबी पंवार का जन्म देहरादून के चकराता तहसील स्थित लखमंडल गांव में हुआ था। वे एक किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) और बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की पढ़ाई की है। शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शिता की मांग को लेकर संघर्ष करना शुरू किया।

बेरोजगारी आंदोलन से राजनीति तक का सफर
2018 में, बॉबी पंवार उत्तराखंड बेरोजगार संघ से जुड़े और अपनी नेतृत्व क्षमता के कारण जल्दी ही इसके अध्यक्ष बने। उनका सबसे बड़ा आंदोलन फरवरी 2023 में देखने को मिला, जब उन्होंने हजारों युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक मामलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर देहरादून में बड़ा प्रदर्शन किया।

यह आंदोलन हिंसक हो गया और पुलिस ने बॉबी पंवार समेत कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस घटना ने उन्हें एक युवा नेता के रूप में पहचान दिलाई और बेरोजगार युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

लोकसभा चुनाव 2024: राजनीति में नई शुरुआत
बॉबी पंवार ने 2024 लोकसभा चुनाव में टिहरी गढ़वाल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। संसाधनों की कमी और किसी बड़े राजनीतिक दल का समर्थन न होने के बावजूद उन्होंने 1.68 लाख (लगभग 19.5%) वोट प्राप्त किए।

हालांकि, वे चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मतों का मिलना यह दर्शाता है कि वे जनता के बीच एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

विवादों से भी रहा नाता
बॉबी पंवार का राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा है। नवंबर 2024 में, वे एक विवाद में फंस गए, जब उन पर उत्तराखंड सचिवालय में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से मारपीट करने का आरोप लगा।
इस घटना के बाद, प्रशासनिक अधिकारियों ने सचिवालय के कामकाज का बहिष्कार किया और इसका पूरे प्रदेश में व्यापक असर देखने को मिला।

भविष्य की राजनीति और योजनाएँ
बॉबी पंवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने राजनीतिक संघर्ष को आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने आगामी विधानसभा उपचुनाव और नगर निकाय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। वे युवाओं के रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रणाली और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखना चाहते हैं।

निष्कर्ष
बॉबी पंवार का राजनीतिक सफर दिखाता है कि अगर कोई व्यक्ति जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाए, तो वह बिना किसी बड़े राजनीतिक समर्थन के भी मजबूत पहचान बना सकता है। उत्तराखंड में युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में वे राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

27 Essential Marketing Principles from Philip Kotler-the father of Modern Marketing

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Lessons from Philip Kotler, the father of Modern Marketing, to apply to your Online Marketing Strategies-Uttaranchal times
Lessons from Philip Kotler, the father of Modern Marketing, to apply to your Online Marketing Strategies-uttaanchal times

27 Essential Marketing Principles from Philip Kotler-the father of Modern Marketing

1- “You should never go to the battlefield before having won the war on paper. The good news is that you can learn Marketing in an hour. The bad news, it takes a lifetime to perfect it”.

2- “Marketing is not the art of finding ingenuous ways to exhibit what you do. Marketing is the art of creating genuine value before your clients and helping them to improve. The keywords of Marketing are “Quality”, “Service” and “Value”.

3- “Every business is a service business. You’re not a chemical company. You’re a company of chemical services. Does your service presentation make your clients smile?

4- “The sales department is not the entire company, but the entire company should be the sales department”.

5- “The best advertisement constitute satisfied clients”.

6- “Companies pay too much attention to the cost of something. They should be more worried about the cost of doing nothing”.

7- “Successful sellers are concerned with the client first and the products later”.

8- “Good companies will satisfy needs; excellent companies will create markets”.

9- “The best form of retaining clients is to constantly analyze how to give them more for less”.

10- “It’s more important to do what is strategically correct than what is immediately profitable”.

11- “There is only one winning strategy: it is cautiously defining a target market and pushing a superior offer towards this market”.

12- “The most important thing is predict where clients are going and stop right in front of them”.

13- “Poor companies ignore their competitors, average companies imitate their competitors and winning companies lead their competitors”.

