उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद: वास्तविकता का परीक्षण – डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल

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उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद: वास्तविकता का परीक्षण - डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल

उत्तराखंड सरकार द्वारा फिल्म पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (Uttarakhand Film Development Council)
की स्थापना की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से इस पहल को शुरू किया गया। लेकिन क्या यह परिषद वास्तव में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है, या यह सिर्फ एक औपचारिक घोषणा बनकर रह गई है? इस लेख में हम इन सवालों का विश्लेषण करेंगे।

डॉ. नितिन उपाध्याय कौन हैं?

डॉ. नितिन उपाध्याय उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्हें परिषद की योजनाओं और गतिविधियों के बारे में जानकारी देने के लिए नियुक्त किया गया है।

3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) का क्या हुआ?

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म नीति में 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) को प्राथमिकता दे रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि
क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है? क्या सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों में वास्तविक कार्य किया है? क्या स्थानीय युवाओं को फिल्म उद्योग में अवसर देने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ है?

1. उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (Uttarakhand Film Council) धरातल पर कहां है?

सरकार ने उत्तराखंड को ‘फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन’ बनाने का वादा किया है, लेकिन:

परिषद का कोई भौतिक कार्यालय कहां स्थित है?

क्या इसका कोई निश्चित पता है?

यदि कोई फिल्म निर्माता या निवेशक परिषद से संपर्क करना चाहे, तो वह कहां जाए?

अगर यह परिषद वास्तव में काम कर रही है, तो इसका स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पता होना चाहिए।

2. कोई आधिकारिक वेबसाइट क्यों नहीं है?

आज के डिजिटल युग में हर सरकारी संस्था की अपनी वेबसाइट होती है, जहां से लोग संपर्क कर सकते हैं और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की कोई आधिकारिक वेबसाइट क्यों नहीं है?

यदि वेबसाइट है, तो वह जनता की पहुंच में क्यों नहीं है?

फिल्म निर्माताओं के लिए ऑनलाइन आवेदन या गाइडलाइंस कहां उपलब्ध हैं?

बिना वेबसाइट के, फिल्म निर्माताओं को जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई होगी और यह पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है।

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यदि कोई फिल्म निर्माता या निवेशक परिषद से संपर्क करना चाहे, तो वह कहां जाए?

3. कोई आधिकारिक संपर्क नंबर या व्यक्ति क्यों उपलब्ध नहीं है?

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से संपर्क करने के लिए कोई आधिकारिक फोन नंबर या ईमेल उपलब्ध नहीं है।

फेसबुक पेज पर उपलब्ध नंबर +91 70550 07009 कॉल करने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रहा।

क्या सरकार फिल्म निर्माताओं को सहयोग देने के लिए गंभीर है, या यह केवल घोषणाओं तक सीमित है?

परिषद में मुख्य संपर्क अधिकारी कौन हैं? यदि कोई फिल्म निर्माता किसी समस्या का सामना करता है, तो वह किससे संपर्क करे?

 

4. क्या केवल घोषणाएं और बैठकें ही हो रही हैं?

सरकार और प्रशासन के अधिकारी बैठकें कर रहे हैं और बयान दे रहे हैं, लेकिन असल में क्या हो रहा है?

पुलिस विभाग को फिल्म निर्माताओं की मदद करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन क्या इस पर अमल हो रहा है?

क्या कोई फिल्म निर्माता यह पुष्टि कर सकता है कि उत्तराखंड में शूटिंग की अनुमति आसानी से मिल रही है?

क्या नोडल अधिकारियों की सूची सार्वजनिक की गई है?

बिना सही इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शिता के, सिर्फ घोषणाएं करने से उत्तराखंड फिल्म हब नहीं बन सकता।

5. नई फिल्म नीति 2024 के वादे कितने व्यावहारिक हैं?