14- “During the past 60 years, marketing focused itself on the product (Marketing 1.0) centered itself on the consumer (Marketing 2.0). Now we’re seeing how Marketing is being transformed once more in response to the new dynamics of the environment”.

“We observe companies that increase their focus from products to consumers and then towards the problems of humanity. Marketing 3.0 is the stage in which companies evolve from focusing on the consumers to focusing on humanity and where the earnings are balanced with corporate responsibility”.

15- “Marketing is a race without a finish line”.

16- “Now days you have to run much faster to stay in the same spot”.

17- “The intelligent marketers of today don’t sell products, they sell benefits packets. Not only do they sell purchase value but also usage value”.

18- “The key to branding (Brand-building), especially for small companies, is to focus on a limit number of areas in the sector and develop a superior expertise in said areas”.

19- “The future is not ahead of us. It has already happened”.

20- “Every company should work hard to make their own line of products obsolete before their competition does”.

21- “Don’t buy market actions. Discover how to earn them”.

22- “The Internet will make the winners bury the stragglers”.

23- “Marketing is the collection of human activities aimed at facilitating and consummating exchanges”.

24- “Marketing is the task we perform before creating a product. If three years is spent developing a product, then it won’t be the correct product”.

25- “Market analysis is the evolution of trying to maximize the company’s earnings for each transaction, to maximize the earnings of each relationship in the long term”.

26- “The cost is not important for establishing the Price. It only serves for knowing if you should or shouldn’t fabricate the product”.

27- “The future of Marketing resides in marketing databases, through which we know enough about each client to make relevant and personalized offers to each one of them”.

Sources

https://postcron.com/

27 Lessons from Philip Kotler, the father of Modern Marketing, to apply to your Online Marketing Strategies

टीम वर्क को सफल बनाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियाँ

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Practical approaches for more effective teamwork
Practical approaches for more effective teamwork- on uttarakhand business news network

यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं जो टीम वर्क को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं:

  • श्रेय दें, ज़िम्मेदारी लें (Give credit, take responsibility): अपनी सफलताओं और गलतियों दोनों के लिए ज़िम्मेदारी स्वीकार करें। दूसरों को उनकी उपलब्धियों के लिए श्रेय देना न भूलें।

  • समय-सीमा पर सहमत हों (Get aligned on timeframes): परियोजना की समय-सीमा और महत्वपूर्ण मील के पत्थरों पर टीम के साथ मिलकर सहमति बनाएं।

  • एक विशिष्टता पर ज़ोर दें, लिखें, सुधारें (Insist on a spec, write one, improve it): परियोजना की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। एक लिखित विनिर्देश तैयार करें और आवश्यकतानुसार उसमें सुधार करते रहें।

  • बजट पर सहमत हों (Agree on a budget): परियोजना के लिए बजट निर्धारित करें और उस पर टीम के साथ सहमति बनाएं।

  • कैलेंडर रखें (Keep a calendar): समय-सीमा, मीटिंग और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को ट्रैक करने के लिए एक कैलेंडर का उपयोग करें।

  • मन में बैर न रखें (Don’t hold a grudge): छोटी-छोटी बातों को भूल जाएं और आगे बढ़ें।

  • स्पष्ट रूप से और उदारता से बोलें (Speak up clearly and generously): अपनी राय और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, और दूसरों की बात ध्यान से सुनें।

  • अपना काम दिखाएँ (Show your work): अपने काम को दूसरों के साथ साझा करें और उनसे प्रतिक्रिया प्राप्त करें।

  • अपने डर साझा करें (Share your fears): अपनी चिंताओं और आशंकाओं को टीम के सदस्यों के साथ साझा करें।

  • वादे करें और उन्हें निभाएं (Make promises and keep them): जो वादे करें उन्हें पूरा करें।

  • पढ़ें (Do the reading): परियोजना से संबंधित आवश्यक सामग्री और दस्तावेज़ पढ़ें।

  • लोगों के बारे में तभी बात करें जब वे कमरे में हों (Talk about people only when they’re in the room): गपशप से बचें।

  • किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढें जो आपसे अधिक कुशल हो (Eagerly find someone more skilled than you to do a given piece of work): यदि किसी कार्य को करने के लिए आपसे अधिक कुशल व्यक्ति उपलब्ध है, तो उसे सौंपने में संकोच न करें।

  • जानकारी को न छिपाएँ (Don’t hoard information): टीम के सदस्यों के साथ जानकारी साझा करें।

  • अपने और दूसरों के कॉफी मग धोएँ (Wash your own coffee mugs, and someone else’s too): छोटे-छोटे काम करके टीम के सदस्यों की मदद करें।

  • सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करें, निजी तौर पर आलोचना करें (Celebrate in public, criticize in private): दूसरों की उपलब्धियों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करें, और यदि कोई आलोचना करनी हो तो उसे निजी तौर पर करें।

  • मीटिंग में न छुपें (विशेषकर जिन्हें आप बुलाते हैं) (Don’t hide in meetings (especially the ones you call)): मीटिंग में सक्रिय रूप से भाग लें।

  • जब आप सुनिश्चित न हों, तो पूछें (When you’re not sure, ask): यदि आपको किसी बात के बारे में संदेह है, तो पूछने में संकोच न करें।

  • स्पष्ट होने के लिए आपने जो सुना उसे दोहराएँ (Say back what you heard to be clear you understand): सुनने को समझने के लिए जो सुना उसे दोहराएँ।

  • देर न करें (Don’t be late): समय पर रहें।

  • कृपया और धन्यवाद कहें (Say please and thank you): शिष्टाचार का पालन करें।

  • गरिमा खोजें और प्रदान करें (Find and offer dignity): दूसरों के साथ सम्मान से पेश आएं।

  • क्या होगा अगर पूछें (Ask what if): विभिन्न संभावनाओं पर विचार करें।

  • क्यों पूछें (Ask why): चीजों के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करें।

  • धमकाने वालों को बर्दाश्त न करें (Don’t tolerate bullies): यदि कोई आपको धमका रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं।

  • जब अकेले काम बेहतर हो, तो ज़ोर दें। अन्यथा, मदद करें या मदद के लिए पूछें… (When solo work is better, insist. Otherwise, pitch in or ask for help…): यदि कोई काम अकेले बेहतर तरीके से किया जा सकता है, तो उसे अकेले करें। अन्यथा, टीम के सदस्यों की मदद करें या यदि आपको मदद की ज़रूरत है तो पूछें।

  • जिन लोगों पर आप विश्वास करते हैं उनका ईमानदारी से उत्साह के साथ समर्थन करें (Support the people you believe in with honest enthusiasm): अपने सहकर्मियों का समर्थन करें।

  • अपनी टीम को सावधानी से चुनें, एक बार जब आप कर लें तो निवेश करें (Pick your team with care, invest once you do): अपनी टीम के सदस्यों को सोच-समझकर चुनें और उन पर विश्वास करें।

  • लगातार बेहतर की तलाश करें (Relentlessly seek better): हमेशा सुधार के लिए प्रयास करें।

Source-Seth Godin- Seth is an entrepreneur, best-selling author, and speaker.
Practical approaches for more effective teamwork
https://seths.blog/

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना

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प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना
कौशल विकास, आय सृजन योजनाओं और अन्य पहलों के माध्यम से अतिरिक्त रोजगार अवसरों का सृजन करके अनुसूचित जाति समुदायों की गरीबी को कम करना।

योजना के उद्देश्य:

कौशल विकास, आय सृजन योजनाओं और अन्य पहलों के माध्यम से अतिरिक्त रोजगार अवसरों का सृजन करके अनुसूचित जाति समुदायों की गरीबी को कम करना।
अनुसूचित जाति बहुल गांवों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा और आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना।
गुणवत्तापूर्ण संस्थानों के साथ-साथ आवश्यक आवासीय विद्यालयों में, विशेषकर आकांक्षी जिलों/अनुसूचित जाति बहुल ब्लॉकों और भारत में अन्यत्र आवासीय सुविधाएं प्रदान करके अनुसूचित जातियों की साक्षरता बढ़ाना और स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में उनके नामांकन को प्रोत्साहित करना।
वर्तमान स्थिति:

राज्यों को अपनी वार्षिक कार्य योजना (एएपी) ऑनलाइन मोड में वेब-पोर्टल https://pmajay.dosje.gov.in के माध्यम से जमा करनी होगी।
राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल राज्यों के प्रधान सचिव के ईमेल पर भेज दिए गए हैं।
प्रत्येक स्तर (राज्य/जिला) के लिए दो आईडी हैं। एक परियोजनाओं के निर्माण के लिए और दूसरा उनकी स्वीकृति के लिए।
परियोजनाओं के निर्माण के लिए विकेंद्रीकृत योजना का उपयोग किया जाएगा।
पृष्ठभूमि:

समय के साथ सरकार ने अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है। पहलों का उद्देश्य शैक्षिक विकास के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण; आय और रोजगार बढ़ाने वाले रास्ते और अनुसूचित जाति बहुल गांवों के एकीकृत विकास के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण; सुरक्षात्मक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन और मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसे व्यवसायों के उन्मूलन के माध्यम से सुरक्षा; और इन समूहों की जनसंख्या के अनुपात में धन के चिह्नांकन के माध्यम से समग्र विकास करना है।

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली देश की आबादी का प्रमुख हिस्सा बनाने वाले अनुसूचित जाति व्यक्तियों (एससी) के विकास के लिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 1980 में “अनुसूचित जातियों उप योजना (एससीएसपी) के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए)” की केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अनुसूचित जाति उप योजना (एससीएसपी) तैयार करें और इस योजना ने केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता के रूप में आवश्यक उत्प्रेरक प्रदान किया। योजना के तहत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को उनके अनुसूचित जाति उप योजना (एससीएसपी) के अतिरिक्त अनुदान दिया जा रहा है।

मौजूदा योजना के उद्देश्य:

योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न आय सृजन योजनाओं, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से लक्षित आबादी की आय में वृद्धि करना है।
लक्षित आबादी के बीच गरीबी को कम करना और उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाना।
योजना के घटक:

आय सृजन योजनाएं:
अनुसूचित जातियों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देना।
प्रति लाभार्थी 10000/- रुपये की सब्सिडी या ऋण का 50%।
कौशल विकास कार्यक्रम:
प्रशिक्षण के माध्यम से क्षमता निर्माण को बढ़ाना।
राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण।
बुनिया ढांचा विकास:
अनुसूचित जाति बहुल गांवों में विकास कार्यक्रम।
समग्र विकास में महत्वपूर्ण कमियों को भरना।
निगरानी और मूल्यांकन:
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कुल अनुदान सहायता का 4% तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एससीए निधियों के समर्थन से कार्यान्वित आर्थिक विकास योजनाओं की निगरानी, ​​निगरानी और मूल्यांकन के लिए उपयोग किया जा सकता है।
राज्य अनुसूचित जाति निगम को विभिन्न प्रशासनिक खर्चों के लिए सहायता प्रदान करने के लिए, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश निगरानी, ​​निगरानी और मूल्यांकन के लिए अनुमेय व्यय के भाग के रूप में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कुल एससीए का 1% तक खर्च कर सकते हैं।
पात्रता मापदंड:

गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति के व्यक्ति विभिन्न आय सृजन योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।
बुनियादी ढांचा विकास के मामले में, 50% या अधिक अनुसूचित जाति आबादी वाले गांव योजना के तहत अनुदान के लिए पात्र हैं।
गरीबी रेखा की परिभाषा और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति परिवारों के चयन के संबंध में, पूर्व योजना आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों और पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से लाभार्थियों के चयन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है।

 

उत्तराखंड में शिक्षा और कौशल विकास: एक नई दिशा

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Education & Skill Development
Uttarakhand Education & Skill Development

उत्तराखंड, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार और विभिन्न संस्थान युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

शिक्षा

उत्तराखंड में शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने शिक्षा को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