सरकार ने नई फिल्म नीति 2024 के तहत अनुदान और अन्य सुविधाओं का वादा किया है:
✅ सिंगल विंडो सिस्टम: दावा किया जा रहा है कि शूटिंग अनुमति आसान कर दी गई है।✅ 30% सब्सिडी: राज्य में होने वाली फिल्मों को कुल बजट का 30% (अधिकतम ₹3 करोड़) अनुदान दिया जाएगा।✅
₹50 करोड़ से ऊपर की फिल्मों को लाभ: विदेशी फिल्मों या बड़े बजट (₹50 करोड़ से अधिक) की फिल्मों को 30% सब्सिडी मिलेगी।

लेकिन असल सवाल यह है:

क्या यह सब्सिडी वाकई में दी जा रही है?

अब तक कितनी फिल्मों ने इसका लाभ उठाया है?

क्या इस बारे में कोई आधिकारिक रिपोर्ट या डेटा सार्वजनिक किया गया है?

6. क्या उत्तराखंड में फिल्म इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है?

फिल्म निर्माण के लिए केवल प्राकृतिक लोकेशन्स ही काफी नहीं होतीं, इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी चाहिए।

क्या उत्तराखंड में कोई फिल्म सिटी विकसित हो रही है?

क्या कोई सरकारी स्टूडियो बनाया जा रहा है?

क्या स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को ट्रेनिंग देने की कोई योजना है?

यदि सरकार उत्तराखंड को वाकई फिल्म हब बनाना चाहती है, तो उसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान देना होगा।

7. क्या सरकार केवल बड़े फिल्म निर्माताओं को ही सुविधा दे रही है?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक प्रकाश झा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहयोग देने की बात कही गई। लेकिन सवाल यह उठता है:

क्या यह सहयोग सिर्फ बड़े फिल्म निर्माताओं तक सीमित रहेगा?

क्या छोटे और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को भी समान सुविधाएं दी जाएंगी?

क्या कोई स्थानीय फिल्मकार इस नई नीति से लाभ उठा सका है?

8. भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उत्तराखंड की भागीदारी

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के 55वें संस्करण में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने गोवा के फिल्म बाजार में भाग लिया।

नॉलेज सीरीज के तहत उत्तराखंड की नई फिल्म नीति 2024 पर चर्चा हुई।

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अभिनेता अनंत महादेवन नारायण ने उत्तराखंड की शूटिंग प्रक्रिया की सराहना की।

अभिनेता अमित सियाल ने नैनीताल में शूटिंग के अपने अनुभव साझा किए और कहा कि वह दोबारा यहां शूटिंग करना चाहेंगे।

अभिनेत्री श्रुति पवार ने उत्तराखंड को “No less than Switzerland” कहा।

ऑस्ट्रेलिया के फिल्म निर्माता अनुपम शर्मा ने घोषणा की कि उनकी आगामी बायोपिक फिल्म का आधा हिस्सा उत्तराखंड में शूट होगा।

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय से सवाल: 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) सिर्फ बयानबाजी या हकीकत?

परिषद के अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म नीति में 3T (टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग) को प्राथमिकता दे रही है।
लेकिन सवाल यह उठता है:

क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है?

क्या सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों में वास्तविक कार्य किया है?

क्या स्थानीय युवाओं को फिल्म उद्योग में अवसर देने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ है?

निष्कर्ष: क्या केवल सोशल मीडिया पोस्ट और घोषणाओं से विकास संभव है?

सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब धरातल की हकीकत देखी जाती है, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिलता।

बिना वेबसाइट और संपर्क नंबर के पारदर्शिता का दावा अधूरा है।

बिना ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर के फिल्म हब बनने की बात केवल प्रचार लगती है।

फेसबुक पोस्ट डालने और बैठकों से विकास नहीं होगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस काम करना पड़ेगा।

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क्या यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन के लिए कहा जा रहा है? बिना वेबसाइट और संपर्क नंबर के पारदर्शिता का दावा अधूरा है।

यदि उत्तराखंड सरकार वास्तव में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना चाहती है, तो उसे इन मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा और जनता को पारदर्शी तरीके से सभी जानकारियाँ उपलब्ध करानी होंगी।

आपका क्या विचार है? क्या उत्तराखंड सरकार को इन मुद्दों पर और अधिक पारदर्शिता रखनी चाहिए?