  • सरकारी स्कूल: राज्य में कई सरकारी स्कूल हैं जो छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करते हैं।
  • निजी स्कूल: निजी स्कूलों की संख्या भी बढ़ रही है, जो विभिन्न बोर्डों (सीबीएसई, आईसीएसई) से संबद्ध हैं।
  • उच्च शिक्षा: उत्तराखंड में कई विश्वविद्यालय और कॉलेज हैं जो विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करते हैं। इनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, आदि शामिल हैं।
  • तकनीकी शिक्षा: राज्य में कई पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थान हैं जो तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

कौशल विकास

कौशल विकास उत्तराखंड सरकार की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए कई कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

  • कौशल विकास मिशन: उत्तराखंड कौशल विकास मिशन के तहत युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • आईटीआई: आईटीआई संस्थानों में विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • प्लेसमेंट: कई संस्थान छात्रों को प्लेसमेंट सहायता भी प्रदान करते हैं।

चुनौतियां

उत्तराखंड में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं।

  • दूरस्थ क्षेत्र: राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास सुविधाओं की कमी है।
  • शिक्षकों की कमी: कुछ क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है।
  • रोजगार: युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है।

भविष्य की दिशा

उत्तराखंड सरकार शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: सरकार का लक्ष्य सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
  • कौशल विकास: युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • ऑनलाइन शिक्षा: ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को भी शिक्षा मिल सके।

उत्तराखंड में शिक्षा और कौशल विकास का भविष्य उज्जवल है। सरकार और विभिन्न संस्थानों के प्रयासों से राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

उत्तराखंड रियल एस्टेट: रुझान और अंतर्दृष्टि

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uttarakhand property
uttarakhand property

उत्तराखंड, जिसे “देवभूमि” के रूप में जाना जाता है, रियल एस्टेट निवेश के लिए एक आशाजनक गंतव्य के रूप में उभरा है। इसकी मनोरम सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और बढ़ते बुनियादी ढांचे के कारण, राज्य ने निवेशकों, घर खरीदारों और डेवलपर्स को आकर्षित किया है। उत्तराखंड का रियल एस्टेट क्षेत्र पर्यटन, द्वितीय-गृह खरीदारों और बुनियादी ढांचा विकास द्वारा संचालित स्थिर वृद्धि देख रहा है।

प्रमुख रियल एस्टेट हब

  1. देहरादून – राजधानी शहर अपनी सुखद जलवायु, अच्छी कनेक्टिविटी और शैक्षिक संस्थानों, आईटी पार्कों और वाणिज्यिक हब के विकास के कारण एक प्रमुख रियल एस्टेट गंतव्य है। राजपुर रोड, मसूरी रोड और सहस्रधारा रोड जैसे इलाके आवासीय और वाणिज्यिक निवेश के लिए लोकप्रिय हैं।
  2. हरिद्वार और ऋषिकेश – प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र होने के कारण, ये शहर होटल, गेस्ट हाउस और आश्रमों के माध्यम से किराये की आय की तलाश करने वाले निवेशकों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, गेटेड कम्युनिटी और वेलनेस रिट्रीट्स बढ़ रही हैं।
  3. नैनीताल और भीमताल – ये हिल टाउन अवकाश गृहों और रिसॉर्ट्स के लिए हॉटस्पॉट हैं। अवकाश गृहों की बढ़ती मांग ने संपत्ति की सराहना को बढ़ावा दिया है।
  4. मसूरी – ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के रूप में प्रसिद्ध मसूरी, पर्यटकों और सेवानिवृत्त लोगों को पूरा करने वाले लक्जरी विला और बुटीक होटलों के लिए पसंदीदा बनी हुई है।
  5. हल्द्वानी – कुमाऊं का वाणिज्यिक केंद्र होने के नाते, हल्द्वानी तेजी से शहरीकरण का अनुभव कर रहा है, जिसमें आवासीय अपार्टमेंट और वाणिज्यिक स्थानों की बढ़ती मांग है।

उत्तराखंड की रियल एस्टेट वृद्धि को बढ़ावा देने वाले कारक

  • पर्यटन और आतिथ्य: राज्य के संपन्न पर्यटन उद्योग ने होटलों, रिसॉर्ट्स और होमस्टे की मांग को बढ़ा दिया है।
  • कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: उन्नत सड़क नेटवर्क, रेल लिंक और देहरादून में जोली ग्रांट हवाई अड्डे के विस्तार ने रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा दिया है।
  • द्वितीय-गृह निवेश: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और अन्य क्षेत्रों के कई निवेशक अवकाश गृहों या सेवानिवृत्ति रिट्रीट के लिए संपत्तियां खरीद रहे हैं।
  • सरकारी नीतियां: उत्तराखंड सरकार ने गैर-निवासियों के लिए भूमि खरीद मानदंडों में ढील दी है, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश आकर्षित हो रहा है।
  • शैक्षिक और स्वास्थ्य सुविधाएं: प्रतिष्ठित स्कूलों, विश्वविद्यालयों और अस्पतालों के उदय ने राज्य के रियल एस्टेट उछाल में योगदान दिया है।

चुनौतियां और विचार

  • भूमि विनियम: कुछ क्षेत्रों में भूमि खरीदने के लिए, विशेष रूप से गैर-निवासियों के लिए, राज्य कानूनों का पालन करना आवश्यक है।
  • पर्यावरणीय चिंताएं: नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए, रियल एस्टेट परियोजनाओं को पारिस्थितिक क्षति को रोकने के लिए पर्यावरणीय नियमों का पालन करना होगा।
  • मौसमी मांग: पहाड़ी स्टेशनों में संपत्तियों की मांग मौसमी रूप से उतार-चढ़ाव करती है, जिससे किराये की आय की स्थिरता प्रभावित होती है।

भविष्य की दृष्टि

उत्तराखंड का रियल एस्टेट बाजार निवेशकों और डेवलपर्स से बढ़ती रुचि के साथ स्थिर वृद्धि के लिए तैयार है। पर्यावरण-अनुकूल आवास, प्रीमियम विला और आतिथ्य परियोजनाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, देहरादून में स्मार्ट सिटी विकास और बेहतर कनेक्टिविटी परियोजनाएं बाजार की संभावनाओं को और बढ़ाएंगी।

जो निवेशक दीर्घकालिक लाभ की तलाश में हैं, उनके लिए उत्तराखंड आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट दोनों में एक आकर्षक अवसर प्रस्तुत करता है। सही योजना और स्थानीय नियमों की समझ के साथ, उत्तराखंड में निवेश एक लाभदायक उद्यम हो सकता है।

उत्तराखंड के स्कूल/कॉलेज छात्रों के लिए छोटे व्यवसाय के टिप्स

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उत्तराखंड के स्कूल/कॉलेज छात्रों के लिए छोटे व्यवसाय के टिप्स
उत्तराखंड के स्कूल और कॉलेज छात्रों के लिए छोटे व्यवसाय शुरू करना एक शानदार तरीका है

उत्तराखंड के स्कूल और कॉलेज छात्रों के लिए छोटे व्यवसाय शुरू करना एक शानदार तरीका है अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कुछ कमाई करने और अनुभव हासिल करने का। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:

1. अपनी रुचियों और कौशल का पता लगाएं (Identify Your Interests and Skills):

  • आपकी हॉबी क्या हैं? (What are your hobbies?)
  • आप किन चीजों में अच्छे हैं? (What are you good at?)
  • क्या आप कुछ सिखा सकते हैं? (Can you teach something?)
  • क्या आप कुछ बना सकते हैं? (Can you create something?)

अपनी रुचियों और कौशल के आधार पर एक व्यवसाय विचार चुनें।

2. छोटे स्तर से शुरुआत करें (Start Small):

  • शुरुआत में बड़ा निवेश न करें। (Don’t invest heavily at the beginning.)
  • छोटे स्तर पर शुरुआत करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। (Start small and gradually increase.)
  • अपने दोस्तों और परिवार से मदद लें। (Take help from your friends and family.)

3. कम लागत वाले व्यवसाय विचार (Low-Cost Business Ideas):

  • ट्यूशन: स्कूल के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना। (Tutoring school children.)
  • हस्तशिल्प: हाथ से बनी चीजें बेचना (जैसे गहने, पेंटिंग)। (Selling handmade items (like jewelry, paintings).)
  • ऑनलाइन सेवाएं: डिजाइनिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट। (Online services: designing, content writing, social media management.)
  • खाद्य पदार्थ: घर पर बने स्नैक्स या मिठाई बेचना। (Selling homemade snacks or sweets.)
  • स्थानीय पर्यटन में मदद: पर्यटकों को जानकारी देना या गाइड करना। (Helping tourists with information or guiding them.)
  • इवेंट मैनेजमेंट में मदद: छोटे इवेंट्स को ऑर्गनाइज करने में मदद करना। (Helping in organizing small events.)
  • पौधों से संबंधित काम: छोटे पौधे उगाकर बेचना या गार्डनिंग सेवाएं देना। (Growing and selling small plants or providing gardening services.)

4. मार्केटिंग (Marketing):

  • अपने व्यवसाय के बारे में लोगों को बताएं। (Tell people about your business.)
  • सोशल मीडिया का उपयोग करें। (Use social media.)
  • अपने दोस्तों और परिवार को बताएं। (Tell your friends and family.)
  • स्थानीय दुकानों और बाजारों में संपर्क करें। (Contact local shops and markets.)
  • पम्फलेट और पोस्टर बनवाएं। (Get pamphlets and posters made.)

5. समय प्रबंधन (Time Management):

  • पढ़ाई और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाएँ। (Maintain a balance between studies and business.)
  • अपना समय अच्छे से मैनेज करें। (Manage your time well.)
  • एक समय सारणी बनाएं। (Create a timetable.)

6. कानूनी पहलू (Legal Aspects):

  • अपने व्यवसाय के लिए आवश्यक परमिट और लाइसेंस के बारे में पता करें। (Find out about the necessary permits and licenses for your business.)
  • स्थानीय नियमों का पालन करें। (Follow local rules.)

7. सीखते रहें (Keep Learning):

  • अपने व्यवसाय से संबंधित नई चीजें सीखते रहें। (Keep learning new things related to your business.)
  • ऑनलाइन कोर्सेज और वर्कशॉप में भाग लें। (Participate in online courses and workshops.)
  • सफल व्यवसायियों से सलाह लें। (Take advice from successful businessmen.)

8. धैर्य रखें (Be Patient):

  • किसी भी व्यवसाय को सफल होने में समय लगता है। (It takes time for any business to succeed.)
  • धैर्य रखें और मेहनत करते रहें। (Be patient and keep working hard.)

9. असफलता से न डरें (Don’t be afraid of failure):

  • असफलता व्यवसाय का एक हिस्सा है। (Failure is a part of business.)
  • अपनी गलतियों से सीखें और आगे बढ़ें। (Learn from your mistakes and move forward.)

10. अपने समुदाय को वापस दें (Give back to your community):

  • अपने व्यवसाय के माध्यम से अपने समुदाय की मदद करें। (Help your community through your business.)

इन सुझावों का पालन करके, उत्तराखंड के स्कूल और कॉलेज के छात्र अपना छोटा व्यवसाय सफलतापूर्वक शुरू कर सकते हैं और अपने भविष्य के लिए अनुभव और कमाई हासिल कर सकते हैं।

टिहरी गढ़वाल में अदरक की खेती: एक जिला, एक उत्पाद योजना के तहत

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टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में अदरक की खेती के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी पाई जाती है। “एक जिला, एक उत्पाद” योजना के तहत, जिले में अदरक की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। टिहरी गढ़वाल में अदरक की खेती को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

1. उपयुक्त क्षेत्र का चुनाव:

  • टिहरी गढ़वाल में अदरक की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु और अच्छी जल निकासी वाली भूमि उपयुक्त है।
  • जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्र अदरक की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं। अपनी मिट्टी की उर्वरता और जलवायु के अनुसार क्षेत्र का चुनाव करें।

2. किस्म का चुनाव:

  • अदरक की कई किस्में उपलब्ध हैं, जैसे कि देशी अदरक, नादिया अदरक, और चाइना अदरक।
  • टिहरी गढ़वाल की स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुसार उपयुक्त किस्म का चुनाव करें। कृषि विभाग से सलाह लें। स्थानीय किसानों से भी जानकारी ले सकते हैं कि कौन सी किस्म वहां अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

3. बीज और रोपण:

  • स्वस्थ और रोगमुक्त बीजों का उपयोग करें। बीज के लिए आप स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं या फिर उन्नत किस्मों के बीज खरीद सकते हैं।
  • अदरक के कंदों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें, जिनमें 2-3 अंकुर हों।
  • कंदों को रोपने से पहले उन्हें कवकनाशी (fungicide) से उपचारित करें। इससे कंदों में सड़न नहीं लगेगी।
  • कंदों को 20-25 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियों में रोपें। पंक्तियों के बीच की दूरी भी उचित रखें ताकि पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले।

4. खाद और उर्वरक:

  • अदरक की अच्छी पैदावार के लिए जैविक खाद (organic manure) और उर्वरकों का उपयोग करें। जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पैदावार अच्छी होती है।
  • गोबर की खाद, कम्पोस्ट, और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करें।
  • रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करें। मिट्टी परीक्षण से पता चल जाता है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और उसी के अनुसार उर्वरक डाला जाता है।

5. सिंचाई:

  • अदरक की खेती के लिए नियमित सिंचाई आवश्यक है।
  • मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन अधिक पानी जमा न होने दें। अधिक पानी जमा होने से कंद सड़ सकते हैं।
  • सिंचाई की आधुनिक तकनीकों, जैसे कि ड्रिप सिंचाई (drip irrigation), का उपयोग करें। ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पानी मिलता है।

6. खरपतवार नियंत्रण:

  • खरपतवारों को नियमित रूप से निकालें। खरपतवार पौधों के साथ पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पैदावार कम हो सकती है।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करें।

7. रोग और कीट नियंत्रण:

  • अदरक में कई तरह के रोग और कीट लगते हैं, जैसे कि कंद सड़न, पत्ती धब्बा, और तना छेदक।
  • रोगों और कीटों से बचाव के लिए उचित उपाय करें। इसके लिए आप कृषि विभाग से सलाह ले सकते हैं।
  • जैविक कीटनाशकों (bio-pesticides) का उपयोग करें।

8. कटाई और भंडारण:

  • अदरक की फसल 8-9 महीने में तैयार हो जाती है।
  • जब पत्ते पीले पड़ने लगें, तो अदरक की खुदाई करें।
  • अदरक को साफ करके छायादार जगह में सुखा लें।
  • सूखे अदरक को ठंडी और हवादार जगह में भंडारित करें।

9. “एक जिला, एक उत्पाद” योजना का लाभ:

  • इस योजना के तहत किसानों को अदरक की खेती के लिए तकनीकी सहायता, बीज, और विपणन सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना किसानों को अदरक की खेती के लिए प्रोत्साहित करती है और उन्हें बाजार उपलब्ध कराती है।
  • योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें। टिहरी गढ़वाल में कृषि विभाग से संपर्क करके आप इस योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं।

अतिरिक्त सुझाव:

  • अदरक की खेती के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग से संपर्क करें।
  • स्थानीय किसानों से सलाह लें, जिन्होंने अदरक की खेती में सफलता प्राप्त की है। स्थानीय किसानों का अनुभव आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है।
  • अदरक की खेती से संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

निष्कर्ष:

टिहरी गढ़वाल में अदरक की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय हो सकता है। “एक जिला, एक उत्पाद” योजना के तहत किसानों को कई तरह की सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे अदरक की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। सही जानकारी और उचित तरीकों से खेती करके किसान अच्छी पैदावार और आय प्राप्त कर सकते हैं।